Cyber Crime: कॉरपोरेट की तरह काम कर रहे गैंग, यहां बॉस के बाद होते हैं पांच और लेयर, जहां से चलता ठगी का खेल
साइबर ठगी छह स्तर पर संचालित हो रही है। सबसे ऊपर एक टीम बॉस स्तर की है जो हांगकांग के बॉस से इंडिया हेड को निर्देश देकर टेलीग्राम के जरिये लोगों को जोड़ने, काम समझाने, कुछ लोगों को ट्रेनिंग के लिए विदेश भेजने, कमीशन आधारित वेतन तय करती है।
विस्तार
हांगकांग से संचालित शेयर निवेश के नाम पर ठगी करने वाला साइबर हैकर गिरोह कॉरपोरेट कंपनी की तरह कार्य कर रहा है। एक सप्ताह की जांच में अलीगढ़ साइबर टीम ने गिरोह पर शिकंजा कसा है। अभी खुद टीम यह मान रही है कि गिरोह कहीं न कहीं काम कर रहा होगा। अभी तक देश के नार्थ-ईस्ट या पश्चिम बंगाल में कहीं छिपे होने का अंदेशा है। इनका निशाना एक नंबर के रकम पर है।
स्वर्ण जयंती नगर कॉलोनी के दिनेश कुमार शर्मा सेवानिवृत्त बैंक अफसर हैं। उनके साथ दिसंबर से जनवरी के मध्य 45 दिन के अंतराल में शेयर में निवेश व 200 गुना मुनाफा दिलाने के नाम पर 1.10 करोड़ की साइबर ठगी हुई है। शनिवार को इसका खुलासा करते हुए साइबर टीम ने यूपी सहित देश के अलग अलग राज्यों से 12 लोगों को पकड़ा है। साइबर नोडल एसपी देहात अमृत जैन बताते हैं कि ये लोग इस गिरोह के लिए सिर्फ खाते दिलाने वाले व रुपया ट्रांसफर कराने वाले हैं। इनके जरिये पुलिस को बहुत कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं, जिनके सहारे पुलिस आगे बढ़ने का प्रयास कर रही है।
इस गिरोह के खिलाफ एक सप्ताह की जांच व धरपकड़ में पुलिस ने पाया कि गिरोह का सरगना या मास्टरमाइंड हांगकांग में छिपा है। वहीं से यह सब संचालित कर रहा है। उसका एक इंडिया हेड भी है, जो देश में रहकर हांगकांग वाले बॉस के इशारे पर छह लेयर वाली कर्मचारियों की टीम से सब कुछ करता है। सभी छह टीमों में कितने लोग हैं, कितनों की एक दूसरे से पहचान या संपर्क है। ये सब सवाल जांच में अनुत्तरित हैं। जो लोग पकड़े गए हैं, उनमें खातों से रकम ट्रांसफर करने वाली लेयर के लोग हैं।
हमारी टीमों ने साइबर ठगी के मामले में बड़ी सफलता हासिल की है। हमार प्रयास है कि आगे भी इस गिरोह की कडि़यों को जोड़कर जो लोग बचे हैं, उन पर शिकंजा कसा जाए। साथ में लोगों को सचेत व सजग करने के प्रयास जारी हैं। - नीरज जादौन, एसएसपी
ऐसे छह लेयर में काम कर रहा गिरोह
- एक टीम बॉस स्तर की है जो हांगकांग के बॉस से इंडिया हेड को निर्देश देकर टेलीग्राम के जरिये लोगों को जोड़ने, काम समझाने, कुछ लोगों को ट्रेनिंग के लिए विदेश भेजने, कमीशन आधारित वेतन तय करती है।
- दूसरी टीम 50 वर्ष से अधिक आयु वाले अधिकारी, सेवानिवृत्त अफसर, बड़े व्यापारियों के खातों, वित्तीय लेनदेन, सोशल मीडिया अकाउंटों का डेटा जुटाकर गिरोह को देती है। इसमें कितने लोग हैं, अंदाजा नहीं।
- तीसरी टीम डेटा वाले नंबरों का व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर उन्हें जोड़ती है। फिर उन्हें 200 से 300 गुना मुनाफे के लालच में फंसाया जाता है। उन्हें एक एप में खाते खुलवाकर उसमें रकम लगाने के लिए प्रेरित करती है।
- चौथी टीम का काम बैंक खातों में रकम आने पर उन्हें इधर से उधर करने, यूएसडीटी खरीदने, इंडिया हेड को अपडेट देने के साथ-साथ पूरा बहीखाता अपडेट रखना होता है।
- पांचवीं टीम का काम खाते जुटाने व खाता धारकों को ठगी के समय भरोसे में लेकर साथ रखने या साथ न होने पर रुपये ट्रांसफर करने वाली टीम के संपर्क में रहकर रकम इधर -उधर कराने का होता है।
- छठवीं टीम का काम होता है खाते व मोबाइल सिम जुटाने का। जिनके जरिये नए खाते खोलने से लेकर खातों के जरिये ठगी की रकम इधर-उधर करने व सिम से कॉल करने का काम होता है।
दो दर्जन व्हाट्सएप ग्रुप के विवरण मिले
एसपी देहात अमृत जैन बताते हैं कि सौरभ नाम का यह सरगना गंभीर बीमारी से ग्रसित है। अस्पताल में भर्ती है। इसलिए उसे टीम ने अभी छोड़ रखा है। वह लगातार पुलिस निगरानी में है। इसके अलावा इससे ऊपर इंडिया हेड के विषय में काफी कुछ मिला है। इसके अलावा दो दर्जन करीब ऐसे लोग हैं, जो व्हाट्सएप ग्रुप ऑपरेट करने से लेकर खातों से रकम ट्रांसफर कर रहे थे। उनका विवरण मिल गया है। इन सभी पर साइबर टीमें काम कर रही हैं। वहीं, हांगकांग से ऑपरेट हो रही एप, व्हाट्सएप ग्रुप व कॉलिंग नंबर आदि के लिए सीबीआई को इंटरपोल के लिए लिखा जा रहा है।
ताला कारोबार के टर्नओवर से बड़ी ठगी, कहां गई रकम
साइबर पुलिस टीम ने इस खुलासे में पाया कि इस गिरोह ने पिछले कुछ माह में 5000 करोड़ से ज्यादा की ठगी की है। 1200 करोड़ की ठगी छह फरवरी को होने से बचा ली है। यह रकम अलीगढ़ के ताला हार्डवेयर कारोबार के सालाना टर्न ओवर से कहीं अधिक है। ऐसे में सवाल यही है कि ये रकम कहां गई। दूसरा अनुमान ये भी है कि आज भी ये धंधा जारी होगा। कहीं, दूसरे ग्रुप दूसरे क्षेत्रों में काम कर रहे होंगे। खुलासे में उजागर हुआ है कि ठगी की रकम से यूएसडीटी खरीदी जा रही है। यह खरीदकर कहां भेजे जा रहे या किसके पास खरीदे जा रहे। ये अभी उजागर होना बाकी है। अंदेशा विदेशी फंडिंग का है।
हैकरों की तर्ज पर पुलिस सक्रिय
एसपी देहात अमृत जैन बताते हैं कि इस खुलासे के साथ एक साइबर टीम को 50 आयु वर्ग से ऊपर वाले व्यापारी वर्ग व अफसर वर्ग व सेवानिवृत्त वर्ग के लोगों की सूची बैंकों से मांगी गई है। उस सूची के अनुसार लोगों को जागरूक किया जाएगा कि वे किसी तरह के लालच या बहकावे में न आएं।