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भाजपाई गुटों में फायरिंग: सुरक्षा पर उठे सवाल, मिशन 2027 में पार्टी पर भारी न पड़ जाए भाजपाइयों की लड़ाई

अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Fri, 13 Mar 2026 12:06 PM IST
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सार

अलीगढ़ शहर और कोल विधानसभा सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों को अपने प्रतिबंध प्रत्याशियों से कांटे की टक्कर रहती है। इन दोनों सीटों पर हार जीत का अंतर ज्यादा नहीं रहता। भाजपाई गुटों में लड़ाई का असर इन दोनों सीटों पर पड़ सकता है।

Firing between BJP groups in Aligarh
माल गोदाम चौराहे पर नहीं दिखा कोई भी पुलिस कर्मी - फोटो : संवाद
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विस्तार

अलीगढ़ शहर के हृदय स्थल सराय हकीम क्षेत्र में बृहस्पतिवार को हुई फायरिंग की घटना ने न केवल कानून-व्यवस्था को चुनौती दी है, बल्कि सत्ताधारी दल के भीतर चल रही आपसी खींचतान को भी सड़क पर ला खड़ा किया है। भाजपा युवा मोर्चा के महानगर अध्यक्ष पद के लिए मची ‘’गुटबाजी’’ ने हिंसक मोड़ ले लिया, जिससे व्यापारियों और आम लोगों ने चिंता जताई है। 

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इस घटना ने आगामी विधानसभा चुनाव लक्ष्य-2027 की तैयारी में जुटे भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की चिंता बढ़ा दी है। व्यापारी संगठनों का मानना है कि यदि युवाओं को समय रहते अनुशासन का पाठ नहीं पढ़ाया गया, तो पार्टी की छवि को भारी नुकसान हो सकता है। व्यापारी प्रतिनिधियों ने एक स्वर में इस हिंसक आचरण की निंदा की है और नेताओं को आत्ममंथन की सलाह दी है। 
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अलीगढ़ उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष विशाल भगत कहते हैं कि युवाओं का यह आचरण चिंताजनक है। जिम्मेदार नेताओं का फर्ज है कि वे युवाओं की ऊर्जा को गुटबाजी के बजाय सही दिशा में लगाने का काम करें। अलीगढ़ उद्योग व्यापार मंडल के युवा अध्यक्ष ध्रुवेश चंद्र वार्ष्णेय कहते हैं कि संगठन में जिम्मेदारी हासिल करने के लिए खुद को साबित करना होता है, न कि हथियार उठाना। युवाओं को धैर्य और संयम से काम लेना चाहिए। 

उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष सतीश माहेश्वरी कहते हैं कि ऐसी घटनाएं बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं। जोश में आकर युवा अपना ही भविष्य अंधकार में डाल लेते हैं।उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के अध्यक्ष कमल कुमार गुप्ता कहते हैं कि स्थानीय पुलिस को सतर्कता बरतनी होगी। पुलिस और नेताओं को मिलकर युवाओं के साथ संवाद करना चाहिए, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।कानून-व्यवस्था पर सवाल : भरे बाजार में हुई इस फायरिंग ने पुलिस की गश्त और खुफिया तंत्र पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं। व्यापारियों का कहना है कि राजनीतिक रसूख के चलते अक्सर ऐसे मामलों में ढिलाई बरती जाती है, जिससे उपद्रवियों के हौसले बुलंद होते हैं। लोगों की मांग है कि राजनीतिक दलों के पदाधिकारी अपने कार्यकर्ताओं पर लगाम कसें।

मिशन 2027 में पार्टी पर भारी न पड़ जाए भाजपाइयों की लड़ाई

Firing between BJP groups in Aligarh
महावीरगंज बाजार में खाली पड़ी पुलिस चौकी और बाजार में सन्नाटा - फोटो : संवाद

अलीगढ़ में भाजपा संगठन गुटबाजी से जूझ रहा है। विवाद का स्तर मारपीट और फायरिंग तक पहुंच गया है। जिला इकाई, महानगर इकाई, मंडल इकाई से लेकर फ्रंटल संगठनों तक में पदों को लेकर मारामारी के हालात हैं। बृहस्पतिवार को भाजपाइयों में हुई मारपीट और फायरिंग की घटना भी इसी का परिणाम है। पिछले कुछ दिनों में ही भाजपाइयों में विवाद के कई मामले सामने आए हैं। इन विवादों की जानकारी प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व को है, लेकिन इस स्थिति पर काबू पाने के प्रयास नाकाफी दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों पर भी इस स्थिति का असर पड़ सकता है।

जिला और महानगर अध्यक्ष पद पर तैनाती को लेकर भाजपा नेतृत्व को काफी मंथन करना पड़ा था। इसका बड़ा कारण था पार्टी में चल रही गुटबाजी। दोनों ही प्रमुख पदों पर बदलाव के आसार दिखाई दे रहे थे, लेकिन जिले के कुछ कद्दावर नेता बदलाव नहीं चाहते थे और इन पदों पर तैनात नेताओं को ही पुन: जिम्मेदारी देने का दबाव बनाए हुए थे। पार्टी ने जिला अध्यक्ष पद पर कृष्णपाल सिंह लाला और महानगर अध्यक्ष पद पर इंजी. राजीव शर्मा की पुन: तैनाती कर दी। 

गुटबाजी निचले स्तर पर पहुंच चुकी है। अब महानगर और जिला की कार्यकारिणी, मोर्चा और प्रकोष्ठ के अध्यक्ष पदों पर घोषणा होनी है। इसलिए वर्चस्व की लड़ाई भी शुरू हो गई है। बृहस्पतिवार को सराय हकीम में हुए विवाद में शामिल हर्षद हिंदू पर वर्तमान में भाजयुमो में महानगर मंत्री की जिम्मेदारी है। गोली लगने से घायल लोग भी संगठन में सक्रिय हैं।

शहर-कोल सीटों पर पड़ेगा सीधा असर
अलीगढ़ शहर और कोल विधानसभा सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों को अपने प्रतिबंध प्रत्याशियों से कांटे की टक्कर रहती है। इन दोनों सीटों पर हार जीत का अंतर ज्यादा नहीं रहता। कई चुनाव में धुव्रीकरण का माहौल भी रहा है, हालांकि पिछले लोकसभा चुनाव में भी कांटे की टक्कर रही और वोटों के बहुत कम अंतर से भाजपा प्रत्याशी सतीश गौतम तीसरी बार सांसद चुने गए। गुटबाजी के चलते शहर और कोल विधानसभा सीटों पर भाजपा को कई बार हार का सामना करना पड़ा है।

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