Blood: दो सरकारी ब्लड बैंक से खुला राज, खून लेने और देने से पहले जान लें यह, वरना हो जाएगी देर
अलीगढ़ की दो सबसे बड़ी सरकारी ब्लड बैंक के रिकॉर्ड बताते हैं कि पिछले चार महीने में जेएन मेडिकल कॉलेज में रक्तदान के लिए पहुंचे 150 और जिला अस्पताल में 45 लोगों में हेपेटाइटिस संक्रमण की पुष्टि हुई।
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वे किसी और की जान बचाने के लिए रक्तदान करने पहुंचे थे, लेकिन ब्लड बैंक की अनिवार्य जांच ने उनकी अपनी सेहत का ऐसा सच सामने ला दिया, जिसकी उन्हें भनक तक नहीं थी। शहर की दो सबसे बड़ी सरकारी ब्लड बैंक के रिकॉर्ड बताते हैं कि पिछले चार महीने में जेएन मेडिकल कॉलेज में रक्तदान के लिए पहुंचे 150 और जिला अस्पताल में 45 लोगों में हेपेटाइटिस संक्रमण की पुष्टि हुई। संक्रमित होने के कारण इनका रक्त नहीं लिया गया और उन्हें इलाज की सलाह देकर लौटा दिया गया।
चिंता की बात यह है कि इन लोगों में से कितनों ने इलाज शुरू कराया और कितने अब भी उपचार से दूर हैं, इसका कोई समेकित रिकॉर्ड स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि हेपेटाइटिस बी और सी का वायरस वर्षों तक बिना लक्षण के शरीर में रह सकता है। समय पर इलाज नहीं मिलने पर यही संक्रमण लिवर सिरोसिस, लिवर फेलियर और लिवर कैंसर का कारण बन सकता है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. जगवीर वर्मा ने बताया कि हेपेटाइटिस की पुष्टि होने पर सभी को मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने की सलाह दी गई। बाद में कितने मरीज उपचार तक पहुंचे, इसकी जानकारी नहीं है।
पहचान के बाद मरीज सिस्टम से हो रहे गायब
विशेषज्ञों का कहना है कि हेपेटाइटिस के कई मरीजों को संक्रमण का पता रक्तदान या अन्य जांच के दौरान चलता है। इसके बाद फॉलोअप की व्यवस्था नहीं होने से कई मरीज इलाज से दूर हो जाते हैं। उनका मानना है कि ऐसे मरीजों की नियमित निगरानी और उपचार सुनिश्चित करने के लिए सरकार को प्रभावी ट्रैकिंग सिस्टम विकसित करना चाहिए।
सभी से कर रहे संपर्क, करेंगे काउंसलिंग
मेडिकल कॉलेज के डॉ. उबैश अशरफ ने बताया कि ब्लड बैंक में जांच के दौरान 150 लोगों में हेपेटाइटिस की पुष्टि हुई। उन्हें अब वापस अस्पताल आकर उपचार लेने के लिए संपर्क किया जा रहा है। जागरूकता के लिए हर साल 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाते हैं। इस साल सोमवार को इस दिवस पर एक कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है जिसमें ऐसे लोगों के लिए बकायदा काउंसलिंग की व्यवस्था रखी गई है। उन्होंने कहा कि हेपेटाइटिस बी और सी का वायरस कई बार वर्षों तक शरीर में बिना लक्षण के मौजूद रहता है। मरीज को सामान्य कमजोरी या कोई परेशानी भी महसूस नहीं होती। इसी कारण अधिकांश लोगों को बीमारी का पता तभी चलता है, जब रक्तदान, ऑपरेशन या किसी अन्य जांच के दौरान स्क्रीनिंग होती है। यदि समय रहते इलाज नहीं कराया गया तो यही संक्रमण आगे चलकर लिवर को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है।
लाखों खर्च के बाद भी नहीं बच सके चंदन
कॉलेज के दिनों में रक्तदान शिविर में चंदन (42) को हेपेटाइटिस का पता चला था, लेकिन उन्होंने न इलाज कराया और न नियमित जांच कराई। करीब 20 साल तक वे सामान्य जीवन जीते रहे। 2024 में आंखों की समस्या के बाद स्टेरॉयड उपचार शुरू हुआ और बाद में टीबी भी हो गई। जब हालत बिगड़ी तो जांच में हेपेटाइटिस से लिवर को गंभीर नुकसान का पता चला। डॉक्टरों ने लिवर प्रत्यारोपण की सलाह दी। जून से नवंबर 2025 के बीच अपोलो और मैक्स अस्पताल में करीब 28 लाख रुपये खर्च हुए, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी।
(जैसा कि चंदन की पत्नी चंचल ने बताया। अंत में उन्होंने कहा, अगर उस समय इलाज करा लिया होता और नियमित निगरानी करते तो शायद आज वे हमारे बीच होते।)
क्या है हेपेटाइटिस?
हेपेटाइटिस यकृत (लिवर) में होने वाली सूजन है। इसके पांच प्रकार ए, बी, सी, डी और ई हैं। इनमें हेपेटाइटिस बी और सी सबसे गंभीर माने जाते हैं, क्योंकि समय पर इलाज न मिलने पर ये लिवर सिरोसिस, लिवर फेलियर और लिवर कैंसर का कारण बन सकते हैं।
कैसे फैलता है?
- दूषित पानी और भोजन
- संक्रमित रक्त
- असुरक्षित सुई
- असुरक्षित यौन संबंध
- संक्रमित मां से बच्चे में
लक्षण
- बुखार
- कमजोरी
- भूख कम लगना
- उल्टी या दस्त
- पेट दर्द
- गहरे रंग का पेशाब
- आंखों या त्वचा का पीला पड़ना (पीलिया)।