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AMU Research: प्रोसेस्ड मीट प्रोडक्ट नहीं होगा जल्द खराब, अलसी के गोंद और पान के पत्ते के अर्क से चलेगा ज्यादा

इकराम वारिस, अमर उजाला, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Thu, 12 Feb 2026 03:58 PM IST
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सार

आम, केले के छिलके और पान के पत्तों का रस और अलसी गोंद से बनी बायोएक्टिव पैकेजिंग फिल्म (अलसी गोंद और पान के पत्ते के अर्क) मीट की नमी और रंग को लंबे समय तक बनाए रखती है

Linseed gum and betel leaf extracts increase the shelf life of meat
मीट प्रोडक्ट - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार

अब प्रोसेस्ड मीट उत्पाद जल्द खराब नहीं होंगे। अलसी के गोंद और पान के पत्ते के अर्क की प्राकृतिक लेप की पैकेजिंग से मीट की उम्र बढ़ जाएगी। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के कृषि विज्ञान संकाय के पोस्ट हार्वेस्ट इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी विभाग के वैज्ञानिकों ने इसका तरीका खोजा है। पैकेजिंग में अलसी के गोंद और पान के पत्ते के रस की लेप (फिल्म) होगी। इससे मीट लंबे समय तक ताजा रहेगा। नमी, रंग और स्वाद बेहतर बना रहेगा।

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प्रो. सगीर अहमद के मार्गदर्शन में अर्शिद मंजूर ने पांच साल तक मीट की भंडारण अवधि, गुणवत्ता अध्ययन किया है। इसमें पाया गया कि मीट उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन, विटामिन और खनिज का समृद्ध स्रोत है, लेकिन प्रोसेसिंग के दौरान उसमें रासायनिक प्रक्रिया तेजी से बढ़ जाता है, जिससे रंग, स्वाद, गंध प्रभावित होता है। यही कारण है कि प्रोसेस्ड मीट उत्पाद जल्दी खराब हो जाते हैं।
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पहले उपयोग किए जाने वाले सिंथेटिक एंटीऑक्सीडेंट (कृत्रिम रासायनिक यौगिक) स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं। आम, केले के छिलके और पान के पत्तों का रस और अलसी गोंद से बनी बायोएक्टिव पैकेजिंग फिल्म (अलसी गोंद और पान के पत्ते के अर्क) मीट की नमी और रंग को लंबे समय तक बनाए रखती है। यह रासायनिक और प्रोटीन प्रक्रिया को काफी हद तक कम करती है। यह पारंपरिक प्लास्टिक पैकेजिंग का अच्छा विकल्प बन सकता है।

अध्ययन में पाया गया कि प्राकृतिक पैकेजिंग ने मीट की गुणवत्ता बनाए रखी। बदबू, रंग खराब होने और स्वाद बिगड़ने से रोका। फाइबर युक्त स्रोतों ने पोषण स्तर बेहतर किया। मीट उत्पादों को अधिक स्वास्थ्यवर्धक बनाया। - प्रो. सगीर अहमद, पोस्ट हार्वेस्ट इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी विभाग, एएमयू

ये भी जानें

  • चिकन सॉसेज के लिए आम के छिलके का रस सबसे प्रभावी पाया गया। इससे रंग, स्वाद और बनावट बनी रहती है। लिपिड व प्रोटीन ऑक्सीकरण कम हुआ। भंडारण अवधि बढ़ी।
  • मीट सॉसेज के लिए पान के पत्ते का रस माइक्रोबियल वृद्धि को रोकता है, बनावट और स्वाद सुधारने में प्रभावी साबित हुआ।
  • मीट पेटीज में केले के छिलके का पाउडर फाइबर की मात्रा बढ़ाता है। वसा और ऑक्सीकरण कम करता है। हालांकि, अधिक मात्रा में इससे स्वाद पर हल्का नकारात्मक असर देखा गया।
  • प्राकृतिक रस से बने बायोएक्टिव पैकेजिंग फिल्म (अलसी गोंद, पान के पत्ते का रस) से मांस की नमी और रंग को लंबे समय तक बनाए रखती हैं।
  • वजन घटाना, माइक्रोबियल गिनती और ऑक्सीकरण को कम करती है।


मीट निर्यात यूनिट के लिए बेहतर है अलीगढ़
अलीगढ़ में भूसा-हरा चारा और भैंसों की उपलब्धता आसानी से हो जाती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा तक के पशु यहां आसानी से आ जाते हैं। यहां पर बूचड़खानों के मजदूरों की उपलब्धता है। यहीं कारण है कि अलीगढ़ मीट निर्यात के क्षेत्र में अग्रणी है।

देश के 970वें अरबपति बने हाजी जहीर
29 अगस्त 2024 को जारी हुई हुरून इंडिया रिच लिस्ट में अलीगढ़ के प्रमुख मीट निर्यातक हाजी जहीर को देश के अरबपतियों में 970वां स्थान प्राप्त हुआ है। उनकी नेटवर्थ 2300 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। वह अलीगढ़ आयकर विभाग की टॉप टेन करदाता लिस्ट में वर्ष 2018 से शामिल हैं। अल-हम्द फूड एग्रो प्राइवेट लिमिटेड के साथ वह दो मीट निर्यात यूनिटों के स्वामी हैं।

साल-दर-साल बढ़ता मीट का निर्यात

  • वर्ष 2020-21 में 5000 करोड़ रुपये
  • वर्ष 2021-22 में 5609 करोड़ रुपये
  • वर्ष 2022-23 में 6687 करोड़ रुपये
  • वर्ष 2023-24 में 7000 करोड़ रुपये
  • वर्ष 2024-25 के तीन महीने में 1514 करोड़ रुपये
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