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एएमयू में हुआ शोध: अभी नहीं चेते तो आपकी थाली तक पहुंच जाएंगे मैंगनीज-तांबा, सीसा, जिंक और कैडमियम के अंश

अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Sun, 01 Feb 2026 05:04 PM IST
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सार

शोधार्थी ने अलीगढ़ जिले में उन खेतों की मिट्टी की जांच की गई, जिनमें सीवेज (अपशिष्ट जल) का पानी आता है या उससे सिंचाई होती है। पाया कि यदि अभी नहीं चेते तो मिट्टी की सेहत ही खराब नहीं होगी बल्कि लंबे समय तक धातुओं के ये अंश खेत में रहने पर आपकी थाली तक भी पहुंच जाएंगे।

metal content in the plate
एएमयू - फोटो : संवाद
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विस्तार
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खेतों की मिट्टी में मैंगनीज, तांबा, सीसा, जिंक और कैडमियम जैसी भारी धातुएं जमा हो रही हैं। इनके अंश एजोस्पिरिलम, राइजोबियम, बैसिलस, माइकोराइज़ल कवक और एक्टिनोमाइसेट्स जैसे मिट्टी की उर्वरता के रक्षक सूक्ष्म जीवों के लिए खतरा बन गए हैं। यदि अभी नहीं चेते तो मिट्टी की सेहत ही खराब नहीं होगी बल्कि लंबे समय तक धातुओं के ये अंश खेत में रहने पर आपकी थाली तक भी पहुंच जाएंगे।

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यह खुलासा अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के जंतु विभाग के प्राध्यापक वसीम अहमद के मार्गदर्शन में हुए मोहम्मद फुतैनी सलीम अहमद के शोध में हुआ है। यह शोध अंतरराष्ट्रीय स्वाइल इकोलॉजी लेटर्स में छप चुका है। इसमें बताया गया है कि एक ग्राम उपजाऊ मिट्टी करीब एक अरब से लेकर 10 अरब तक सूक्ष्मजीव हो सकते हैं, जो अब कम हो रहे हैं।
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शोधार्थी ने अलीगढ़ जिले में उन खेतों की मिट्टी की जांच की गई, जिनमें सीवेज (अपशिष्ट जल) का पानी आता है या उससे सिंचाई होती है। शोध में सामने आया कि सीवेज से सिंचाई वाले खेतों में कुल सूक्ष्मजीवों की संख्या घट गई। प्रदूषण सहन करने वाले सूक्ष्मजीव तेजी से बढ़े, जबकि संवेदनशील और उच्च श्रेणी के सूक्ष्मजीव कम होते चले गए।

कुछ सूक्ष्मजीव की प्रजातियां ऐसी भी हैं, जो रैब्डिटिस, पैनाग्रोलाइमस, सेफालोबस और एप्हेलेनकस भारी धातुओं वाले वातावरण में भी जीवित रह सकती हैं। इनकी संख्या सीवेज सिंचित खेतों में अधिक पाई गई, जिससे यह साफ हुआ कि ये प्रदूषण के संकेतक (बायो-इंडिकेटर) के रूप में काम कर सकते हैं।

भारी धातुओं पर नियंत्रण के लिए प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन अपनाया जाए। प्राकृतिक खेती व मिट्टी संरक्षण को बढ़ावा दिया जाए। मिट्टी में रहने वाले ये सूक्ष्म जीव अब चेतावनी दे रहे हैं अगर समय रहते जल प्रदूषण पर लगाम नहीं लगी तो इसका असर इससे फसल उत्पादन, गुणवत्ता और बाद में मानव स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है।-प्रोफेसर वसीम अहमद, जंतु विभाग, एएमयू


मिट्टी की स्थिरता पर खतरा
मिट्टी की सेहत मापने वाले सूचकांक (मैच्योरिटी इंडेक्स) सीवेज सिंचित खेतों में कम पाए गए। इसका अर्थ है कि मिट्टी की पारिस्थितिक स्थिरता कमजोर हो रही है। हालांकि कुछ मामलों में मिट्टी की जैव विविधता बढ़ी हुई दिखी, लेकिन यह अस्थिर और अवसरवादी जीवों की वजह से थी, जो लंबे समय में नुकसानदायक हो सकती है। अगर सीवेज सिंचाई लंबे समय तक जारी रही, तो भारी धातुएं धीरे-धीरे फसलों में जमा हो सकती हैं।

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