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Aligarh News: 10 महीने से लापता नेताजी को बना दिया नगर निगम का पार्षद
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विपिन चंचल ।
- फोटो : FILE PHOTO
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राजनीति में कब क्या हो जाए, कहना मुश्किल है। नगर निगम के लिए 10 नामित पार्षदों की सूची क्या जारी हुई, पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गया। वजह यह रही कि इस सूची में एक ऐसे व्यक्ति का नाम शामिल किया गया है, जो पिछले 10 महीनों से लापता है।
नगर निगम के नामित पार्षदों की सूची में एक नाम विपिन चंचल वाल्मीकि का है। विपिन भाजपा अनुसूचित जाति एवं जनजाति मोर्चा के पदाधिकारी रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि विपिन 21 मई 2025 से ही लापता हैं। उनकी मां ने सासनी गेट थाने में उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट (रपट नंबर 35-25) भी दर्ज करा रखी है। गुमशुदगी के बाद पुलिस और परिजनों ने शहर की दीवारों पर हुलिए और मोबाइल नंबर वाले पर्चे चस्पा किए। इसमें विपिन के पहने हुए कपड़ों और हुलिए आदि का जिक्र किया गया था। 10 महीने बाद भी विपिन की कोई सूचना नहीं मिली है।
परिजन पिछले 10 महीनों से सासनी गेट थाने और पुलिस कंट्रोल रूम के चक्कर काट रहे हैं, जबकि इस दौरान पार्टी के दफ्तरों में उनकी नियुक्ति की फाइलें दौड़ रही थीं। भाजपा संगठन ने उन्हीं का नाम पार्षद की कुर्सी के लिए तय कर दिया। मामला सामने आने के बाद भाजपा के महानगर अध्यक्ष इंजीनियर राजीव शर्मा कहते हैं कि विपिन का नाम एक साल पहले हुई संगठनात्मक बैठक के दौरान प्रस्तावित किया गया था। नामों की घोषणा में काफी समय लग गया। अब पार्टी के आलाकमान को सूचित कर दिया गया है और सूची में संशोधन की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
विपिन चंचल वाल्मीकि की गुमशुदगी थाना सासनी गेट में दर्ज है। उनकी तलाश की जा रही है।
- मयंक पाठक, क्षेत्राधिकारी प्रथम
अजीत और अरुण को संघ के प्रति निष्ठा का मिला पुरस्कार
नगर निगम के नामित पार्षदों की सूची में दो नाम ऐसे भी हैं जिनकी पृष्ठभूमि बेहद साधारण और आर्थिक रूप से सीमित है। इनमें एक हैं 50 वर्षीय अजीत चौधरी हैं जो रामबाग कॉलोनी में रहते हैं। अजीत दीनदयाल संयुक्त अस्पताल के बाहर चाय की दुकान चलाते हैं। आरएसएस के बेहद करीबी हैं। इसी तरह 30 वर्षीय अरुण कुमार शर्मा हैं जो ज्वालापुरी में रहते हैं और बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं। अरुण अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से भी जुड़े रहे हैं।
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नगर निगम के नामित पार्षदों की सूची में एक नाम विपिन चंचल वाल्मीकि का है। विपिन भाजपा अनुसूचित जाति एवं जनजाति मोर्चा के पदाधिकारी रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि विपिन 21 मई 2025 से ही लापता हैं। उनकी मां ने सासनी गेट थाने में उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट (रपट नंबर 35-25) भी दर्ज करा रखी है। गुमशुदगी के बाद पुलिस और परिजनों ने शहर की दीवारों पर हुलिए और मोबाइल नंबर वाले पर्चे चस्पा किए। इसमें विपिन के पहने हुए कपड़ों और हुलिए आदि का जिक्र किया गया था। 10 महीने बाद भी विपिन की कोई सूचना नहीं मिली है।
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परिजन पिछले 10 महीनों से सासनी गेट थाने और पुलिस कंट्रोल रूम के चक्कर काट रहे हैं, जबकि इस दौरान पार्टी के दफ्तरों में उनकी नियुक्ति की फाइलें दौड़ रही थीं। भाजपा संगठन ने उन्हीं का नाम पार्षद की कुर्सी के लिए तय कर दिया। मामला सामने आने के बाद भाजपा के महानगर अध्यक्ष इंजीनियर राजीव शर्मा कहते हैं कि विपिन का नाम एक साल पहले हुई संगठनात्मक बैठक के दौरान प्रस्तावित किया गया था। नामों की घोषणा में काफी समय लग गया। अब पार्टी के आलाकमान को सूचित कर दिया गया है और सूची में संशोधन की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
विपिन चंचल वाल्मीकि की गुमशुदगी थाना सासनी गेट में दर्ज है। उनकी तलाश की जा रही है।
- मयंक पाठक, क्षेत्राधिकारी प्रथम
अजीत और अरुण को संघ के प्रति निष्ठा का मिला पुरस्कार
नगर निगम के नामित पार्षदों की सूची में दो नाम ऐसे भी हैं जिनकी पृष्ठभूमि बेहद साधारण और आर्थिक रूप से सीमित है। इनमें एक हैं 50 वर्षीय अजीत चौधरी हैं जो रामबाग कॉलोनी में रहते हैं। अजीत दीनदयाल संयुक्त अस्पताल के बाहर चाय की दुकान चलाते हैं। आरएसएस के बेहद करीबी हैं। इसी तरह 30 वर्षीय अरुण कुमार शर्मा हैं जो ज्वालापुरी में रहते हैं और बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं। अरुण अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से भी जुड़े रहे हैं।