एक मरीज-एक तीमारदार: मेडिकल कॉलेज में इमरजेंसी के तरह वार्ड के लिए बनेगा पास, तीमारदारों की भीड़ पर लगेगी रोक
एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज में तीमारदार और स्टाफ के बीच मारपीट होने के बाद डॉक्टरों ने काम रोक दिया था। अब मेडिकल में नई व्यवस्था की जा रही है। इमरजेंसी के बाद अब अस्पताल के विभिन्न वार्डों में भी तीमारदारों का प्रवेश केवल पास के माध्यम से ही संभव होगा।
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अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने मरीजों की बेहतर देखभाल और वार्डों की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए एक अहम निर्णय लिया है। इमरजेंसी के बाद अब अस्पताल के विभिन्न वार्डों में भी तीमारदारों का प्रवेश केवल पास के माध्यम से ही संभव होगा।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, वार्डों में होने वाली अत्यधिक भीड़ न केवल सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित करती है, बल्कि मरीजों में संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ा देती है। नए नियमों के तहत तय किया गया है कि मरीज जब वार्ड में शिफ्ट होंगे, तो उन्हें स्वच्छता के कड़े उपायों का पालन करना होगा, ताकि वे बाहरी संक्रमण से सुरक्षित रहें। चिकित्सकों का मानना है कि अक्सर तीमारदार भावनात्मक कारणों से मरीज के पास रुकना चाहते हैं, लेकिन यह चिकित्सकीय प्रक्रिया और नर्सिंग केयर में बाधा उत्पन्न करता है।
इलाज के दौरान भावनाएं अपनी जगह हैं और चिकित्सा प्रक्रिया अपनी जगह। सुचारू उपचार के लिए तीमारदारों का हस्तक्षेप न्यूनतम रहना आवश्यक है। - प्रो. अंजुम परवेज, प्रिंसिपल, जेएन मेडिकल कॉलेज
नर्सिंग की जरूरत पर मिलेगी छूट
हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिन मरीजों की स्थिति गंभीर है या जिन्हें व्यक्तिगत नर्सिंग की अधिक आवश्यकता है, उनके साथ एक तीमारदार को रहने की अनुमति दी जाएगी। इसके लिए भी विशेष पास जारी किए जाएंगे, जिससे वार्ड में उपस्थित लोगों की संख्या नियंत्रित और व्यवस्थित रह सके।