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UP: एएमयू से निकला ‘किलिंग मशीन गैंग’, कई राज्यों के लिए बना सिरदर्द; जुबैर ने ऐसे रखा जरायम की दुनिया में कदम

अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: Sharukh Khan Updated Thu, 14 May 2026 02:50 PM IST
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सार

अलीगढ़ में एएमयू से निकला 'किलिंग मशीन गैंग' कई राज्यों के लिए सिरदर्द बन गया। 2022 में मुनीर के मारे जाने के बाद जुबैर ही गैंग की कमान संभाल रहा था। मुनीर संग मिलकर जुबैर व उसके भाइयों ने छात्र गुटों के झगड़ों से जरायम की दुनिया में कदम रखा।

Shooter Zubair Encounter in Meerut Killing Machine Gang Emerges from AMU Becomes a Headache for Several States
जुबैर की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

एक लाख का इनामी शूटर जुबैर मेरठ में पुलिस मुठभेड़ में ढेर हो गया। जुबैर पश्चिमी यूपी के कुख्यात अपराधी मुनीर मेहताब के द किलिंग मशीन ए गैंग का अहम सदस्य था। एएमयू में पढ़ने आए बिजनौर के मुनीर ने छात्र गुटों के विवादों में शामिल साथियों के साथ मिलकर इस गैंग की नींव रखी थी। 
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धीरे-धीरे यह गैंग न सिर्फ अलीगढ़, बल्कि पश्चिमी यूपी और दिल्ली तक सक्रिय होकर पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया। साल 2022 में मुनीर के मारे जाने के बाद गैंग की कमान जुबैर ने संभाल ली थी। उसकी मौत को पुलिस इस गैंग के खात्मे की दिशा में बड़ी सफलता मान रही है।
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ऐसे शुरू हुआ गैंग 
मुनीर जब 12वीं में दाखिले के लिए अलीगढ़ आया, तो उसकी मुलाकात बरला के अपराधी भाइयों यासिर, फहद और सद्दाम से हुई। इसी दौरान उसकी दोस्ती एएमयू के लॉ टॉपर छात्र आशुतोष मिश्रा से हुई। 

 

शुरुआती झगड़े इसी दोस्ती के कारण शुरू हुए, जो धीरे-धीरे संगठित अपराध में बदल गए। गैंग में नौशा बरला के यासिर, फहद, सद्दाम और जुबैर जैसे सदस्य शामिल रहे, जिन्होंने मुनीर के साथ कई वारदात को अंजाम दिया।

 

मुनीर की गिरफ्तारी के बाद अलीगढ़ में गैंग की कमान जुबैर ने संभाली। 2018 में शाहबेज हत्याकांड के बाद वह दिल्ली भाग गया। 2019 में लूट के मामले में पत्नी के साथ गिरफ्तार हुआ और जेल चला गया। 2025 में जेल से छूटने के बाद उसने फिर गैंग को सक्रिय किया। इसी दौरान दिसंबर में एएमयू के शिक्षक दानिश राव की हत्या की साजिश में उसका नाम सामने आया, जिसके बाद पुलिस ने तीनों भाइयों पर इनाम घोषित किया गया था।

पहले बड़े भाई छूटे, फिर जुबैर को कराया रिहा
अलीगढ़ में लगातार अपराधों के चलते पुलिस दबाव बढ़ा तो गैंग के सदस्य दिल्ली के ओखला इलाके में जाकर रहने लगे। मुनीर समेत कई सदस्य जेल गए। यासिर और फहद दो साल पहले दिल्ली जेल से छूटे और इसके बाद उन्होंने अपने छोटे भाई जुबैर की रिहाई की कोशिश शुरू की। जुबैर के बाहर आते ही गैंग फिर सक्रिय हुआ और दानिश राव हत्याकांड को अंजाम दिया गया।
 

द किलिंग मशीन ए गैंग का इतिहास
गैंग का सरगना मुनीर मेहताब पश्चिमी यूपी के अपराध जगत का बड़ा नाम था। 2009 में बिजनौर के सहसपुर से एएमयू में दाखिला लेने आया मुनीर पढ़ाई छोड़ अपराध की राह पर चल पड़ा। मेरठ में मारे गए जुबैर के भाइयों यासिर और फहद से दोस्ती के बाद उसने हथियार खरीदे और सोशल मीडिया पर ‘द किलिंग मशीन ए गैंग’ के नाम से गिरोह बनाकर अपराध शुरू किए। एनआईए के डीएसपी तंजील अहमद और उनकी पत्नी की हत्या के बाद यह गैंग सुर्खियों में आया।

पिस्टल के लिए इन्होंने रेलवे मजिस्ट्रेट का गनर मार डाला
मुनीर ने अपने साथी सऊद के साथ मिलकर पान दरीबा में जीआरपी के सिपाही, जो रेलवे मजिस्ट्रेट का गनर था, उसकी हत्या कर 9 एमएम की सरकारी पिस्टल लूटी थी। यह पिस्टल आज तक बरामद नहीं हो पाई है। 

 

पूछताछ में मुनीर ने बताया था कि उसने यह हथियार सद्दाम को दे दिया था। बाद में इसी पिस्टल के विवाद में मुनीर और जुबैर ने मिलकर सद्दाम की हत्या कर दी। इस मामले में फरार 50 हजार का इनामी सऊद अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर है। पुलिस को इनपुट मिला था कि वह दुबई भाग गया है। 
 

बिजनौर में आईएस-32/21 पर दर्ज पंजीकृत मुनीर गैंग और उसके सदस्य
बिजनौर का मुनीर मेहताब अब जीवित नहीं है। बिजनौर से ही हिस्ट्रीशीटर रैय्यान निवासी सहसपुर और जैनी इस गैंग में सक्रिय रहे। इनके साथ तंजीम अहमद एएमयू में सक्रिय रहा। इसके अलावा एएमयू में सक्रिय रहने वाले इस गैंग सदस्यों में बिहार निवासी अतीउल्लाह, आजमगढ़ निवासी तारिक आजमी, कासिमगंज निवासी शेख सादाब, कन्नौज निवासी फराज उर्फ अकबर, देवरिया निवासी मो. कासिफ लारी, फैजाबाद निवासी आशुतोष मिश्रा, आजमगढ़ से ही रिहान आजमी, अंबेडकर नगर निवासी सऊद अहमद सिद्दीकी और अदनान उर्फ शकील उर्फ शेख गैंग में शामिल हैं। इनके अलावा अलीगढ़ से वरुण गौड़, गांव बरला निवासी यासिर भी है। यासिर जुबैर का बड़ा भाई है। यासिर के भाई सद्दाम की हत्या भीमुनीर ने ही की थी, जबकि फहद और जुबैर भी गैंग के सक्रिय सदस्य रहे।
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