पुलिस पर हमला: दहशत में खाली हुआ गांव, घरों में लगे मिले ताले, सुनसाल गलियों में सहमे दिखे बच्चे
नौगवां अर्जुनपुर में पुलिस टीम पर हमला हुआ। पुलिस ने मुख्य आरोपी मेहंदी हसन, तीन महिलाओं और एक युवती सहित गिरफ्तार कर 18 आरोपियों को जेल भेज दिया। गांव में अब सन्नाटा पसरा हुआ है।
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26 अप्रैल को पुलिस पर हमले की घटना के बाद अलीगढ़ के गांव नौगवां अर्जुनपुर में रातभर पुलिस की दबिश और कार्रवाई चलती रही। सोमवार को गांव में पुलिस और पीएसी तैनात रही। गांव से अधिकांश पुरुष भागे हुए हैं। हमलावरों के मकान खाली पड़े हैं। अधिकांश घरों में महिलाएं और बच्चे नजर आए। हर दस्तक पर वह भी सहम जाते हैं।
थाना रोरावर क्षेत्र के गांव नौगवां अर्जुनपुर में सोमवार को तनावपूर्ण शांति छाई रही। 5000 हजार की आबादी वाले गांव में भय के कारण लोग घरों से बाहर निकलने से कतरा रहे हैं। गलियों में सन्नाटा पसरा है और अधिकांश घरों के दरवाजे बंद ही मिले। खटखटाने पर भी कोई बाहर नहीं निकला। कुछ घरों के दरवाजे जो खुले थे, उनकी ओर कदम बढ़ाए तो महिलाओं ने दरवाजे बंद कर लिए। गांव के चौक पर कुछ बच्चे खेलते नजर आए, जबकि कुछ घरों की छतों से महिलाएं सहमी हुई दिखीं। एक वृद्धा मिलीं जब उनसे पूछा कि कल क्या हुआ था तो उन्होंने कहा कि वह तो काम पर चली गई थीं। बाद में पता चला झगड़ा हो गया था। पास में खले रहे कुछ बच्चों से पूछा तो बोले लडाई हो गई थी।
महिलाओं सहित गिरफ्तार 18 आरोपियों को जेल भेजा।
पुलिस ने मुख्य आरोपी मेहंदी हसन, तीन महिलाओं और एक युवती सहित गिरफ्तार किए गए 18 आरोपियों को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। इस मामले में 38 नामजद सहित 150-200 लोगों पर रिपोर्ट दर्ज की गई है। घटना में उपनिरीक्षक महेश चंद्र सहित तीन पुलिसकर्मी घायल हुए थे। उग्र भीड़ ने दरोगा की सरकारी पिस्टल छीन ली थी। वायरलेस हैंडसेट और मोबाइल भी लूट लिए थे। पुलिस ने बाद में तलाशी अभियान चलाकर पिस्टल और अन्य सामान बरामद कर लिया था।
खाली पड़ा था मुख्य आरोपी का घर
मुख्य आरोपी मेंहदी हसन के घर के मुख्य गेट पर ताला तक नहीं था। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि घर के सदस्य जल्दबाजी में सब कुछ छोड़कर भाग गए। घर के भीतर एक स्कूटी खड़ी थी और आंगन में सूखने के लिए गेहूं बिखरे हुए थे, लेकिन घर में कोई इंसान मौजूद नहीं था।
खेती जमीन पर शुरू हुआ था कब्जे का विवाद
ग्रामीण भूरे खां ने बताया कि जमीन पहले मेंहदी हसन के परिवार के पास थी, जिसे अब किसी और ने खरीद लिया है। पुलिस पहले भी सूचना देने आई थी कि दोनों पक्ष आपस में समझौता कर लें। रविवार को पुलिस मेंहदी हसन को रंगदारी और जमीन पर अवैध कब्जे के आरोप में गिरफ्तार करने पहुंची थी, तभी परिजनों और समर्थकों ने विरोध शुरू कर दिया जो बाद में हिंसक हमले में बदल गया। गांव में ही प्रोविजन स्टोर चलाने वाले शफी कहते हैं कि पहले चार पांच पुलिस वाले आए थे। पुलिस ने मेंहदी को गिरफ्तार किया और परिवार वालों ने विरोध किया था। इसी में हाथापाई शुरू हो गई।
कानून हाथ में लेने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस ने तीन महिलाओं और एक युवती समेत कुल 18 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। अन्य नामजद आरोपियों की धरपकड़ के लिए पुलिस की कई टीमें गठित की गई हैं।-आदित्य बंसल, एसपी सिटी

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