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UP: 'सिर्फ पेशे के नाम से बुला देना ही एससी/एसटी एक्ट के तहत अपराध नहीं माना जा सकता', कोर्ट ने की ये टिप्प्णी

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: Sharukh Khan Updated Tue, 03 Mar 2026 03:13 PM IST
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सार

हाईकोर्ट ने टिप्प्णी करते हुए कहा कि सिर्फ पेशे के नाम से बुला देना ही एससी/एसटी एक्ट के तहत अपराध नहीं माना जा सकता। प्रमाणित करना होगा कि आरोपी की नीयत जाति के आधार पर अपमानित करने या नीचा दिखाने की थी।

Allahabad High Court: Calling Someone by Profession Alone Not an Offence Under SC ST Act
Allahabad High Court - फोटो : एएनआई
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विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सिर्फ पेशे (काम) के नाम से बुला देना ही एससी/एसटी एक्ट के तहत अपराध नहीं माना जा सकता है। यह प्रमाणित करना होगा कि आरोपी की नीयत जाति के आधार पर अपमानित करने या नीचा दिखाने की थी। 
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इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति अनिल कुमार-दशम की एकल पीठ ने गौतमबुद्ध नगर के विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) के समन आदेश को चुनौती देने वाली युवक की आपराधिक अपील आंशिक रूप से स्वीकार कर ली।
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जेवर थाने में युवक के खिलाफ मारपीट, आपराधिक धमकी और एससी/एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। मामला विशेष न्यायाधीश के पास जाने पर आरोपी के खिलाफ समन आदेश जारी किया गया था। पीड़िता का आरोप था कि वह उसके घर कपड़े धाने का काम करती थी। 

 

बकाया मजदूरी मांगी तो आरोपी ने रास्ते में रोककर परेशान किया और गाली दी। साथ ही जातिसूचक शब्द कहे। इस पर याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि दोनों पक्षों के बीच मजदूरी का संबंध था। शिकायत में सिर्फ यह कहा गया था कि जातिसूचक शब्द बोले गए। यह आरोप मनगढ़ंत और बनावटी हैं। रोड पर विवाद की बात भी गलत है, घर पर ही रुपये को लेकर बातचीत हुई थी।

याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि ट्रायल कोर्ट ने पुलिस की अंतिम रिपोर्ट स्वीकार या खारिज किए बिना नाराजगी याचिका (प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र) शिकायत में बदल दी, जो गलत है। 

 

कोर्ट ने कहा कि अदालत प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र को शिकायत में बदल देती है तो इसका अर्थ है कि उसने पुलिस की अंतिम रिपोर्ट स्वीकार नहीं की। कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट के तहत जारी समन आदेश और उससे जुड़ी कार्यवाही रद्द कर दी। कहा कि अन्य आपराधिक मुकदमों के तहत चल रही कार्यवाही कानून के अनुसार जारी रहेगी।
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