सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Allahabad High Court Power Department Liable for Electric Shock Injuries Under Strict Liability Principle

UP: 'बिजली की लाइन से किसी को चोट पहुंचती है तो विभाग जिम्मेदार', करंट लगने से हाथ गंवाने वाले मजदूर को राहत

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: Sharukh Khan Updated Tue, 07 Apr 2026 03:30 PM IST
विज्ञापन
सार

हाईकोर्ट से करंट लगने से हाथ गंवाने वाले मजदूर को राहत मिली है। कोर्ट ने कहा कि बिजली की लाइन से किसी को चोट पहुंचती है तो इसके लिए विभाग जिम्मेदार है। कोर्ट ने कहा कि पीड़ित को केवल बिजली के झटके से चोट की बात साबित करनी होती है

Allahabad High Court Power Department Liable for Electric Shock Injuries Under Strict Liability Principle
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि करंट से किसी को चोट पहुंचती है तो बिजली विभाग जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। कहा कि इस मामले में कठोर दायित्व का सिद्धांत लागू होता है। इसके अनुसार पीड़ित को केवल यह साबित करना होता है कि उसे बिजली के झटके से चोट आई है। 
Trending Videos


इसकी जरूरत नहीं कि तारों का ठीक से रखरखाव न होने या कर्मचारियों की लापरवाही से हादसा हुआ। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति संदीप जैन की पीठ ने करंट से हाथ गंवाने वाले मजदूर को मुआवजा देने के आदेश के खिलाफ उप्र राज्य पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड की ओर से दायर विशेष अपील पर दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


पीलीभीत निवासी याची मोहम्मद निसार उर्फ बड़े लल्ला श्रमिक थे। जनवरी 2007 में पूरनपुर कस्बे में अपने घर के बाहर खड़े थे। अचानक ऊपर से गुजर एचटी लाइन का तार टूटकर उन पर गिर गया। हादसे में वह गंभीर रूप से झुलस गए। 

वहीं, संक्रमण फैलने से जान बचाने के लिए उनका बायां हाथ काटना पड़ा। इसके अलावा गले और शरीर के अन्य हिस्सों पर भी गहरे घाव हुए। ट्रायल कोर्ट में मुआवजे की मांग कर आवेदन किया। इस पर ट्रायल कोर्ट ने 3,87,500 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। इस फैसले के खिलाफ उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद ने हाईकोर्ट में विशेष अपील दायर की।

 

हाथ कटने से श्रमिक की कमाने की क्षमता हो गई खत्म
बिजली विभाग के अधिवक्ता ने दलील दी कि हादसा विभाग की लापरवाही से नहीं हुआ। लाइन टूटने पर बिजली की आपूर्ति स्वतः बंद हो जाती है। करंट लगने का कोई सवाल ही नहीं है। हालांकि, विभाग ने दलीलों के समर्थन में कोई पुख्ता दस्तावेज पेश नहीं किए। 

 

कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पाया कि पीड़ित राजमिस्त्री था। हाथ कटने के बाद उसकी कमाने की क्षमता पूरी तरह खत्म हो गई। ट्रायल कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि मुआवजा वास्तव में कम था, लेकिन पीड़ित ने उसे बढ़ाने के लिए कोई अपील नहीं की थी। इसलिए हाईकोर्ट ने केवल मौजूदा मुआवजे की पुष्टि की और विभाग को मुकदमे का खर्च सहित भुगतान करने का आदेश दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed