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High Court : गिरफ्तारी और रिमांड आदेश अवैध, हाईकोर्ट ने रिहा करने का दिया आदेश
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 01 May 2026 04:40 PM IST
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सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जितेंद्र सिंह निरंजन की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए उनकी गिरफ्तारी और मजिस्ट्रेट की ओर से पारित रिमांड आदेश को अवैध घोषित कर दिया है।
कोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जितेंद्र सिंह निरंजन की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए उनकी गिरफ्तारी और मजिस्ट्रेट की ओर से पारित रिमांड आदेश को अवैध घोषित कर दिया है। साथी ही याचिकाकर्ता को तत्काल हिरासत से रिहा करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने दिया है।
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अदालत ने पाया कि 1 फरवरी 2025 को तैयार किए गए गिरफ्तारी मेमो और रिमांड आदेश में गिरफ्तारी के ठोस आधारों का उल्लेख नहीं किया गया था। याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि सर्वोच्च न्यायालय के हालिया फैसलों के अनुसार गिरफ्तारी के कारणों को लिखित रूप में बताना अनिवार्य है और इसका पालन न करना गिरफ्तारी को गैरकानूनी बनाता है। इसके अतिरिक्त, हाईकोर्ट ने इस बात पर भी कड़ी आपत्ति जताई कि मजिस्ट्रेट की ओर से रिमांड आदेश एक छपे हुए प्रोफार्मा पर यांत्रिक रूप से पारित किया गया था, जिसे पूर्व के न्यायिक निर्णयों में भी अनुचित ठहराया जा चुका है।
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न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जब रिमांड आदेश पूरी तरह से अवैध या बिना सोचे-समझे पारित किया गया हो, तो बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका सुनवाई योग्य होती है। इसी आधार पर अदालत ने गिरफ्तारी मेमो और रिमांड आदेश को रद्द करते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, ललितपुर को आदेश दिया कि वे याचिकाकर्ता को तुरंत रिहा करें। साथ ही, रिमांड मजिस्ट्रेट को भविष्य में ऐसे आदेश पारित करते समय अधिक सतर्क रहने की चेतावनी दी गई है। हालांकि, अदालत ने यह भी साफ किया है कि संबंधित विभाग कानून के दायरे में रहकर याचिकाकर्ता के खिलाफ नए सिरे से कार्यवाही करने के लिए स्वतंत्र है।
