Census In Prayagraj : मकान ढूंढ़ने में जगगणना कर्मियों का फूल जाएगा दम
जनगणना के तहत 22 मई से मकानों का सूचीकरण व गणना की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। पुराने शहर में कहीं भी मकान नंबर क्रमवार नहीं हैं। ऐसे में मकानों को ढूढ़ने में जगनणना कर्मियों का दम फूल जाएगा।
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जनगणना के तहत 22 मई से मकानों का सूचीकरण व गणना की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। पुराने शहर में कहीं भी मकान नंबर क्रमवार नहीं हैं। ऐसे में मकानों को ढूढ़ने में जगनणना कर्मियों का दम फूल जाएगा। प्रत्येक प्रगणक को 100 से 120 मकानों का सूचीकरण करना है।
मकानों के सूचीकरण व गणना के लिए 14 हजार से अधिक कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई है और इनमें तकरीबन 80 फीसदी प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षक हैं। वैसे तो प्रयास यही किया गया है कि जनगणना कार्मिक की ड्यूटी उसी क्षेत्र में लगाई जाए जहां उसकी तैनाती है लेकिन नगर क्षेत्र में प्राथमिक विद्यालयों की संख्या कम है, सो ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात शिक्षकों की ड्यूटी नगर क्षेत्र में लगा दी गई है।
नगर क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या यह है कि यहां कई मोहल्लों में मकान नंबर क्रमवार नहीं हैं। अल्लापुर, सोहबतियाग, तुलारामबाग, कीडगंज, मुट्ठीगंज, साउथ मलाका समेत कई मोहल्लों में यह समस्या है। वहां कई ऐसे उदाहरण देखने को मिल जाएंगे कि मकान नंबर 10 में रहने वाले को पता नहीं होता कि मकान नंबर 11 कहां हैं। ऐसे में प्रणगक का तो मकान ढूंढ़ने में दम ही फूल जाएगा।
सात मई से शुरू होगी स्वगणना, होगी सहूलियत
मकानों के सूचीकरण व गणना से पहले सात मई से 21 मई तक ऑनलाइन स्वगणना होगी। इसके तहत लोग खुद सवालों के जवाब देकर स्वगणना कर सकेंगे। इसमें वही सवाल होंगे, जो प्रगणक मकानों की गणना के दौरान पूछेगा। स्वगणना करने वाले को ओटीपी नंबर मिलेगा और जब प्रगणक गणना के लिए घर पहुंचेगा तो ओटीपी नंबर से ऑनलाइन दिए गए जवाबों का सत्यापन करेगा। इससे आम लोगों व प्रगणक को सहूलियत होगी और समय की बचत होगी, साथ ही मकानों की गणना समय से पूरी होगी। स्वगणना करने वालों को प्रगणक के घर आने पर पूर्व में भरी गई एंट्री में संशोधन कराने का मौका भी मिलेगा।
इंटरनेट व गैस कनेक्शन की भी देनी होगी जानकारी
मकानों की गणना के दौरान घर के मुखिया से 33 तरह के सवाल पूछे जाएंगे। घर की फर्श और छत कैसी है, जैसे सवालों से लेकर यह भी पूछा जाएगा कि घर में इंटरनेट कनेक्शन है या नहीं, रसोई गैस का कनेक्शन कौन सा है, टीवी है या नहीं, बेसिक फोन इस्तेमाल करते हैं या नहीं। इस तरह के कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे।
‘मकानों के सूचीकरण और गणना में मकान नंबर की क्रम संख्या आड़े नहीं आएगी। प्रत्येक प्रगणक को एक निश्चित दूरी तक 100 से 120 मकानों की गणना की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, जो उन्हें एक माह में पूरी करनी है।’ - विनीता सिंह, जिला जनगणना अधिकारी
