High Court : दो न्यायमूर्तियों के मुख्य न्यायाधीश बनने पर जताई खुशी, कहा- न्याय पालिका को मिलेगी नई दिशा
इलाहाबाद हाईकोर्ट से न्यायमूर्तियों के मुख्य न्यायाधीश बनने पर अधिवक्ताओं में खुशी का माहौल है। उन्होंने इसे गौरव का पल बताया और शुभकामनाएं दीं।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट से न्यायमूर्तियों के मुख्य न्यायाधीश बनने पर अधिवक्ताओं में खुशी का माहौल है। उन्होंने इसे गौरव का पल बताया और शुभकामनाएं दीं। इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश पांडेय ‘बबुआ’ ने कहा कि न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी के मुख्य न्यायाधीश बनने जा रहे हैं, यह गौरव का क्षण है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की न्यायिक परंपरा और यहां की प्रतिभा का देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में लगातार सम्मान हुआ है।
इनमें छत्तीसगढ़ में न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा, गुजरात में न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल, दिल्ली में न्यायमूर्ति डीके उपाध्याय और उत्तराखंड में न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता का नाम प्रमुख है। उन्होंने कहा कि दो न्यायमूर्ति सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश भी बने हैं। इनमें न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा शामिल हैं। वहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता आरके ओझा ने कहा कि दोनों न्यायमूर्तियों ने यहीं से वकालत शुरू की और इसी हाईकोर्ट में न्यायाधीश बने। कहा कि उनके नेतृत्व में न्यायपालिका को नई दिशा और मजबूती मिलेगी।
अदालत में न्यायमूर्तियों का सफर
न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी
न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी ने वर्ष 1990 में लखनऊ विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने 11 जनवरी 1992 को अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराया। उनका प्रमुख कार्यक्षेत्र दीवानी मामलों से जुड़ा रहा। अक्तूबर 2007 से वह उत्तर प्रदेश राज्य के अतिरिक्त मुख्य स्थायी अधिवक्ता के रूप में भी कार्यरत रहे।
न्यायमूर्ति त्रिपाठी को 27 सितंबर 2013 को इलाहाबाद हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। इसके बाद 10 अप्रैल 2015 को स्थायी न्यायाधीश बने। 20 जून 2028 को वह सेवानिवृत्त होंगे। वर्तमान में वह इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश हैं और प्रयागराज स्थित प्रधान पीठ की अध्यक्षता भी कर चुके हैं।
न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा
न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा का इलाहाबाद हाईकोर्ट से 20 जुलाई 2025 को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय स्थानांतरण किया गया था। वर्तमान में वहीं कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश हैं। उन्होंने किरोड़ीमल कॉलेज से अर्थशास्त्र में बीए (ऑनर्स) की डिग्री हासिल की और दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर से एलएलबी की पढ़ाई पूरी की।
उन्होंने आठ मई 1993 को अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराया। मुख्य रूप से दीवानी, सांविधानिक और सेवा संबंधी मामलों में पैरवी की। कई अहम मामलों में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं। तीन फरवरी 2014 को उन्हें इलाहाबाद उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया। एक फरवरी 2016 को उन्हें स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति मिली।