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High Court : भरण-पोषण न देने पर जेल जाने से खत्म नहीं होती देनदारी, कोर्ट ने वसूली का दिया आदेश

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 25 Mar 2026 03:53 PM IST
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सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी या बच्चों को भरण-पोषण न देने पर किसी व्यक्ति को जेल भेजे जाने से उसकी आगे की मासिक देनदारी या बकाया भुगतान की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती।

High Court: Failure to provide maintenance does not end the liability by going to jail
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी या बच्चों को भरण-पोषण न देने पर किसी व्यक्ति को जेल भेजे जाने से उसकी आगे की मासिक देनदारी या बकाया भुगतान की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि की एकल पीठ ने हसीना खातून की याचिका पर सुनवाई करते हुए की।

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2019 में मुरादाबाद जिला अदालत के मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पति को पत्नी और दिव्यांग बेटे को चार-चार हजार रुपये प्रतिमाह अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश दिया था। पति ने भुगतान नहीं किया, जिससे 2,64,000 रुपये बकाया हो गए। इस पर पत्नी ने वसूली अर्जी दी, जिसके बाद पति को गिरफ्तार कर 30 दिन के लिए जेल भेज दिया गया।
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जेल से रिहा होने के बाद भी भुगतान न करने पर पत्नी ने फिर से वसूली के लिए आवेदन किया। लेकिन, ट्रायल कोर्ट ने यह कहते हुए अर्जी खारिज कर दी कि पति पहले ही 30 दिन की सजा काट चुका है। इसलिए अब वसूली नहीं की जा सकती। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द करते हुए बकाया राशि की वसूली का नया आदेश पारित करने के निर्देश दिए। साथ ही बकाया रकम पर छह प्रतिशत साधारण ब्याज देने को भी कहा। 

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