High Court News : स्वेच्छा से समझौता तो रद्द किया जा सकता है एससी-एसटी का मुकदमा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जब मामला मूलरूप से निजी विवाद का हो, अपराध जाति के आधार पर न किया गया हो और पक्षकारों के बीच समझौता स्वेच्छा से हो तो एससी/एसटी एक्ट की कार्यवाही रद्द की जा सकती है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जब मामला मूलरूप से निजी विवाद का हो, अपराध जाति के आधार पर न किया गया हो और पक्षकारों के बीच समझौता स्वेच्छा से हो तो एससी/एसटी एक्ट की कार्यवाही रद्द की जा सकती है। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति अनिल कुमार-दशम की एकल पीठ ने अखिलेश श्रीवास्तव की याचिका स्वीकार कर ली।
झांसी के सिपरी बाजार थाने में अखिलेश के खिलाफ धोखाधड़ी व चोट पहुंचाने समेत एससी/एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। 2016 में आरोपपत्र दाखिल हुआ और झांसी के एसीजेएम कोर्ट ने संज्ञान लिया। मामला विशेष न्यायालय (एससी/एसटी एक्ट) में विचाराधीन था। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने दलील दी कि दोनों पक्षों के बीच बिना किसी दबाव या प्रलोभन के समझौता हो चुका है। इसका सत्यापन झांसी के विशेष न्यायाधीश, एससी/एसटी एक्ट की ओर से 12 अगस्त 2025 को लिया गया था। रिपोर्ट भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की गई है।
इस पर कोर्ट ने कहा कि विवाद निजी प्रकृति का है और प्रथम दृष्टया यह नहीं दिखता कि कथित अपराध सूचक की जाति के कारण किया गया था। ऐसे में कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले रामावतार बनाम मध्य प्रदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि एससी/एसटी एक्ट के अंतर्गत दर्ज मामला मूलतः निजी या सिविल प्रकृति का हो और समझौता स्वतंत्र इच्छा से हो तो कार्यवाही समाप्त की जा सकती है। बशर्ते अधिनियम के उद्देश्य पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में विशेष सावधानी बरतना आवश्यक है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पीड़ित पक्ष ने किसी दबाव या भयवश समझौता नहीं किया है। कोर्ट ने गुलाम रसूल खान मामले का हवाला देते हुए कहा कि एससी/एसटी एक्ट के तहत दायर आपराधिक अपील में समझौते के आधार पर कार्यवाही समाप्त की जा सकती है। इसके लिए सीआरपीसी की धारा-482 का सहारा लेने की आवश्यकता नहीं है। कोर्ट ने पुलिस की ओर से दायर 21 जनवरी 2016 की चार्जशीट और एसीजेएम कोर्ट के 27 फरवरी 2016 के संज्ञान आदेश व विशेष सत्र परीक्षण की पूरी कार्यवाही को रद्द कर अपील को समझौते के अनुसार स्वीकार कर लिया है। ब्यूरो
