सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   If lawyers break the law, the dignity of the profession is compromised

High Court : अधिवक्ता कानून तोड़े तो गिरती है पेशे की गरिमा, कानपुर के वकील की जमानत अर्जी खारिज

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 12 Feb 2026 01:18 PM IST
विज्ञापन
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कोई अधिवक्ता कानून का उल्लंघन करता है तो वह विधि व्यवसाय की गरिमा को कम करता है। अधिवक्ता न्यायालय का अधिकारी होता है और न्याय प्रशासन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।

If lawyers break the law, the dignity of the profession is compromised
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कोई अधिवक्ता कानून का उल्लंघन करता है तो वह विधि व्यवसाय की गरिमा को कम करता है। अधिवक्ता न्यायालय का अधिकारी होता है और न्याय प्रशासन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। उसका पेशा उच्चतम नैतिकता, ईमानदारी और कानून के शासन के प्रति अटूट प्रतिबद्धता पर आधारित है। इसी टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति कृष्ण पहल की एकल पीठ ने धोखाधड़ी के आरोप में नामजद कानपुर नगर निवासी अधिवक्ता आशीष शुक्ला की जमानत अर्जी खारिज कर दी।

Trending Videos


कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री से प्रथम दृष्टया यह स्थापित होता है कि अपीलार्थी 12वीं की परीक्षा में असफल रहा था, जबकि उसने परीक्षा उत्तीर्ण होने का दावा किया। बोर्ड अधिकारियों की रिपोर्ट में भी उसके फेल होने का उल्लेख है। ऐसे में यह दलील कि केवल 12वीं का प्रमाणपत्र दीमक के कारण नष्ट हो गया, अविश्वसनीय प्रतीत होती है। खासकर तब जब अन्य शैक्षिक अभिलेख सुरक्षित हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


कोर्ट ने कहा कि अपीलार्थी ने अग्रिम जमानत दिए जाने के दौरान शर्तों का पालन नहीं किया, जो न्यायिक प्रक्रिया के प्रति उसकी अनदेखी को दर्शाता है। कानपुर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अरिदमन सिंह ने आरोप लगाया है कि आशीष शुक्ला ने जाली शैक्षिक दस्तावेज के आधार पर बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश में पंजीकरण कराया। इस संबंध में कानपुर नगर कोतवाली में केस दर्ज है।

आरोपी की ओर से दलील दी गई कि उसे साजिशन फंसाया गया है। इससे पहले सेशन जज, कानपुर नगर ने 15 नवंबर 2025 को उसकी अग्रिम जमानत निरस्त कर दी थी। इसी आदेश को उसने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसे खारिज कर दिया गया।हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि यह टिप्पणियां केवल जमानत आवेदन के निपटारे तक सीमित हैं। ट्रायल के दौरान मामले के गुण-दोष पर उनका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। साथ ही ट्रायल कोर्ट को लंबित मुकदमे का शीघ्र निस्तारण करने का निर्देश दिया। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed