{"_id":"69f47cee9266102eeb0b795c","slug":"high-court-not-disclosing-the-grounds-of-arrest-and-issuing-remand-order-on-printed-proforma-is-illegal-2026-05-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"High Court : गिरफ्तारी का आधार न बताना और प्रिंटेड प्रोफार्मा पर रिमांड आदेश जारी करना अवैध","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
High Court : गिरफ्तारी का आधार न बताना और प्रिंटेड प्रोफार्मा पर रिमांड आदेश जारी करना अवैध
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 01 May 2026 03:44 PM IST
विज्ञापन
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया है कि गिरफ्तारी के आधारों को लिखित रूप में न बताना और प्रिंटेड प्रोफार्मा पर रिमांड आदेश जारी करना अवैध है।
कोर्ट का आदेश।
- फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया है कि गिरफ्तारी के आधारों को लिखित रूप में न बताना और प्रिंटेड प्रोफार्मा पर रिमांड आदेश जारी करना अवैध है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने धोखाधड़ी व जालसाजी के आरोपी को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने जोगेंद्र की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया।
Trending Videos
कानपुर नगर के किदवई नगर थाने में याची के खिलाफ रुपये लेकर नामी विश्वविद्यालयों की फर्जी डिग्री लोगों को उपलब्ध कराने के आरोप में एफआईआर दर्ज है। आरोपी जेल में बंद है और उसने गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए रिहा किए जाने की मांग करते हुए याचिका दायर की है। याची अधिवक्ता उदय भान सिंह ने दलील दी कि 19 फरवरी 2026 को याची की गिरफ्तारी मेमो व उसी दिन का रिमांड आदेश अवैध है। इनमें गिरफ्तारी के आधार का उल्लेख नहीं किया गया है और रिमांड आदेश प्रिंटेड प्रोफार्मा में है।
विज्ञापन
विज्ञापन
कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद पाया कि पुलिस की ओर से तैयार किए गए गिरफ्तारी मेमो और मजिस्ट्रेट की ओर से जारी रिमांड आदेश में गिरफ्तारी के ठोस कारणों का उल्लेख नहीं किया गया था। साथ ही रिमांड आदेश एक छपे हुए प्रोफार्मा पर यांत्रिक तरीके से पारित किया गया था, जिसे कोर्ट ने पूरी तरह से अवैध माना।
अदालत ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के मिहिर राजेश शाह बनाम महाराष्ट्र राज्य और गौतम नवलखा बनाम एनआईए के मामलों में निर्धारित सिद्धांतों का हवाला देते हुए कहा कि यदि गिरफ्तारी की प्रक्रिया में कानूनी अनिवार्यताओं का पालन नहीं किया जाता है तो ऐसी हिरासत को शून्य माना जाएगा। इसके साथ ही कोर्ट ने याची को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है।
