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UP : हाईकोर्ट का अहम फैसला- पत्नी के शिक्षित होने मात्र से भरण-पोषण से वंचित नहीं किया जा सकता

Wed, 01 Jul 2026 10:30 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 01 Jul 2026 10:30 AM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी के शिक्षित होने मात्र से उसे भरण-पोषण से वंचित नहीं किया जा सकता। इस टिप्पणी संग कोर्ट ने मैनपुरी के परिवार न्यायालय की ओर से पत्नी को 20 हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण देने के आदेश को बरकरार रखा।

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High Court significant ruling – A wife cannot be denied maintenance merely because she is educated.
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी के शिक्षित होने मात्र से उसे भरण-पोषण से वंचित नहीं किया जा सकता। इस टिप्पणी संग कोर्ट ने मैनपुरी के परिवार न्यायालय की ओर से पत्नी को 20 हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण देने के आदेश को बरकरार रखा। साथ ही पति की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी।

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यह आदेश न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की एकल पीठ ने दिया है। याची आलोक ने परिवार न्यायालय के फैसल को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। तर्क दिया कि पत्नी उच्च शिक्षित है, ट्यूशन और कोचिंग से आय अर्जित करती है। उसकी मां पेंशन पाती हैं और उनके पास भी पर्याप्त संपत्ति है। इस पर पत्नी की ओर से कहा गया कि उसे दहेज की मांग के चलते ससुराल छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। पति एक योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट है। ऐसे में वह भरण-पोषण की हकदार है।

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हाईकोर्ट ने पाया कि पत्नी के पास अलग रहने का पर्याप्त कारण है। पत्नी की आय के संबंध में अदालत ने कहा कि केवल यह कहना पर्याप्त नहीं है कि वह शिक्षित है या ट्यूशन पढ़ाती है। इसके समर्थन में विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए। यदि पत्नी अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पर्याप्त आय अर्जित नहीं कर रही है तो उसे भरण-पोषण से वंचित नहीं किया जा सकता। इन सभी तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने परिवार न्यायालय के अगस्त 2024 के आदेश को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी। 

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