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Prayagraj : तदर्थ सेवा की अनदेखी पर हाईकोर्ट सख्त, सचिव उच्च शिक्षा का आदेश रद्द

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 23 Jan 2026 04:32 PM IST
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सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राजकीय डिग्री कॉलेजों में तदर्थ नियुक्ति के बाद नियमित हुए असिस्टेंट प्रोफेसरों की वरिष्ठता को लेकर कड़ा रुख अपनाया है।

High Court strict on ignoring ad hoc service, order of Secretary Higher Education cancelled
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राजकीय डिग्री कॉलेजों में तदर्थ नियुक्ति के बाद नियमित हुए असिस्टेंट प्रोफेसरों की वरिष्ठता को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने तदर्थ सेवा को वरिष्ठता निर्धारण में शामिल करने से इन्कार करने संबंधी सचिव, उच्च शिक्षा विभाग के आदेश को रद्द कर मामले पर पुनर्विचार का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने डॉ.वीर पाल सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।

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कोर्ट ने कहा कि लखनऊ के उच्च शिक्षा सचिव को सुप्रीम कोर्ट के चंद्र प्रकाश प्रकरण में दिए गए फैसले के आलोक में याची के मामले पर नया निर्णय लेना होगा। यदि विधि के अनुसार सही ढंग से विचार नहीं किया गया और याची को दोबारा हाईकोर्ट आना पड़ा तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त आदेश पारित किए जाएंगे।
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याची की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि तदर्थ नियुक्ति के बाद याची के नियमितीकरण के लिए चार बार संस्तुति भेजी गई थीं। अंततः तीन फरवरी को नियुक्ति की मूल तिथि से नियमितीकरण कर दिया गया। इसके बाद तदर्थ सेवा की पूरी अवधि को वेतन वृद्धि, पेंशन सहित सभी सेवा लाभों के लिए स्वीकार किया गया, लेकिन वरिष्ठता निर्धारण में उसे शामिल नहीं किया गया। 

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