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Prayagraj News: यूपी की खुली जेलों की बदहाल व्यवस्था पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा विस्तृत जवाब
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश की खुली जेलों (ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशंस) की बदहाल स्थिति पर कड़ी नाराजगी जताते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। कहा है कि सरकार की ओर से दाखिल अनुपालन हलफनामा अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरता। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के 26 फरवरी 2026 के आदेश (सुहास चकमा बनाम भारत संघ) के अनुपालन में कायम जनहित याचिका पर की।
कोर्ट ने पाया कि प्रदेश में वर्तमान में केवल लखनऊ स्थित मॉडल जेल के रूप में एक ही खुली जेल संचालित है। उसकी क्षमता 800 कैदियों की है, जबकि उसमें केवल 316 कैदी ही रखे गए हैं। राज्य सरकार यह भी स्पष्ट नहीं कर सकी कि इन कैदियों के चयन का आधार क्या था और शेष 484 सीटें कब तक भरी जाएंगी।
कोर्ट ने महिला कैदियों को केवल जेंडर के आधार पर खुली जेल की सुविधा से वंचित रखने पर भी कड़ी आपत्ति जताई। सरकार को अपनी नीति में आवश्यक संशोधन करने का निर्देश दिया।
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खंडपीठ ने महाराष्ट्र, राजस्थान और केरल की खुली जेल व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां कैदियों को परिवार के साथ रहने, खेती करने, बेहतर मजदूरी अर्जित करने, शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (बीपीआरएंडडी) की रिपोर्ट का हवाला दिया। कहा कि उत्तर प्रदेश में खुली जेलों की क्षमता का केवल 27 प्रतिशत ही उपयोग हो रहा है, जबकि राज्य में 80 हजार से अधिक सजायाफ्ता कैदी हैं।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कम से कम दो नई खुली जेलें स्थापित करने की संभावना पर विचार करने तथा महानिदेशक कारागार से चार राज्यों की व्यवस्था की तुलनात्मक तालिका सहित विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। 18 अगस्त को सुनवाई होगी।
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कोर्ट ने पाया कि प्रदेश में वर्तमान में केवल लखनऊ स्थित मॉडल जेल के रूप में एक ही खुली जेल संचालित है। उसकी क्षमता 800 कैदियों की है, जबकि उसमें केवल 316 कैदी ही रखे गए हैं। राज्य सरकार यह भी स्पष्ट नहीं कर सकी कि इन कैदियों के चयन का आधार क्या था और शेष 484 सीटें कब तक भरी जाएंगी।
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कोर्ट ने महिला कैदियों को केवल जेंडर के आधार पर खुली जेल की सुविधा से वंचित रखने पर भी कड़ी आपत्ति जताई। सरकार को अपनी नीति में आवश्यक संशोधन करने का निर्देश दिया।
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खंडपीठ ने महाराष्ट्र, राजस्थान और केरल की खुली जेल व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां कैदियों को परिवार के साथ रहने, खेती करने, बेहतर मजदूरी अर्जित करने, शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (बीपीआरएंडडी) की रिपोर्ट का हवाला दिया। कहा कि उत्तर प्रदेश में खुली जेलों की क्षमता का केवल 27 प्रतिशत ही उपयोग हो रहा है, जबकि राज्य में 80 हजार से अधिक सजायाफ्ता कैदी हैं।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कम से कम दो नई खुली जेलें स्थापित करने की संभावना पर विचार करने तथा महानिदेशक कारागार से चार राज्यों की व्यवस्था की तुलनात्मक तालिका सहित विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। 18 अगस्त को सुनवाई होगी।