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UP : हाईकोर्ट का अहम फैसला- औचक निरीक्षण कर थानों के सीसीटीवी कैमरों की खबर लेंगे हर जिले के सीजेएम
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 02 Mar 2026 03:00 PM IST
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सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सूबे के थानों के सीसीटीवी कैमरों की निगरानी का जिम्मा हर जिले के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) को सौंपा है। ये अब जिला जज को जानकारी देकर थानों का निरीक्षण करेंगे।
इलाहाबाद हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सूबे के थानों के सीसीटीवी कैमरों की निगरानी का जिम्मा हर जिले के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) को सौंपा है। ये अब जिला जज को जानकारी देकर थानों का निरीक्षण करेंगे। यह जानेंगे कि थाने में लगे कैमरे सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश के अनुसार काम कर रहे या नहीं। निरीक्षण के दौरान जानकारी देने में हीलाहवाली पर पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने ललितपुर निवासी महिला की अवैध हिरासत से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए दिया है। मामला ललितपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेशों की बार-बार अनदेखी से जुड़ा है। धोखाधड़ी मामले में याची की अवैध हिरासत और सूरज डूबने के बाद उसकी बहन की गिरफ्तारी के आरोपों पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने थाने के सीसीटीवी फुटेज तलब किए थे। पुलिस अधिकारियों ने स्टोरेज फुल होने का बहाना बनाकर फुटेज नहीं दिए।
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इस पर हाईकोर्ट ने संबंधित थाना प्रभारी और जांच अधिकारी को अवमानना का दोषी करार दिया। सजा के तौर पर दोनों को कोर्ट की कार्यवाही समाप्त होने तक अदालत कक्ष में ही हिरासत में रखा गया। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक मजिस्ट्रेट का पद और कद डीएम, एसपी ही नहीं, किसी भी राजनीतिक प्रमुख से ऊपर है। उनके आदेश की अवहेलना न केवल अदालत की अवमानना है, बल्कि कानून के राज को सीधी चुनौती है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
जिले के न्यायिक अधिकारी की अदालत आम आदमी के लिए न्याय का पहला दरवाजा है, न्यायपालिका की रीढ़ है। उसकी तुलना प्रशासनिक अधिकारियों से नहीं की जा सकती, जो केवल नीतियों को लागू करते हैं। लिहाजा, कोर्ट ने राज्य सरकार को पीड़ित को एक लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। कहा, यह राशि दोषी पुलिसकर्मियों के वेतन से वसूली जाए।
