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Prayagraj News: हत्या के लिए उकसाने पर मिला आजीवन कारावास
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जिला अदालत ने जेठ की हत्या के लिए ससुर को बंदूक देकर उकसाने के मामले में बहू को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह आदेश अपर सत्र न्यायाधीश/ विशेष न्यायाधीश पॉक्सो पंकज श्रीवास्तव की अदालत ने दिया।
कर्नलगंज थाना क्षेत्र के बेली रोड निवासी राजेंद्र प्रसाद और राजकुमारी के खिलाफ मृतक की पत्नी ने हत्या के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई थी। अभियोजन के अनुसार 16 जुलाई 2010 की रात करीब 11 बजे बेली रोड स्थित मकान में बलराम कुशवाहा का अपने पिता राजेंद्र प्रसाद से पैसों के लेनदेन को लेकर विवाद हुआ था।
इसी दौरान राजकुमारी ने दो नाली बंदूक उठाकर ससुर राजेंद्र प्रसाद को दी और बलराम को मारने के लिए उकसाया। इसके बाद राजेंद्र प्रसाद ने बलराम को गोली मार दी। 28 जुलाई 2010 को इलाज के दौरान बलराम की मौत हो गई। विवेचना के दौरान घटना में प्रयुक्त 12 बोर की दो नाली बंदूक, एक कारतूस और दो खोखे बरामद किए गए थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बलराम की मौत फायर आर्म्स इंजरी के कारण होना बताया गया।
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अभियोजन ने वादी समेत आठ गवाह पेश किए। अदालत ने माना कि अभियोजन राजकुमारी के खिलाफ हत्या का आरोप युक्तियुक्त संदेह से परे साबित करने में सफल रहा। मामले में राज कुमारी के साथ उसका ससुर राजेंद्र प्रसाद भी आरोपी था, लेकिन विचारण के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने राजकुमारी के गृहणी होने, परिवार की जिम्मेदारी, बीमारी और पहली बार अपराध में दोषसिद्ध होने का हवाला देते हुए कम सजा की मांग की। अदालत ने अपराध की प्रकृति और परिस्थितियों को देखते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 10 हजार रुपये का अर्थ दंड लगाया।
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कर्नलगंज थाना क्षेत्र के बेली रोड निवासी राजेंद्र प्रसाद और राजकुमारी के खिलाफ मृतक की पत्नी ने हत्या के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई थी। अभियोजन के अनुसार 16 जुलाई 2010 की रात करीब 11 बजे बेली रोड स्थित मकान में बलराम कुशवाहा का अपने पिता राजेंद्र प्रसाद से पैसों के लेनदेन को लेकर विवाद हुआ था।
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इसी दौरान राजकुमारी ने दो नाली बंदूक उठाकर ससुर राजेंद्र प्रसाद को दी और बलराम को मारने के लिए उकसाया। इसके बाद राजेंद्र प्रसाद ने बलराम को गोली मार दी। 28 जुलाई 2010 को इलाज के दौरान बलराम की मौत हो गई। विवेचना के दौरान घटना में प्रयुक्त 12 बोर की दो नाली बंदूक, एक कारतूस और दो खोखे बरामद किए गए थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बलराम की मौत फायर आर्म्स इंजरी के कारण होना बताया गया।
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अभियोजन ने वादी समेत आठ गवाह पेश किए। अदालत ने माना कि अभियोजन राजकुमारी के खिलाफ हत्या का आरोप युक्तियुक्त संदेह से परे साबित करने में सफल रहा। मामले में राज कुमारी के साथ उसका ससुर राजेंद्र प्रसाद भी आरोपी था, लेकिन विचारण के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने राजकुमारी के गृहणी होने, परिवार की जिम्मेदारी, बीमारी और पहली बार अपराध में दोषसिद्ध होने का हवाला देते हुए कम सजा की मांग की। अदालत ने अपराध की प्रकृति और परिस्थितियों को देखते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 10 हजार रुपये का अर्थ दंड लगाया।