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Prayagraj News: जिंदगी ही हमें जी रही, हम कहां जिंदगी जी रहे हैं...

संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज Updated Mon, 23 Mar 2026 01:07 AM IST
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Life is living us, where are we living life...
करछना में गोष्ठी में काव्य पाठ करते कवि। संवाद
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विश्व कविता दिवस पर वेद प्रकाश श्रीवास्तव के आवास पर आयोजित कवि गोष्ठी में कवियों ने अपनी प्रस्तुति से लोगों को लोटपोट कर दिया। अध्यक्षता करते हुए हास्य कवि अशोक सिंह बेशरम ने कहा कि दुनियादारी की जद में उलझकर अपने जख्मों जिगर सी रहे हैं...जिंदगी ही हमें जी रही है, हम कहां जिंदगी जी रहे हैं।
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इससे पहले कवयित्री राधा शुक्ला की वाणी वंदना के बाद संजय पांडेय सरस ने कहा-वह कुछ कहते हैं तो ऐसा लगता है, पत्ता-पत्ता उनकी बात समझता है। संचालन करते हुए बबलू सिंह बहियारी ने कहा-शहरों में लू का मौसम है, गांवों में वीरानी है... पेश किया।
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रत्नाकर सिंह तन्हा ने कहा-नैनों में नीर तुम्ही तो हो, मन की मेनका तुम्ही तो हो। गजलकार कृष्णकांत कामिल की गजलें भी खूब सराही गईं। उन्होंने कहा-तौर कब बदलते हैं लोग इस सियासत में, जब कभी बदलते हैं, कुर्सियां बदलते हैं.. वरिष्ठ गीतकार डॉ.आनंद श्रीवास्तव ने कह- हम तोहरे अंगना के फुलवा हे मैया, हमका उड़ाय देहिउ जानि के चिरैया।
संयोजिका लोकगायिका मोहिनी श्रीवास्तव और ओम शिवम पांडेय, शिखा सिंह ने भी काव्यपाठ से लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस मौके पर कमला शंकर तिवारी, रिंकू सिंह, राजू सिंह, अभिषेक श्रीवास्तव, वंदना सिंह, स्वाति और प्रीति आदि मौजूद रहे।
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