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Prayagraj News : महाकुंभ में संगम पर आए 66 करोड़ श्रद्धालु, फिर भी रेत की शुद्धता बरकरार

मानसी त्रिपाठी, संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 22 Mar 2026 01:16 PM IST
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सार

महाकुंभ-2025 के दौरान संगम की रेती पर दुनिया भर से 66 करोड़ श्रद्धालु आए, उनके लिए 28 हजार शौचालय और 20 हजार से अधिक यूरिनल बनाए गए पर मिट्टी की शुद्धता अब भी बरकरार है।

News: 66 crore devotees gathered at the Sangam for the Maha Kumbh, yet the purity of the sand remains intact
महाकुंभ 2025 के बाद भी शुद्ध रहा संगम का जल। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

महाकुंभ-2025 के दौरान संगम की रेती पर दुनिया भर से 66 करोड़ श्रद्धालु आए, उनके लिए 28 हजार शौचालय और 20 हजार से अधिक यूरिनल बनाए गए पर मिट्टी की शुद्धता अब भी बरकरार है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के पृथ्वी एवं ग्रहीय विज्ञान विभाग और राष्ट्रीय प्रायोगिक खानिज एवं शैल विज्ञान केंद्र (एनसीईएमपी) के संयुक्त शोध में ये महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं।

अंतरराष्ट्रीय पत्रिका एल्सेवियर (जियो सिस्टम्स ऐंड जियो एनवायर्नमेंट) में 18 मार्च 2026 को प्रकाशित इस शोध ने महाकुंभ-2025 के बाद संगम क्षेत्र की पर्यावरणीय शुद्धता की पुष्टि की है। शोध के अनुसार 66 करोड़ श्रद्धालुओं के आने के बावजूद संगम क्षेत्र की मिट्टी में कोई जहरीला तत्व या भारी धातु नहीं पाई गई है। यह वही मिट्टी है जिसे साधु-संतों के चरणरज के रूप में यहां आए करोड़ों श्रद्धालु अपने साथ ले गए।

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दुनिया के सबसे बड़े मानवीय समागम के बाद मिट्टी की सेहत पर यह शोध काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस शोध में शामिल वैज्ञानिक प्रो.जयंत कुमार पति, शिवांशु द्विवेदी, अनुज सिहं व मृगांक मौली द्विवेदी की टीम ने पाया की संगम क्षेत्र की खनिज संरचना स्थिर बनी हुई है। मिट्टी के नमूनों की वैज्ञानिक जांच में पता चला कि महाकुंभ से पहले और बाद की स्थिति लगभग एक समान जो नदियों के मजबूत पारिस्थितिक तंत्र को दर्शाती है। 

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दो सौ नमूनों की जांच की

प्रो.जयंत कुमार पति की टीम ने मिट्टी की शुद्धता और खनिजों की स्थिति का पता लगाने के लिए संगम नोज एवं आसपास के घाटों से कुल 200 नमूने एकत्र किए। इनमें महाकुंभ के पहले दिसंबर 2024 और महाकुंभ के बाद मार्च 2025 में लिए गए 100-100 नमूने शामिल हैं। इनके भौतिक और रासायनिक विश्लेषण में पाया गया कि करोड़ों की भीड़ के बावजूद खनिजों की सांद्रता में कोई खतरनाक बदलाव नहीं हुआ।

घातक वस्तुओं का नहीं मिला नामोनिशान

शोध में यह भी स्पष्ट हुआ कि शरीर और प्रकृति के लिए क्रोमियम, जस्ता, निकिल या कोबाल्ट संगम के नमूनों में खतरनाक स्तर पर नहीं हैं। आमतौर पर इन धातुओं की मात्रा बढ़ने से जलीय जीवन और मानवीय स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा पैदा हो जाता है पर संगम क्षेत्र में इनका नामोनिशान नहीं मिला।

मिला उल्कापिंडों के अंश जैसा कण

शोध के दौरान इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पृथ्वी एवं ग्रहीय विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों को लोहे का एक अत्यंत सूक्ष्म गोलाकार कण मिला है। इसकी बनावट अंतरिक्ष से आने वाले मेटियोराइट (उल्कापिंडों) के अंश जैसी है। हालांकि, इसकी पुष्टि के लिए टीम गहराई से विश्लेषण कर रही है। पता लगाया जा रहा है कि यह प्राकृतिक है या मानव जनित गतिविधियों के कारण उत्पन्न हुआ है।

मिट्टी में माइक्रोप्लास्टिक मिलने से बढ़ी चिंता

शोध में एक चिंताजनक बात भी सामने आई है। संगम की मिट्टी में माइक्रोप्लास्टिक फाइबर (प्लास्टिक के बहुत महीन रेशे) पाए गए हैं। टीम का कहना है कि यदि समय रहते प्लास्टिक कचरे का प्रबंधन नहीं किया गया तो भविष्य में यह जलीय जीवन के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।

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