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Prayagraj : अवैध गिरफ्तारी मामले में बंदी को तत्काल रिहा करने का आदेश, बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर फैसला
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 12 Apr 2026 07:26 PM IST
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सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी के आधारों का उल्लेख न करने और बिना सोचे-समझे रिमांड आदेश जारी करने पर मुरादाबाद के युवक की हिरासत को अवैध घोषित कर दिया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, मुरादाबाद की ओर से एक अप्रैल 2026 को जारी रिमांड आदेश को रद्द कर दिया है।
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- फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी के आधारों का उल्लेख न करने और बिना सोचे-समझे रिमांड आदेश जारी करने पर मुरादाबाद के युवक की हिरासत को अवैध घोषित कर दिया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, मुरादाबाद की ओर से एक अप्रैल 2026 को जारी रिमांड आदेश को रद्द कर दिया है। साथ ही युवक को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है।
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यह आदेश सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने मोहम्मद आसिफ की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर दिया। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि पुलिस की ओर से तैयार अरेस्ट मेमो के कॉलम संख्या 13 में गिरफ्तारी के अनिवार्य आधारों का उल्लेख नहीं किया गया था। साथ ही मजिस्ट्रेट ने रिमांड आदेश एक छपे प्रोफार्मा पर पारित किया, जो न्यायिक विवेक के इस्तेमाल न होने का स्पष्ट प्रमाण है।
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कोर्ट ने इन तर्कों को स्वीकार करते हुए कहा कि वर्तमान मामला पूर्व में दिए गए ‘उमंग रस्तोगी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य’ के फैसले के सिद्धांतों के विपरीत है। अदालत ने याचिकाकर्ता की गिरफ्तारी और हिरासत को असंवैधानिक और अवैध ठहराते हुए उसे तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि कानून के अनुसार अधिकारियों के पास याचिकाकर्ता के खिलाफ नए सिरे से कानूनी कार्यवाही करने का विकल्प खुला रहेगा।