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Research : अरुणाचल प्रदेश में खोजी गई दुर्लभ प्रजाति की मास्क वाली मधुमक्खी, पर्यावरण के लिए है उपयोगी

मानसी त्रिपाठी, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 01 Feb 2026 06:01 PM IST
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सार

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कीट वैज्ञानिकों ने अरुणाचल प्रदेश में दुर्लभ प्रजाति की मास्क वाली मधुमक्खी की खोज की है। यह पर्यावरण के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकती है। शोध में इलाहाबाद विश्वविद्यालय संग जर्मनी और जापान के कीट वैज्ञानिक भी शामिल हैं। मधुमक्खी की 37 प्रजातियों का डाटाबेस तैयार क किया गया है।

rare species of masked bee discovered in Arunachal Pradesh is beneficial for the environment
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कीट वैज्ञानिकों ने खोजी मास्क वाली दुर्लभ मधुमक्खी। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले में कीट वैज्ञानिकों ने दुर्लभ प्रजाति की मास्क वाली मधुमक्खी की खोज की है जो शहद व कृषि उत्पादन से लेकर पर्यावरण संरक्षण तक में उपयोगी साबित होगी। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह मधुमक्खी इकोसिस्टम की महत्वपूर्ण पॉलिनेटर (परागणकर्ता) है। इस प्रजाति के महत्व एवं उपयागिता को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तृत शोध कार्य जारी है। यह सर्वे भविष्य में कृषि परागण को समझने और पर्यावरण संरक्षण कि दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होगा। अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका ‘कांट्रीब्यूशन टू एंटोमोलॉजी’ के ताजा अंक में प्रकाशित इस शोध ने जैव-विविधता के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित किए हैं।

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इस शोध में इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के जंतु विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.जगदीश सैनी, जर्मनी के डॉ.होल्गर एच.दाथे और जापान के डॉ.शुइची इकुडोम शामिल हैं। इन कीट वैज्ञानिकों ने साथ मिलकर पूर्वी गोलार्ध में मधुमक्खियों की नई प्रजातियों पर एक व्यापक सर्वे पूरा किया है। मधुमक्खी की 37 प्रजातियों का डाटाबेस तैयार किया है। 

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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कीट वैज्ञानिकों ने खोजी मास्क वाली दुर्लभ मधुमक्खी। - फोटो : अमर उजाला।

पहचान के लिए ‘मास्क’ बना आधार

इन कीटों को इनके चेहरे पर मौजूद पीले या सफेद निशानों के कारण ‘मास्क बी’ कहा जाता है। इविवि के कीट वैज्ञानिक डॉ. सैनी ने बताया कि ये कीट आकार में अत्यंत छोटे (4 से 6 मिमी) होते हैं। इनकी सटीक पहचान के लिए शोध में इनके जननांगों की संरचना को वैज्ञानिक आधार बनाया गया है।

अपने गुरु प्रो. गुप्ता के सम्मान में नाम दिया ‘हाइलयस गुप्ताई’

डॉ.जगदीश सैनी ने अपने गुरु प्रो.राजीव कुमार गुप्ता के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए अपनी इस महत्वपूर्ण खोज का नामकरण किया है। उन्होंने मास्क वाली मधुमक्खी का नाम ‘हाइलयस गुप्ताई’ रखा है। डॉ. सैनी का मानना है कि यह प्रजाति न केवल भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र की विशिष्ट जैव-विविधता को दर्शाती है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गुरु-शिष्य परंपरा के गौरव को भी रेखांकित करती है।

स्पेन में तीन नई प्रजातियों की पहचान

इस अंतरराष्ट्रीय शोध टीम ने स्पेन के कैनरी द्वीप समूह के विस्तृत सर्वे के दौरान तीन बिल्कुल नई प्रजातियों की पहचान की है। इनमें हाइलयस हिएरो (एल हिएरो द्वीप), हाइलयस गोमेरेंसिस (ला गोमेरा) और हाइलयस पाल्मेंसिस (ला पाल्मा द्वीप) शामिल हैं।

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