सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court: Murder accused acquitted of life imprisonment in their youth are sent to jail in old age

High Court : जवानी में उम्रकैद से बरी हत्यारोपियों को बुढ़ापे में हवालात, तत्काल रिहाई का आदेश

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 19 Mar 2026 01:44 PM IST
विज्ञापन
सार

बाबुओं (लिपिक) की गलती के कारण 39 साल पहले जवानी में उम्रकैद से बरी दो हत्यारोपियों को बुढ़ापे में हवालात मिली। राज खुला तो बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन्हें तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है।

High Court: Murder accused acquitted of life imprisonment in their youth are sent to jail in old age
अदालत - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार

बाबुओं (लिपिक) की गलती के कारण 39 साल पहले जवानी में उम्रकैद से बरी दो हत्यारोपियों को बुढ़ापे में हवालात मिली। राज खुला तो बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन्हें तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति चंद्र धारी सिंह, न्यायमूर्ति देवेंद्र सिंह प्रथम की खंडपीठ ने ललितपुर निवासी शिवचरण और हजारी लाल की 39 साल पुरानी अपील पर सुनवाई करते हुए दिया है। गैर जमानती वारंट पर दोनों को ललितपुर पुलिस ने गिरफ्तार कर कोर्ट में हाजिर किया था।

Trending Videos


मामला ललितपुर के पूराकलां थाना क्षेत्र का है। 1986 में ट्रायल कोर्ट से हत्या में मिली उम्रकैद को शिवचरण, हजारी लाल, जगन्नाथ व सरदार सिंह ने दो अलग-अलग आपराधिक अपील में चुनौती दी थी। 16 नवंबर 1987 को हाईकोर्ट की एक अन्य खंडपीठ ने सभी को निर्दोष पाते हुए बरी कर दिया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


फाइलों में दब गया इन्साफ

हैरानी की बात यह रही कि 1987 में सुनाया गया दोषमुक्ति का फैसला कोर्ट के रिकॉर्ड में सही ढंग से दर्ज ही नहीं हो पाया। तब से अब तक अभिलेखों में केस लंबित दिखता रहा। हाल ही में जब यह पुराना मामला दोबारा लिस्ट हुआ और वकील पेश नहीं हुए तो कोर्ट ने फरवरी 2026 में दोनों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया। इसके बाद पुलिस ने दोनों बुजुर्गों को गिरफ्तार कर लिया और कोर्ट में पेश किया।

सुनवाई के दौरान खुला राज

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि शिवचरण, हजारी लाल की ओर से दाखिल अपील का फैसला दूसरे आरोपियों जगन्नाथ व सरदार सिंह की अपील में पारित फैसलों में दर्ज था। लेकिन, लिपिकीय त्रुटि के कारण वह दूसरी फाइल में वह आदेश दर्ज नहीं हुआ। इसके कारण शिवचरण और हजारी लाल की फाइल लंबित मामलों की श्रेणी में शामिल हो गई। जब पुराने मामलों की सुनवाई शुरू हुई तो राज खुला। पता लगा कि पुलिस हिरासत में अदालत में पेश बुजुर्ग 39 साल पहले ही दोषमुक्त हो चुके हैं।


यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि रजिस्ट्री के बाबुओं और वकीलों की चूक के कारण उन लोगों को हिरासत में लिया गया, जो दशकों पहले बरी हो चुके थे।  - इलाहाबाद हाईकोर्ट

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed