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UP: 'निजी परिसर में नमाज और धार्मिक आयोजनों पर रोक नहीं लगा सकते', कोर्ट की सख्त टिप्पणी; कहा-सबका समान अधिकार

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: Sharukh Khan Updated Thu, 19 Mar 2026 08:49 AM IST
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सार

निजी परिसर में नमाज व धार्मिक आयोजनों पर रोक नहीं लगा सकते। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सभी धर्मों को समान अधिकार है। संभल निवासी याची ने प्रशासन के नमाजियों की संख्या सीमित करने के आदेश को चुनौती दी थी। 

Allahabad High Court says Namaz and Religious Gatherings Cannot Be Banned on Private Premises
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी व्यक्ति के निजी परिसर में प्रार्थना या धार्मिक आयोजनों पर रोक नहीं लगाई जा सकती है। अनुच्छेद-25 प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म को मानने, उसके अनुसार आचरण करने और प्रचार करने का समान अधिकार देता है। यह अधिकार सभी धर्मों और समुदायों पर समान रूप से लागू होता है।
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यह टिप्पणी न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने रमजान के दौरान एक स्थल पर नमाजियों की संख्या सीमित करने के जिला प्रशासन के फैसले को चुनौती देने वाली संभल निवासी मुनाजिर खान की याचिका पर की। 
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इससे पहले सुनवाई पर कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की थी। कहा था कि डीएम और एसपी कानून का शासन सुनिश्चित करने में सक्षम नहीं हैं तो इस्तीफा दे दें या ट्रांसफर करा लें।

याचिका में मुनाजिर ने गाटा संख्या 291 पर एक स्थल को मस्जिद बताते हुए वहां नमाज अदा करने की अनुमति मांगी थी। उनकी ओर से दलील दी गई थी कि प्रशासन ने कानून-व्यवस्था का हवाला देकर नमाजियों की संख्या 20 तक सीमित कर दी थी।

कोर्ट ने कहा- जरूरत पर पूजास्थल व उपासकों को सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए
कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि निजी स्थान पर प्रार्थनाओं के खिलाफ कोई व्यक्ति या समूह आपत्ति जताता है तो प्रशासन को उसका संज्ञान लेना चाहिए। जरूरत पर पूजास्थल व उपासकों को सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए। सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के आधार पर ही इन अधिकारों पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं, लेकिन किसी को अपने निजी परिसर में शांतिपूर्ण ढंग से इबादत करने से नहीं रोका जा सकता। 

 

याचिकाकर्ता ने अपने दादा की ओर से 1995 में मस्जिद निर्माण के लिए समर्पित भूमि और वहां नमाज पढ़ने की अनुमति मांगी थी। साथ ही रमजान के महीने में नमाजियों की संख्या सीमित करने भी विरोध किया। हालांकि, कोर्ट ने वर्तमान स्थिति में उस संरचना को मस्जिद नहीं माना, लेकिन यह आदेश दिया कि वहां पहले से नमाज अदा की जाती रही है। इसलिए श्रद्धालुओं को वहां प्रार्थना करने से न रोका जाए।
 

गणतंत्र की ताकत सहनशीलता और आपसी सम्मान में निहित
कोर्ट ने ‘मैरानाथ फुल गॉस्पेल मिनिस्ट्रीज’ बनाम उत्तर प्रदेश का हवाला देते हुए दोहराया कि निजी संपत्तियों में धार्मिक कार्यों को लेकर कोई हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। हाईकोर्ट ने भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता की प्रशंसा की। कहा कि गणतंत्र की ताकत सहनशीलता और आपसी सम्मान में निहित है।

अनुच्छेद-25 न केवल आस्तिकों, बल्कि नास्तिकों को भी अपने विचारों के प्रचार की स्वतंत्रता देता है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि इस आदेश की प्रति पुलिस महानिदेशक और अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को भेजी जाए, ताकि इसे जमीनी स्तर पर प्रवर्तन अधिकारियों तक प्रसारित किया जा सके।

 

सरकार की दलील
एडिशनल एडवोकेट जनरल ने कोर्ट में कहा कि याची ने नमाजियों की संख्या सीमित किसने की, यह नहीं बताया।
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