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UP: पहली बार सोलर कोच तैयार, सौर ऊर्जा से चलेंगे पंखे-लाइट; छत पर लगे सात KW के पैनल से चार्ज होंगी बैटरियां

Tue, 21 Jul 2026 03:27 PM IST
Sharukh Khan राहुल शर्मा, अमर उजाला, प्रयागराज
राहुल शर्मा, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: Sharukh Khan Updated Tue, 21 Jul 2026 03:27 PM IST
सार

रेलवे में पहली बार सोलर कोच तैयार किए गए हैं। यह कोच यात्री ट्रेनों में लगाए जाएंगे। इन कोच की बैटरियों की कार्यक्षमता भी बढ़ेगी। छत पर लगाए गए सात किलोवाट के पैनल से बैटरियां चार्ज होंगी।

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UP News North Central Railway Develops Its First Solar Coach Solar Panels to Power Fans and Lights
solar powered train coach - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पर्यावरण-अनुकूल और ऊर्जा-कुशल रेल संचालन की दिशा में उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) ने पहली बार विशेष सोलर कोच तैयार किया है। आने वाले दिनों में एनसीआर की ट्रेनों में सौर ऊर्जा से लाइट और पंखे चलेंगे।
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एनसीआर के महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह के दिशा-निर्देशन में इसे तैयार किया है। कोच की छत पर उच्च क्षमता वाले सोलर फोटोवोल्टिक पैनल लगाए गए हैं जो सीधे सूर्य के प्रकाश से बिजली बनाकर बैटरी बैंक को चार्ज करते हैं।
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पायलट प्रोजेक्ट के तहत इस डिब्बे की छत पर करीब सात किलोवाट-पीक (केडब्ल्यूपी) क्षमता का सोलर सिस्टम स्थापित किया गया है। दिनभर मिलने वाली धूप का उपयोग करने से पारंपरिक बिजली उत्पादन पर निर्भरता काफी हद तक कम हो जाती है।
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रेलवे अधिकारियों का मानना है कि सोलर पैनल के इस इस्तेमाल से न केवल भारी मात्रा में ऊर्जा की बचत होगी, बल्कि पारंपरिक चार्जिंग सिस्टम पर पड़ने वाला भार भी घटेगा। इससे बैटरियों की कार्यक्षमता और उम्र बढ़ेगी जिससे रखरखाव का खर्च कम होगा और ऑनबोर्ड बिजली सेवाओं की विश्वसनीयता में बड़ा सुधार आएगा। आने वाले दिनों में इस तरह के कोच यात्री ट्रेनों में लगाए जाएंगे। इसकी शुरुआत जनरल और स्लीपर कोच से होगी।

आईसीएफ यात्री डिब्बों में एक्सल-ड्रिवन अल्टरनेटर का इस्तेमाल
आमतौर पर आईसीएफ यात्री डिब्बों में बिजली की आपूर्ति के लिए कोच के नीचे लगे एक्सल-ड्रिवन अल्टरनेटर का इस्तेमाल किया जाता है। ट्रेन के पहियों की गति से बेल्ट के जरिये चलने वाला यह अल्टरनेटर बैटरी बैंक को चार्ज करता है और डिब्बों में रोशनी, पंखे तथा मोबाइल चार्जिंग जैसी सुविधाएं मुहैया कराता है।

यह पारंपरिक व्यवस्था दशकों से प्रभावी रही है लेकिन इसकी क्षमता पूरी तरह से ट्रेन की आवाजाही पर निर्भर रहती है। साथ ही, इसमें यांत्रिक और विद्युत रूपांतरण के दौरान ऊर्जा का नुकसान भी होता है।

 

यह परियोजना हरित पहलों, तकनीकी नवाचार और ऊर्जा संसाधनों के कुशल उपयोग के प्रति एनसीआर की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इस पायलट प्रोजेक्ट से मिले अनुभवों का उपयोग भविष्य में अन्य यात्री डिब्बों में सौर ऊर्जा तकनीकों को लागू करने के लिए किया जाएगा। - डॉ. शिवम शर्मा, सीपीआरओ, एनसीआर
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