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Ambedkar Nagar News: मजदूरों के खातों से 94 लाख की ठगी, गुजरात पुलिस पहुंची तो खुली म्यूल अकाउंट की परतें

संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर Updated Mon, 16 Feb 2026 11:43 PM IST
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94 lakh rupees defrauded from laborers' accounts, Gujarat police arrive and uncover the secrets of the mule account.
साइबर थाना कार्यालय। - फोटो : छात्रा की मौत के बाद जांच करती पुलिस।
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अंबेडकरनगर। मालीपुर थाना क्षेत्र में साइबर ठगों द्वारा गरीब मजदूरों के बैंक खातों का इस्तेमाल कर 94 लाख रुपये की हेराफेरी करने का मामला सामने आया है। इस बड़े रैकेट का खुलासा तब हुआ जब गुजरात पुलिस एक मामले की जांच के सिलसिले में कोठीभार गांव पहुंची। पुलिस ने इस मामले में दो स्थानीय युवकों और झारखंड के दो अज्ञात जालसाजों सहित कुल चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
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मामले के मुख्य शिकायतकर्ता और पेशे से राजमिस्त्री बहरैची के अनुसार, अगस्त 2025 में गांव के ही सोनू और अमरजीत नाम के युवकों ने उन्हें कम समय में ज्यादा पैसा कमाने का लालच दिया था। उन्होंने बताया कि क्रिकेट सट्टेबाजी से जीती गई रकम उनके खाते में आएगी, जिसके बदले उन्हें कमीशन और खाता खुलवाने के एवज में एक हजार रुपये दिए जाएंगे। इसी लालच में आकर बहरैची ने जुलाई 2025 में इंडियन ओवरसीज बैंक, पटेलनगर अकबरपुर में अपना खाता खुलवाया। आरोप है कि सोनू और अमरजीत ने बहरैची के अलावा गांव के रामतीरथ, उनकी पत्नी मिथिलेश, रामसकल, मनीषा और उनकी पत्नी बलराम सहित सात लोगों के खाते भी खुलवाए। आरोप है कि जालसाजों ने इन मासूम मजदूरों के खातों का उपयोग कर गुजरात, झारखंड, राजस्थान (जोधपुर) और बिहार जैसे राज्यों से साइबर ठगी की रकम का लेनदेन किया। घटना की जानकारी होने पर बहरैची ने 15 फरवरी को आरोपी सोनू, अमरजीत और झारखंड निवासी लकी उर्फ सुजीत सिंह व खुशबू के खिलाफ धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस अब उन सभी संदिग्ध म्यूल खातों (दूसरों के नाम पर इस्तेमाल होने वाले खाते) की जांच कर रही है जिनका उपयोग इस गिरोह ने किया था।
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स्थानीय सिस्टम को पता तक नहीं चल सका
चाैकानें वाली बात यह है कि मात्र सात महीनों के भीतर इन खातों से 94 लाख रुपये पार कर दिए गए। स्थानीय सिस्टम को ठगी का पता तब चला, जब गुजरात में दर्ज एक साइबर अपराध की जांच करते हुए 6 फरवरी को वहां की पुलिस कोठीभार गांव पहुंची। पुलिस ने जब रामतीरथ के घर पूछताछ की, तब ग्रामीणों को अहसास हुआ कि उनके खातों का इस्तेमाल अवैध कार्यों के लिए किया जा रहा है।
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---क्यों आसान मजदूरों को निशाना बनाना
साइबर ठग अक्सर ऐसे लोगों को अपना निशाना बनाते हैं जिन्हें पैसों की सख्त जरूरत होती है या जो रातों-रात अमीर बनने का सपना देखते हैं। ये अपराधी भोले-भाले लोगों को कुछ पैसों का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवा लेते हैं। ठगी के जरिए लूटा गया पैसा इन्हीं खातों में ट्रांसफर किया जाता है। इन म्यूल खातों का उपयोग इसलिए किया जाता है, ताकि पुलिस की जांच में असली अपराधी की पहचान न हो सके और वे पकड़े जाने से बच जाएं।
--बैंकिंग सिस्टम पर उठ रहे गंभीर सवाल

एक ही गांव के कई मजदूरों के खाते एक पैटर्न में कैसे खुल गए

खातों में बड़े ट्रांजेक्शन किस आधार पर किए गए

खाताधारक दैनिक मजदूरी करने वाले, फिर भी जांच क्यों नहीं हुई

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सुरक्षा के उपाय
किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपना बैंक खाता न खुलवाएं।
अपने बैंक खाते की जानकारी, जैसे खाता संख्या, पिन, ओटीपी आदि किसी के साथ साझा न करें।
किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत अपने बैंक और पुलिस को दें।



पुलिस ने शुरू की जांच
सात मजदूरों के नाम पर म्यूल खाते खुलवाकर उनमें लाखों रुपये की ठगी की रकम का लेनदेन किया गया है। गुजरात पुलिस की जांच में खुलासा होने के बाद पीड़ितों ने चार नामजद आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
रंधा सिंह, प्रभारी साइबर थाना
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