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Ambedkar Nagar News: चार दिन बीते, ईरान में फंसे लोगों से नहीं हो पाया संपर्क, परिजन परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Mon, 02 Mar 2026 11:59 PM IST
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अंबेडकरनगर। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान के सुप्रीम नेता अयातुल्ला अली खामनेई के निधन के बाद से अंबेडकरनगर जिले में शोक की लहर दौड़ गई है। जहां एक ओर शिया बहुल इलाकों में श्रद्धांजलि सभाओं का दौर जारी है। वहीं दूसरी ओर ईरान में फंसे अपने प्रियजनों से संपर्क न हो पाने के कारण परिजन गहरे सदमे और अनिश्चितता से गुजर रहे हैं। चार दिनों से लगातार संपर्क टूटने की वजह से परिवारों की चिंताएं बढ़ रहीं हैं।
अकबरपुर के शहजादपुर अब्दुल्लापुर निवासी व कांग्रेस महासचिव ऐतबार हुसैन इस समय अधिक पीड़ा में हैं। उनके बेटे काजिम अब्बास, बेटी तस्वीर फातिमा, दामाद जमीर अब्बास और दूसरे दामाद अली मेहंदी अपनी पत्नियों के साथ ईरान के मशहद शहर में रहते हैं। 27 फरवरी की रात से उनका फोन बंद है, और पिछले तीन दिनों से परिवार को उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया है। यह अनिश्चितता और अपने प्रियजनों के सुरक्षित होने की चिंता ऐतबार हुसैन और उनके परिवार के लिए असहनीय हो गई है। उन्होंने भारत सरकार से इस गंभीर मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है ताकि फंसे हुए भारतीयों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित हो सके।
खामनेई के निधन पर शोक संवेदनाएं
ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह सैय्यद अली खामनेई की शहादत पर जिले भर में श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया जा रहा है। रविवार देर शाम अकबरपुर के मीरानपुर स्थित शाही इमामबाड़ा में अंजुमन अकबरिया (रजिस्टर्ड) द्वारा आयोजित एक श्रद्धांजलि सभा में वरिष्ठ शिया धर्मगुरु मौलाना अकबर अली ने खामनेई को साहस, नेतृत्व और प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि अन्याय के विरुद्ध आवाजें कभी दबाई नहीं जा सकतीं। मौलाना नदीम ने विश्व समुदाय से हिंसा और टकराव की राजनीति से ऊपर उठकर संवाद और शांति का मार्ग अपनाने की अपील की।
बसखारी, अकबरपुर के लोरपुर, पकड़ी भोजपुर, जलालपुर के नगपुर और बेला परसा जैसे विभिन्न स्थानों पर भी बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए। लोगों ने खामनेई की तस्वीरें हाथ में लेकर शोक व्यक्त किया और शांति सभाओं में भाग लिया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी ने इस दुख की घड़ी में अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
कैंडल मार्च निकालकर दी श्रद्धांजलि
विद्युतनगर के टांडा में शिया समुदाय ने रविवार शाम को कैंडल मार्च निकालकर खामनेई को श्रद्धांजलि दी। मौलाना सैय्यद गुलाम मुर्तजा और मौलाना सैय्यद रजा के नेतृत्व में यह आयोजन हुआ। वहीं, जलालपुर के जाफराबाद के लोगों द्वारा कैंडल मार्च निकालने की योजना को सुरक्षा और होली के मद्देनजर एसडीएम राहुल गुप्ता ने अनुमति नहीं दी, लेकिन उन्हें मस्जिदों में श्रद्धांजलि देने की सलाह दी गई।
-सामाजिक कार्यकर्ता सैयद आबिद हुसैन ने खाड़ी देशों में रह रहे प्रवासी मजदूरों के लिए भारतीय दूतावासों की एडवाइजरी का पालन करने को सुरक्षा के लिए सबसे आवश्यक बताया।
-मुस्लिम स्कॉलर सैयद मकसूद अशरफ और सैयद मुहम्मद अशरफ ने खामनेई को एक बहादुर और दूरदर्शी नेता बताते हुए भारत-ईरान के ऐतिहासिक संबंधों को देखते हुए केंद्र सरकार से संतुलित भूमिका निभाने की अपेक्षा व्यक्त की।
-मौलाना नुरूल हसन ने उन्हें एक निर्भीक नेता के रूप में याद किया जिन्होंने तानाशाहों के सामने कभी घुटने नहीं टेके।
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अकबरपुर के शहजादपुर अब्दुल्लापुर निवासी व कांग्रेस महासचिव ऐतबार हुसैन इस समय अधिक पीड़ा में हैं। उनके बेटे काजिम अब्बास, बेटी तस्वीर फातिमा, दामाद जमीर अब्बास और दूसरे दामाद अली मेहंदी अपनी पत्नियों के साथ ईरान के मशहद शहर में रहते हैं। 27 फरवरी की रात से उनका फोन बंद है, और पिछले तीन दिनों से परिवार को उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया है। यह अनिश्चितता और अपने प्रियजनों के सुरक्षित होने की चिंता ऐतबार हुसैन और उनके परिवार के लिए असहनीय हो गई है। उन्होंने भारत सरकार से इस गंभीर मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है ताकि फंसे हुए भारतीयों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित हो सके।
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खामनेई के निधन पर शोक संवेदनाएं
ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह सैय्यद अली खामनेई की शहादत पर जिले भर में श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया जा रहा है। रविवार देर शाम अकबरपुर के मीरानपुर स्थित शाही इमामबाड़ा में अंजुमन अकबरिया (रजिस्टर्ड) द्वारा आयोजित एक श्रद्धांजलि सभा में वरिष्ठ शिया धर्मगुरु मौलाना अकबर अली ने खामनेई को साहस, नेतृत्व और प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि अन्याय के विरुद्ध आवाजें कभी दबाई नहीं जा सकतीं। मौलाना नदीम ने विश्व समुदाय से हिंसा और टकराव की राजनीति से ऊपर उठकर संवाद और शांति का मार्ग अपनाने की अपील की।
बसखारी, अकबरपुर के लोरपुर, पकड़ी भोजपुर, जलालपुर के नगपुर और बेला परसा जैसे विभिन्न स्थानों पर भी बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए। लोगों ने खामनेई की तस्वीरें हाथ में लेकर शोक व्यक्त किया और शांति सभाओं में भाग लिया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी ने इस दुख की घड़ी में अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
कैंडल मार्च निकालकर दी श्रद्धांजलि
विद्युतनगर के टांडा में शिया समुदाय ने रविवार शाम को कैंडल मार्च निकालकर खामनेई को श्रद्धांजलि दी। मौलाना सैय्यद गुलाम मुर्तजा और मौलाना सैय्यद रजा के नेतृत्व में यह आयोजन हुआ। वहीं, जलालपुर के जाफराबाद के लोगों द्वारा कैंडल मार्च निकालने की योजना को सुरक्षा और होली के मद्देनजर एसडीएम राहुल गुप्ता ने अनुमति नहीं दी, लेकिन उन्हें मस्जिदों में श्रद्धांजलि देने की सलाह दी गई।
-सामाजिक कार्यकर्ता सैयद आबिद हुसैन ने खाड़ी देशों में रह रहे प्रवासी मजदूरों के लिए भारतीय दूतावासों की एडवाइजरी का पालन करने को सुरक्षा के लिए सबसे आवश्यक बताया।
-मुस्लिम स्कॉलर सैयद मकसूद अशरफ और सैयद मुहम्मद अशरफ ने खामनेई को एक बहादुर और दूरदर्शी नेता बताते हुए भारत-ईरान के ऐतिहासिक संबंधों को देखते हुए केंद्र सरकार से संतुलित भूमिका निभाने की अपेक्षा व्यक्त की।
-मौलाना नुरूल हसन ने उन्हें एक निर्भीक नेता के रूप में याद किया जिन्होंने तानाशाहों के सामने कभी घुटने नहीं टेके।
