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Amethi News: 27 हजार महिलाएं व बच्चियां मिलीं एनीमिया पीड़ित
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अमेठी सिटी। स्वास्थ्य विभाग की ओर से छह माह से लेकर 59 वर्ष तक की महिलाओं व बच्चियों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया। अप्रैल 2025 से लेकर फरवरी 2026 तक 1.84 लाख महिलाओं व बच्चियों की जांच की गई, जिसमें से 27 हजार एनीमिया से पीड़ित मिलीं। विभाग की ओर से सभी को उपचार संग बेहतर खानपान की सलाह दी जा रही है।
मातृ एवं शिशु मृत्युदर को कम करने के साथ ही गर्भवती की बेहतर स्वास्थ्य देखभाल के लिए हर माह की नौ, 16 व 24 तारीख को सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की जांच होती है। प्रसव पूर्व जांच करके उन्हें समय पर उचित इलाज मुहैया कराने का प्रयास किया जाता है, जिससे प्रसव में समस्या न हो। सामान्य महिला के शरीर में 11 से 15 ग्राम प्रति डेसीलीटर रक्त होता है। वहीं गर्भवती में हीमोग्लोबिन का स्तर न्यूनतम 11 ग्राम प्रति डेसीलीटर होना चाहिए, लेकिन जांच के दौरान गर्भवतियों में खून की कमी मिल रही है। सीएमओ डॉ. अंशुमान सिंह ने बताया कि गर्भवती महिलाओं में उचित खानपान से गर्भावस्था में खून की कमी दूर हो सकती है। विटामिन सी की मात्रा बढ़ाने के लिए अनार व संतरे का सेवन करें। आयरन के लिए खजूर, अंजीर, अखरोट, किशमिश और बादाम खाएं।
आयुवार यह है स्थिति
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 10 से 19 वर्ष आयु की किशोरियां व युवतियां 887, शून्य से छह माह के 12,468, 20 से 49 वर्ष आयुवर्ग की 14,197 युवती और महिलाएं मिली हैं, जिनमें हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य से बहुत कम मिला है।
गर्भवती में खून की कमी के लक्षण
थकान महसूस होना, चक्कर आना।
ठंड लगना, सांस लेने में दिक्कत होना।
चेहरा पीला पड़ना, सिर दर्द होना।
दिल की धड़कन तेज होना।
भूख में कमी होना, चिड़चिड़ापन।
ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत होना।
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मातृ एवं शिशु मृत्युदर को कम करने के साथ ही गर्भवती की बेहतर स्वास्थ्य देखभाल के लिए हर माह की नौ, 16 व 24 तारीख को सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की जांच होती है। प्रसव पूर्व जांच करके उन्हें समय पर उचित इलाज मुहैया कराने का प्रयास किया जाता है, जिससे प्रसव में समस्या न हो। सामान्य महिला के शरीर में 11 से 15 ग्राम प्रति डेसीलीटर रक्त होता है। वहीं गर्भवती में हीमोग्लोबिन का स्तर न्यूनतम 11 ग्राम प्रति डेसीलीटर होना चाहिए, लेकिन जांच के दौरान गर्भवतियों में खून की कमी मिल रही है। सीएमओ डॉ. अंशुमान सिंह ने बताया कि गर्भवती महिलाओं में उचित खानपान से गर्भावस्था में खून की कमी दूर हो सकती है। विटामिन सी की मात्रा बढ़ाने के लिए अनार व संतरे का सेवन करें। आयरन के लिए खजूर, अंजीर, अखरोट, किशमिश और बादाम खाएं।
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आयुवार यह है स्थिति
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 10 से 19 वर्ष आयु की किशोरियां व युवतियां 887, शून्य से छह माह के 12,468, 20 से 49 वर्ष आयुवर्ग की 14,197 युवती और महिलाएं मिली हैं, जिनमें हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य से बहुत कम मिला है।
गर्भवती में खून की कमी के लक्षण
थकान महसूस होना, चक्कर आना।
ठंड लगना, सांस लेने में दिक्कत होना।
चेहरा पीला पड़ना, सिर दर्द होना।
दिल की धड़कन तेज होना।
भूख में कमी होना, चिड़चिड़ापन।
ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत होना।