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Amethi News: गैस किल्लत से परेशान उपभोक्ताओं को खोजे नहीं मिल रहा स्टोव
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पांडेय का पुरवा गांव में स्टोव की सफाई करती कौशल्या सिंह।
- फोटो : पांडेय का पुरवा गांव में स्टोव की सफाई करती कौशल्या सिंह।
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अमेठी सिटी। गैस की किल्लत से उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सरकार केरोसिन उपलब्ध कराने जा रही है। हालांकि, केरोसिन का उपभोग कैसे होगा, इसको लेकर आम लोग चिंतित हैं। रसोई में गैस चूल्हे का प्रयोग बढ़ने के कारण स्टोव चलन से बाहर हो गए हैं।
पिछले दो वर्षों से बाजारों में भी स्टोव नहीं मिल रहे हैं। केरोसिन मिलने की बात सामने आते ही लोग दुकानों में स्टोव खोजते घूम रहे हैं। कुछ लोग अपने घरों में स्टोर रूम में पड़े पुराने स्टोव निकालकर उनको दुरुस्त कराने में लगे हैं। बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं, जिनके पास अब स्टोव है ही नहीं। ऐसे में वे केरोसिन का प्रयोग कैसे करेंगे, इसको लेकर असमंजस की स्थिति है। गौरीगंज, अमेठी, जगदीशपुर, मुसाफिरखाना और बाजारशुकुल की बाजारों में स्टोव नहीं मिल रहा है। गौरीगंज निवासी दुकानदार सुशील कुमार, नवनीत गुप्ता, राकेश कुमार का कहना है कि करीब दो वर्षों से बाजार में स्टोव उपलब्ध नहीं हैं। अब तक कोई स्टोव के बारे में पूछता भी नहीं था। अब अगर मांग बढ़ती है तो कानपुर से स्टोव मंगाए जाएंगे।
2020 में केरोसिन मुक्त राज्य बना यूपी
उत्तर प्रदेश को वर्ष 2020 में केरोसिन-मुक्त राज्य घोषित किया गया था। सरकार ने स्वच्छ ईंधन (एलपीटी) को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया था। मौजूदा समय में ईंधन संकट को देखते हुए खाद्य एवं रसद विभाग में फिर से केरोसिन के नियोजित वितरण की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इस कार्ययोजना में ग्रामीण क्षेत्रों को प्राथमिकता मिलने की संभावना है। यह कदम उपभोक्ताओं को तत्काल राहत प्रदान करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है। पहले अंत्योदय कार्डधारकों को तीन लीटर और पात्र गृहस्थी कार्डधारकों को एक लीटर केरोसिन दिया जाता था। नई कार्ययोजना के तहत वितरण के नियमों और मात्रा पर विचार किया जा रहा है।
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पिछले दो वर्षों से बाजारों में भी स्टोव नहीं मिल रहे हैं। केरोसिन मिलने की बात सामने आते ही लोग दुकानों में स्टोव खोजते घूम रहे हैं। कुछ लोग अपने घरों में स्टोर रूम में पड़े पुराने स्टोव निकालकर उनको दुरुस्त कराने में लगे हैं। बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं, जिनके पास अब स्टोव है ही नहीं। ऐसे में वे केरोसिन का प्रयोग कैसे करेंगे, इसको लेकर असमंजस की स्थिति है। गौरीगंज, अमेठी, जगदीशपुर, मुसाफिरखाना और बाजारशुकुल की बाजारों में स्टोव नहीं मिल रहा है। गौरीगंज निवासी दुकानदार सुशील कुमार, नवनीत गुप्ता, राकेश कुमार का कहना है कि करीब दो वर्षों से बाजार में स्टोव उपलब्ध नहीं हैं। अब तक कोई स्टोव के बारे में पूछता भी नहीं था। अब अगर मांग बढ़ती है तो कानपुर से स्टोव मंगाए जाएंगे।
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2020 में केरोसिन मुक्त राज्य बना यूपी
उत्तर प्रदेश को वर्ष 2020 में केरोसिन-मुक्त राज्य घोषित किया गया था। सरकार ने स्वच्छ ईंधन (एलपीटी) को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया था। मौजूदा समय में ईंधन संकट को देखते हुए खाद्य एवं रसद विभाग में फिर से केरोसिन के नियोजित वितरण की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इस कार्ययोजना में ग्रामीण क्षेत्रों को प्राथमिकता मिलने की संभावना है। यह कदम उपभोक्ताओं को तत्काल राहत प्रदान करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है। पहले अंत्योदय कार्डधारकों को तीन लीटर और पात्र गृहस्थी कार्डधारकों को एक लीटर केरोसिन दिया जाता था। नई कार्ययोजना के तहत वितरण के नियमों और मात्रा पर विचार किया जा रहा है।