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Amethi News: सज गए देवी मां के दरबार, आज से आराधना
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संग्रामपुर के कालिकन धाम मंदिर में सजावट करते लोग।
- फोटो : संग्रामपुर के कालिकन धाम मंदिर में सजावट करते लोग।
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अमेठी सिटी। आस्था का पर्व नवरात्र बृहस्पतिवार को कलश स्थापना के साथ शुरू होगा। इस दौरान अभिजित मुहूर्त में श्रद्धालु घरों व मंदिरों में देवी कलश की स्थापना कर नौ दिनों तक मां के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना कर सुख समृद्धि की कामना करेंगे।
संग्रामपुर स्थित मां कालिकन धाम, मुसाफिरखाना स्थित हिंगलाज मंदिर, सिंहपुर स्थित अहोरवा भवानी धाम, गौरीगंज स्थित दुर्गन भवानी, शमशेरियन भवानी, माता मवई धाम सहित अन्य देवी मंदिरों को रंग रोगन के साथ सजा संवार कर नवरात्र के लिए तैयार किया गया है। कालिकन धाम के पुजारी अभिषेक शास्त्री ने बताया कि वाराणसी से मंगाए गए 2.5 क्विंटल फूलों से धाम को सजाया जा रहा है। 18 सीसीटीवी कैमरे धाम में लगाए गए हैं। इसके अलावा छह एलईडी टीवी पर गर्भगृह का प्रसारण किया जाएगा।
अहोरवा भवानी धाम में गर्भगृह और मुख्य द्वार की पेंटिंग का काम बुधवार शाम तक होता रहा। सभी देवी मंदिरों के आसपास पूजा सामग्री की दुकानें भी लगनी शुरू हो गईं। मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में महिलाएं मां की मूर्तियां, शृंगार व पूजा से संबंधित बिछिया, चूड़ी, बिंदी, मेहंदी, महावर, चुनरी, नए वस्त्र और आभूषण की खरीदारी करती मिलीं।
मंदिरों में शंख व घंटों की होगी गूंज
नवरात्र के पहले दिन शैलपुत्री की पूजा होगी। बृहस्पतिवार सुबह से देवी मंदिरों में आस्था का सैलाब उमड़ेगा। मंदिर कमेटियां भी स्थानीय प्रशासन के साथ श्रद्धालुओं को दर्शन की व्यवस्था बनाने में जुटी हैं। कालिकन धाम के पीठाधीश्वर श्री महाराज ने बताया कि सुबह 6:52 बजे के बाद से पूरे दिन कलश स्थापना की जा सकती है।
पाषाण रूप में प्रकट हुईं मां कालिका
संग्रामपुर। कालिकन धाम सरयू और गंगा नदियों के मध्य स्थित एक प्राचीन धार्मिक स्थल है, जिसे महर्षि च्यवन की तपोस्थली माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यहां महर्षि च्यवन ने कठोर तप किया। वह अश्विनी कुमारों के निर्मित दिव्य रसायन से पुनः युवा हुए थे। यहीं पर महर्षि च्यवन का विवाह सुकन्या से हुआ। च्यवनप्राश का आविष्कार भी इसी स्थल से जुड़ा माना जाता है। सोम यज्ञ के दौरान देवताओं और महर्षि के आह्वान पर मां कालिका अमृत कुंड की रक्षा के लिए पाषाण रूप में प्रकट हुईं। तब से यह धाम श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है।
अद्भुत है मां अहोरवा भवानी की महिमा
सिंहपुर। मां अहोरवा भवानी धाम की मान्यता है कि महाभारत काल में पांडव अज्ञातवास के दौरान यहां रुके और अर्जुन ने आखेट के दौरान देवी के दर्शन किए। पांडवों ने आखेट के दौरान माता के चरणों में पूजा की, इसलिए देवी का नाम अहोरवा देवी पड़ा। ऐसी कहा जाता है कि माता अहोरवा की प्राकृतिक मूर्ति दिन में तीन रूप बदलकर भक्तों को दर्शन देती हैं।
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संग्रामपुर स्थित मां कालिकन धाम, मुसाफिरखाना स्थित हिंगलाज मंदिर, सिंहपुर स्थित अहोरवा भवानी धाम, गौरीगंज स्थित दुर्गन भवानी, शमशेरियन भवानी, माता मवई धाम सहित अन्य देवी मंदिरों को रंग रोगन के साथ सजा संवार कर नवरात्र के लिए तैयार किया गया है। कालिकन धाम के पुजारी अभिषेक शास्त्री ने बताया कि वाराणसी से मंगाए गए 2.5 क्विंटल फूलों से धाम को सजाया जा रहा है। 18 सीसीटीवी कैमरे धाम में लगाए गए हैं। इसके अलावा छह एलईडी टीवी पर गर्भगृह का प्रसारण किया जाएगा।
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अहोरवा भवानी धाम में गर्भगृह और मुख्य द्वार की पेंटिंग का काम बुधवार शाम तक होता रहा। सभी देवी मंदिरों के आसपास पूजा सामग्री की दुकानें भी लगनी शुरू हो गईं। मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में महिलाएं मां की मूर्तियां, शृंगार व पूजा से संबंधित बिछिया, चूड़ी, बिंदी, मेहंदी, महावर, चुनरी, नए वस्त्र और आभूषण की खरीदारी करती मिलीं।
मंदिरों में शंख व घंटों की होगी गूंज
नवरात्र के पहले दिन शैलपुत्री की पूजा होगी। बृहस्पतिवार सुबह से देवी मंदिरों में आस्था का सैलाब उमड़ेगा। मंदिर कमेटियां भी स्थानीय प्रशासन के साथ श्रद्धालुओं को दर्शन की व्यवस्था बनाने में जुटी हैं। कालिकन धाम के पीठाधीश्वर श्री महाराज ने बताया कि सुबह 6:52 बजे के बाद से पूरे दिन कलश स्थापना की जा सकती है।
पाषाण रूप में प्रकट हुईं मां कालिका
संग्रामपुर। कालिकन धाम सरयू और गंगा नदियों के मध्य स्थित एक प्राचीन धार्मिक स्थल है, जिसे महर्षि च्यवन की तपोस्थली माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यहां महर्षि च्यवन ने कठोर तप किया। वह अश्विनी कुमारों के निर्मित दिव्य रसायन से पुनः युवा हुए थे। यहीं पर महर्षि च्यवन का विवाह सुकन्या से हुआ। च्यवनप्राश का आविष्कार भी इसी स्थल से जुड़ा माना जाता है। सोम यज्ञ के दौरान देवताओं और महर्षि के आह्वान पर मां कालिका अमृत कुंड की रक्षा के लिए पाषाण रूप में प्रकट हुईं। तब से यह धाम श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है।
अद्भुत है मां अहोरवा भवानी की महिमा
सिंहपुर। मां अहोरवा भवानी धाम की मान्यता है कि महाभारत काल में पांडव अज्ञातवास के दौरान यहां रुके और अर्जुन ने आखेट के दौरान देवी के दर्शन किए। पांडवों ने आखेट के दौरान माता के चरणों में पूजा की, इसलिए देवी का नाम अहोरवा देवी पड़ा। ऐसी कहा जाता है कि माता अहोरवा की प्राकृतिक मूर्ति दिन में तीन रूप बदलकर भक्तों को दर्शन देती हैं।