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Amroha News: 27 साल पहले नौगावां में शिया-सुन्नी के बीच टकराव में थाने में गरजीं थी गोलियां, दो की हुई मौत

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 25 Jan 2026 02:02 AM IST
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27 years ago, gunfire erupted in a Shia-Sunni clash in Naugawan, killing two.
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अमरोहा। नौगावां सादात में 17 अगस्त 1989 की वो खौफनाक दिन... टेंपो स्टैंड को लेकर शिया-सुन्नी पक्ष में टकराव। थाने में बुलाकर दोनों पक्षों को समझाने का पुलिस का इरादा और फिर हिंसा। यह तारीख आज भी नौगांवा सादात के लोग भूल नहीं पा रहे हैं। टकराव ऐसा लोगों के निशाने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी। समझौते के लिए बुलाए गए एक पक्ष के हजारों लोगों की भीड़ ने हमला कर दिया। थाने में ही हिंसा हुई। गोलियां चलीं, जिसमें शिया पक्ष के अंसार हैदर और सरताज की हत्या हो गई।
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पुलिस और प्रशासनिक गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई और पथराव हुआ। दरोगा की सर्विस रिवॉल्वर छीन ली गई। इस मामले में हजारों के खिलाफ दो प्राथमिकी दर्ज की गईं और तत्कालीन चेयरमैन समेत करीब 65 लोगों को आरोपी बनाया गया। प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है। अब इस मामले में 27 जनवरी को सुनवाई होगी।
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शासकीय अधिवक्ता रविंद्र गर्ग ने बताया कि यह सनसनीखेज घटना नौगांवा सादात थाने से जुड़ी है। 1989 के दौर में नौगावां सादात बड़ी संख्या में टेंपो चलते थे। टेंपो स्टैंड को लेकर शिया और सुन्नी पक्ष के लोगों में विवाद चल रहा था। शिया समुदाय के लोगों ने टेंपो स्टैंड को नई बस्ती से हटकर मोहल्ला बुध बाजार में कर लिया था। जबकि, इसका विरोध सुन्नी गुट के लोग कर रहे थे।
17 अगस्त 1989 की सुबह शिया गुट के टेंपो चालकों व सेक्रेटरी से थाने में बुलाकर बातचीत की गई और सुन्नी पक्ष के द्वारा दिए गए सुझावों को उनके सामने रखा। लेकिन, शिया समुदाय के लोग यह कहकर वहां से चले गए की अन्य चालकों से बात करके बताया जाएगा। बाद में शिया समुदाय ने अपने टेंपो राधा बीड़ी कंपनी के घर के आसपास खड़े कर दिए। इस दौरान थाने पर मो. कासिम द्वारा मारपीट के आरोप में चार अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
पुलिस की जांच में सामने आया कि यह मारपीट का मामला भी टेंपो स्टैंड से जुड़ा हुआ है। पुलिस कार्रवाई के लिए मोहल्ला नई बस्ती पहुंची तो यहां करीब ढाई से तीन लोग वहां खड़े हुए थे और पुलिस को देखकर शोर मचा दिया। भीड़ की उग्रता को देखते हुए थानाध्यक्ष भगत सिंह मोतला ने अपनी फोर्स के साथ में वापस लौटना उचित समझा। इसके बाद थानाध्यक्ष ने घटना के बारे में उच्चाधिकारियों को बताया। सुरक्षा के लिहाज से अतिरिक्त पुलिस फोर्स बुला लिया गया। दोपहर के समय मजिस्ट्रेट हीरालाल और अमरोहा सीओ एआर टमटा भी थाने पहुंच गए। अफसर के निर्देश पर तत्कालीन दरोगा योगेंद्र सिंह यादव शिया और सुन्नी दोनों पक्षों को बुलाने के लिए राधा बीड़ी कंपनी के पास गए थे।
लिहाजा, शिया गुट के लोगों को शोहरत थाने लेकर पहुंच रहे हैं। पुलिस ने सुन्नी पक्ष के लोगों को बुला लिया। फिलहाल, सभी आरोपी जमानत पर बाहर है। इनमें से करीब चार आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है। इस हाई प्रोफाइल मामले में तब से अब तक सुनवाई चल रही है। पुलिस की तरफ से प्राथमिकी दर्ज करने वाले थानाध्यक्ष के बयान दर्ज हो चुके हैं। अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 जनवरी को होगी।
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...जब पहुंच गई थी शिया पक्ष के पांच-छह हजार लोगों की भीड़
दोपहर में करीब एक शिया समुदाय के मोहर्रम अली उर्फ शोहरत और मुंशी हकीम के नेतृत्व में करीब पांच से छह हजार लोग जुलूस की शक्ल में थाने के पास बनी टंकी के चक्कर लगाते हुए सड़क पर खड़े हो गए। जैसे ही सुन्नी पक्ष के जिम्मेदार लोग थाने के अंदर घुसे, तभी शिया समुदाय के लोगों की भीड़ पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए थाने की तरफ बढ़ने लगी और सुन्नी समुदाय के लोगों को मारुति कार के भीतर से खींचकर मारपीट शुरू कर दी। इसके बाद थाने में पथराव हुआ। उग्र बवालियों पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के वाहन तोड़ दिए। दरोगा की सर्विस रिवाल्वर छीन लिया।
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एसडीएम-सीओ ने दिया था लाठीचार्ज का आदेश
बवाल बढ़ता देख एसडीएम और सीओ ने लाठी चार्ज करने का आदेश दिया तो भीड़ ने पुलिस पर जान से मारने की नीयत से फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने भी भीड़ पर को पाने के लिए अपनी आत्मरक्षा में दो राउंड फायरिंग की, जबकि पीएसी के जवानों ने चार राउंड फायरिंग की थी। इस दौरान गोली लगने घायल हुए दो लोगों की मौत हो गई थी।
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सरताज के हाथ से बरामद हुई थी दरोगा से छीनी रिवाल्वर
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक घायल सरताज के हाथ में दरोगा से छीनी सरकारी रिवाल्वर बरामद हुई थी। इसके अलावा अंसार हैदर से भी 12 बोर का तमंचा बरामद हुआ था। जबकि अली हैदर से भी 315 बोर की राइफल बरामद हुई थी। इस बवाल में घायल अंसार हैदर और सरताज की मौत हो गई थी। इस मामले में पुलिस की तरफ से नौगावां सादात के तत्कालीन चेयरमैन मौजिज हुसैन, मुस्तफा हैदर, सरताज, अंसार हैदर, अली हैदर, शाह रजा, सैयद अली हैदर, असगर रजा व अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। एक प्राथमिकी सुन्नी पक्ष के लाओ जी बीड़ी कंपनी के मालिक हाजी नूर अहमद की अज्ञात हजारों की भीड़ पर दर्ज की गई थी।
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प्राथमिकी हजारों पर, 65 लोग बनाए गए आरोपी
शिया समुदाय के तत्कलीन चेयरमैन चेयरमैन मौजिज हुसैन समेत आठ नामजद समेज समेत हजारों अज्ञाज के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थीं। पुलिस ने विवेचना की और करीब 65 लोगों को आरोपी बनाया था।
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बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी हुए थे घायल
थाने पर हुई किसी हिंसा में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी घायल हुए थे। जबकि सुन्नी पक्ष के अलावा या शिया समुदाय के लोग भी घायल हुए थे।
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पुलिस पर दर्ज हुई थी हत्या की प्राथमिकी
शासकीय अधिवक्ता रविंद्र गर्ग ने बताया कि थाने पर हिंसा के दौरान आमने-सामने की फायरिंग में शिया पक्ष के अंसार हैदर और सरताज लोगों की हत्या हो गई थी। पुलिस और सुन्नी पक्ष की ओर से शिया समुदाय के लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। लेकिन, बाद में शिया पक्ष की ओर से भी पुलिस के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज की गई थी। हालांकि, विवेचना के दौरान पुलिस ने इस प्राथमिकी में अंतिम रिपोर्ट लगाई थी।
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