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Amroha News: बाढ़ से लाखों का नुकसान... मुआवजा ऊंट के मुंह में जीरे के समान
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मंडी धनौरा। साल दर साल बाढ़ की विभीषका में अपनी फसल को खो देने वाले हजारों किसानों को सरकार की ओर से मुआवजे के नाम पर दी जाने वाली राशि उनके लिए ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। मुआवजे के तौर पर मिलने वाली धनराशि से किसानों में बेहद रोष है। किसानों का कहना है कि सरकार लाखों रुपये के नुकसान के बदले मात्र कुछ हजार रुपये देकर उनके साथ मजाक कर रही है। बाढ़ में फसल नष्ट होने से बैंकों का कर्जा बढ़ता ही जा रहा है। सरकार को किसानों की इस दुर्दशा पर ध्यान देना चाहिए।
खादर क्षेत्र के करीब एक दर्जन से अधिक गांवों के लोग बरसात के मौसम में हर साल बाढ़ का दंश झेलते हैं। इनमें पपसरी खादर, मोहसनपुर, रसूलपुर भांवर, सीपीया फार्म, पहाड़पुर, शाहजहांपुर, मुकारमपुर, रमपुरा खादर, पटटी खादर, इब्राहीमपुर, झुंडपुरा, आजमपुर, चांदरा फार्म, विसावली, शीशोवाली आदि गांव शामिल हैं। तटबंध नहीं होने की वजह से बाढ़ का पानी फसलों को नष्ट कर देता है। साल 2025 में आई बाढ़ की विभीषका में फसलों को बहुत नुकसान हुआ है।
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गांव इब्राहीमपुर निवासी होशियारी देवी का कहना है कि बाढ़ में 40 बीघा भूमि पर खड़ी गन्ने व धान की फसल क्षतिग्रस्त हो गई है। सरकार की ओर से मुआवजे के नाम पर मात्र 2000 रुपये मिले हैं। यह उनके साथ मजाक है। उनका कहना था कि सरकार को मुआवजा वास्तविकता के आधार पर देना चाहिए।
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पूर्व प्रधान सुमरती देवी का कहना है कि उसकी 20 बीघा भूमि पर खड़ी गन्ने की फसल बाढ़ की भेंंट चढ़ गई। उसके खाते में मुआवजे के नाम पर 5472 रुपये आए हैं। इतनी धनराशि से खेत की जुताई भी नहीं हो पाएगी। क्या शासन व प्रशासन को कृषि की जमीनी हकीकत भी नहीं पता है।
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ग्राम चांदरा फार्म निवासी विधा कौर का मुआवजे के नाम पर सरकार सिर्फ खानापूरी कर रही है। हर साल बाढ़ में उनकी फसल नष्ट हो जाती है। बैंकों का कर्जा बढ़ता ही जा रहा है। सरकार को बाढ़ की विभीषका से बचाने के लिए तटबंध बनवाए।
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ग्राम रसूलपुर भांवर के निवासी टीटू सरकार का कहना है कि बाढ़ से नष्ट हुई फसल का क्षेत्र के करीब 90 प्रतिशत लोगों को मुआवजा नहीं मिला है। उनको अभी तक मुआवजे के नाम पर एक धेला भी नहीं मिला है। मुआवजे का आकलन करते समय सरकार को व्यवहारिक रवैया अपनाना होगा।
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खादर क्षेत्र के करीब एक दर्जन से अधिक गांवों के लोग बरसात के मौसम में हर साल बाढ़ का दंश झेलते हैं। इनमें पपसरी खादर, मोहसनपुर, रसूलपुर भांवर, सीपीया फार्म, पहाड़पुर, शाहजहांपुर, मुकारमपुर, रमपुरा खादर, पटटी खादर, इब्राहीमपुर, झुंडपुरा, आजमपुर, चांदरा फार्म, विसावली, शीशोवाली आदि गांव शामिल हैं। तटबंध नहीं होने की वजह से बाढ़ का पानी फसलों को नष्ट कर देता है। साल 2025 में आई बाढ़ की विभीषका में फसलों को बहुत नुकसान हुआ है।
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गांव इब्राहीमपुर निवासी होशियारी देवी का कहना है कि बाढ़ में 40 बीघा भूमि पर खड़ी गन्ने व धान की फसल क्षतिग्रस्त हो गई है। सरकार की ओर से मुआवजे के नाम पर मात्र 2000 रुपये मिले हैं। यह उनके साथ मजाक है। उनका कहना था कि सरकार को मुआवजा वास्तविकता के आधार पर देना चाहिए।
पूर्व प्रधान सुमरती देवी का कहना है कि उसकी 20 बीघा भूमि पर खड़ी गन्ने की फसल बाढ़ की भेंंट चढ़ गई। उसके खाते में मुआवजे के नाम पर 5472 रुपये आए हैं। इतनी धनराशि से खेत की जुताई भी नहीं हो पाएगी। क्या शासन व प्रशासन को कृषि की जमीनी हकीकत भी नहीं पता है।
ग्राम चांदरा फार्म निवासी विधा कौर का मुआवजे के नाम पर सरकार सिर्फ खानापूरी कर रही है। हर साल बाढ़ में उनकी फसल नष्ट हो जाती है। बैंकों का कर्जा बढ़ता ही जा रहा है। सरकार को बाढ़ की विभीषका से बचाने के लिए तटबंध बनवाए।
ग्राम रसूलपुर भांवर के निवासी टीटू सरकार का कहना है कि बाढ़ से नष्ट हुई फसल का क्षेत्र के करीब 90 प्रतिशत लोगों को मुआवजा नहीं मिला है। उनको अभी तक मुआवजे के नाम पर एक धेला भी नहीं मिला है। मुआवजे का आकलन करते समय सरकार को व्यवहारिक रवैया अपनाना होगा।
