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Amroha News: अब 60 के बजाय 30 मीटर चौड़ी होगी मध्य गंगा नहर
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अमरोहा। तीन साल से आंदोलन कर रहे कूबी, मोहनपुर और रामपुर घना व घंसूरपुर के साढ़े तीन सौ किसानों की मांग आखिरकार प्रशासन को माननी पड़ी। तीन गांवों के जंगल में 60 की बजाय 30 मीटर चौड़ी नहर बनाएगा। इसके लिए रविवार से जमीन का चिह्नांकन फिर शुरू होगा।
किसान चार गुना मुआवजा या 60 मीटर नहर की जमीन में से 30 मीटर वापस करने की मांग कर रहे थे। इसको लेकर कई बार किसान और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बनी थी। शनिवार को करीब चार घंटे किसान और अधिकारियों के बीच चली वार्ता में पांच बिंदुओं पर सहमति बनी है। इसके लिए दोनों पक्षों के बीच लिखित समझौता हुआ है। सिंचाई विभाग तीन गांवों के जंगल में 60 की बजाय 30 मीटर चौड़ी नहर बनाएगा। जबकि किसानों को 30 मीटर चौड़ी भूमि वापस की जाएगी। सहमति के आधार पर रविवार से विभाग 30 मीटर चौड़ी नहर का चिह्नांकन करेगा। जबकि किसानों का धरना अधिकारियों के मौके पर पहुंचने और बिंदुओं की घोषणा करने पर खत्म किया जाएगा।
शनिवार को कलक्ट्रेट सभागार में डीएम निधि गुप्ता वत्स के नेतृत्व में वार्ता शुरू की गई। इस दौरान मध्य गंगा नहर निर्माण के मुख्य अभियंता, अधिशासी अभियंता और किसान चंद्रपाल सिंह, रामपाल सिंह, मुकेश कुमार, किसान मोईन खान, गुरुदेव और हनी सिंह मौजूद रहे। कूबी गांव संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष मायाराम सिंह और भाकियू टिकैत के प्रदेश उपाध्यक्ष दानवीर सिंह ने बताया कि वार्ता के दौरान पांच बिंदुओं में सहमति बनी हैं।
इसमें नहर का निर्माण 60 मीटर के स्थान पर 30 मीटर में चौड़ाई में किया जाएगा। नहर निर्माण के पश्चात अवशेष 30 मीटर चौड़ाई की भूमि की वापसी की पत्रावली का संचालन कर दिया जाएगा। नहर के दोनों ओर पांच-पांच मीटर की चौड़ाई में कच्चा रास्ता बनाया जाएगा। दोनों रास्तों पर पक्की सड़क बनाने का प्रस्ताव नहर बनने के पश्चात उच्चस्तर को भेजा जाएगा। इस बीच आवश्यकतानुसार वीआरबी एवं गूल कांसिग का निर्माण कार्य कराया जाएगा।
किसान नहर निर्माण कार्य पूर्ण करने में सहयोग करेंगे, साथ ही नहर निर्माण के कार्य में किसान कोई अवरोध या विघ्न नहीं करेंगे। मालूम रहे कि 10 जनवरी को हुई वार्ता के दौरान भी प्रशासन ने मौखिक रूप से किसानों की बात मान ली थीं, लेकिन शनिवार को दोनों पक्षों की शर्तों का लिखित समझौता हुआ है।
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किसान चार गुना मुआवजा या 60 मीटर नहर की जमीन में से 30 मीटर वापस करने की मांग कर रहे थे। इसको लेकर कई बार किसान और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बनी थी। शनिवार को करीब चार घंटे किसान और अधिकारियों के बीच चली वार्ता में पांच बिंदुओं पर सहमति बनी है। इसके लिए दोनों पक्षों के बीच लिखित समझौता हुआ है। सिंचाई विभाग तीन गांवों के जंगल में 60 की बजाय 30 मीटर चौड़ी नहर बनाएगा। जबकि किसानों को 30 मीटर चौड़ी भूमि वापस की जाएगी। सहमति के आधार पर रविवार से विभाग 30 मीटर चौड़ी नहर का चिह्नांकन करेगा। जबकि किसानों का धरना अधिकारियों के मौके पर पहुंचने और बिंदुओं की घोषणा करने पर खत्म किया जाएगा।
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शनिवार को कलक्ट्रेट सभागार में डीएम निधि गुप्ता वत्स के नेतृत्व में वार्ता शुरू की गई। इस दौरान मध्य गंगा नहर निर्माण के मुख्य अभियंता, अधिशासी अभियंता और किसान चंद्रपाल सिंह, रामपाल सिंह, मुकेश कुमार, किसान मोईन खान, गुरुदेव और हनी सिंह मौजूद रहे। कूबी गांव संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष मायाराम सिंह और भाकियू टिकैत के प्रदेश उपाध्यक्ष दानवीर सिंह ने बताया कि वार्ता के दौरान पांच बिंदुओं में सहमति बनी हैं।
इसमें नहर का निर्माण 60 मीटर के स्थान पर 30 मीटर में चौड़ाई में किया जाएगा। नहर निर्माण के पश्चात अवशेष 30 मीटर चौड़ाई की भूमि की वापसी की पत्रावली का संचालन कर दिया जाएगा। नहर के दोनों ओर पांच-पांच मीटर की चौड़ाई में कच्चा रास्ता बनाया जाएगा। दोनों रास्तों पर पक्की सड़क बनाने का प्रस्ताव नहर बनने के पश्चात उच्चस्तर को भेजा जाएगा। इस बीच आवश्यकतानुसार वीआरबी एवं गूल कांसिग का निर्माण कार्य कराया जाएगा।
किसान नहर निर्माण कार्य पूर्ण करने में सहयोग करेंगे, साथ ही नहर निर्माण के कार्य में किसान कोई अवरोध या विघ्न नहीं करेंगे। मालूम रहे कि 10 जनवरी को हुई वार्ता के दौरान भी प्रशासन ने मौखिक रूप से किसानों की बात मान ली थीं, लेकिन शनिवार को दोनों पक्षों की शर्तों का लिखित समझौता हुआ है।
