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Amroha News: गैर इरादतन हत्या में दो सगे भाइयों को 10-10 साल की कैद
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अमरोहा। दस साल पुराने गैर इरादतन हत्या के मामले में अदालत ने दो सगे भाइयों को 10-10 साल की सजा सुनाई। दोनों दोषियों पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। फैसला सुनाए जाने के बाद जमानत पर चल रहे दोनों भाइयों को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया है।
यह घटना मंडी धनौरा थानाक्षेत्र के गांव नांदनौर माफी में हुई थी। नौ मई 2016 को किसान राजवीर सिंह के बेटे रवि का गांव के ही सगे भाई गोपी और राजाराम से विवाद हो गया था। झगड़े के दौरान हुए हमले में रवि गंभीर रूप से घायल हो गया था। परिजन उसे अमरोहा शहर के गुलड़िया रोड स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां उपचार के दौरान 10 मई 2016 को उसकी मौत हो गई थी।
घटना के बाद मृतक के पिता राजवीर सिंह की तहरीर पर मंडी धनौरा पुलिस ने गोपी और राजाराम के खिलाफ गैर इरादतन हत्या की प्राथमिकी दर्ज की थी। बाद में पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया था। फिलहाल दोनों भाई जमानत पर बाहर थे। विवेचना के दौरान पुलिस ने साक्ष्य जुटाकर अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था। मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय की अदालत में चल रही थी। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता संजीव चौधरी ने प्रभावी पैरवी की।
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बुधवार को अंतिम सुनवाई के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर गोपी और राजाराम को गैर इरादतन हत्या का दोषी करार दिया। साथ ही दोनों को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई और 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
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यह घटना मंडी धनौरा थानाक्षेत्र के गांव नांदनौर माफी में हुई थी। नौ मई 2016 को किसान राजवीर सिंह के बेटे रवि का गांव के ही सगे भाई गोपी और राजाराम से विवाद हो गया था। झगड़े के दौरान हुए हमले में रवि गंभीर रूप से घायल हो गया था। परिजन उसे अमरोहा शहर के गुलड़िया रोड स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां उपचार के दौरान 10 मई 2016 को उसकी मौत हो गई थी।
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घटना के बाद मृतक के पिता राजवीर सिंह की तहरीर पर मंडी धनौरा पुलिस ने गोपी और राजाराम के खिलाफ गैर इरादतन हत्या की प्राथमिकी दर्ज की थी। बाद में पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया था। फिलहाल दोनों भाई जमानत पर बाहर थे। विवेचना के दौरान पुलिस ने साक्ष्य जुटाकर अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था। मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय की अदालत में चल रही थी। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता संजीव चौधरी ने प्रभावी पैरवी की।
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बुधवार को अंतिम सुनवाई के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर गोपी और राजाराम को गैर इरादतन हत्या का दोषी करार दिया। साथ ही दोनों को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई और 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।