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Auraiya News: गैस एजेंसी संचालकों की मनमानी, रसीद 939 की, वसूल रहे 1130 रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Tue, 17 Mar 2026 11:06 PM IST
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फोटो-20-मंफूल।
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औरैया। जिले में रसोई गैस सिलिंडर वितरण व्यवस्था इन दिनों पूरी तरह अव्यवस्थित हो गई है। लोग सिलिंडर की किल्लत से जूझ रहे हैं।
वहीं, गैस एजेंसियों की मनमानी ने उपभोक्ताओं की परेशानी को और बढ़ा दिया है। हालात यह हैं कि उपभोक्ताओं को 939 रुपये की पर्ची दी जा रही है, लेकिन एजेंसियों पर उनसे 1130 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। यह अतिरिक्त वसूली सिलिंडर के साथ पाइप खरीदने के नाम पर की जा रही है, जबकि ऐसा कोई नियम नहीं है।
जिले में 26 गैस एजेंसियां हैं। सुबह होते ही जिले की अधिकांश गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लग जाती हैं। महिलाएं, बुजुर्ग और नौकरीपेशा लोग अपनी बारी का इंतजार करने के लिए घंटों खड़े रहते हैं। कई उपभोक्ता तो सुबह से दोपहर तक लाइन में लगे रहते हैं, इसके बावजूद उन्हें सिलिंडर नहीं मिल पाता। कहीं स्टॉक खत्म होने का हवाला दिया जाता है तो कहीं अतिरिक्त पैसे की मांग पूरी न करने पर उन्हें टाल दिया जाता है।
उपभोक्ताओं का कहना है कि एजेंसी संचालक सिलिंडर के साथ पाइप लेना अनिवार्य बता रहे हैं। मना करने पर या निर्धारित से अधिक पैसे देने से इन्कार करने पर सिलिंडर देने से मना कर दिया जाता है। मजबूरी में कई लोग अतिरिक्त रकम देकर सिलिंडर ले रहे हैं। जिन उपभोक्ताओं के पास केवल पर्ची में लिखी रकम ही होती है, उन्हें निराश होकर खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
एजेंसी संचालक इस पूरे मामले में ऊपर से दबाव होने का हवाला देकर खुद को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उपभोक्ताओं का आरोप है कि यह केवल अवैध वसूली का एक जरिया बन गया है। पाइप की जरूरत न होने के बावजूद उसे जबरन थमाया जा रहा है और उसकी कीमत सिलिंडर के साथ जोड़ दी जाती है।
जिले में कुल 26 गैस एजेंसियां संचालित हैं, इसके बावजूद वितरण व्यवस्था पर किसी प्रकार की प्रभावी निगरानी नजर नहीं आ रही। एजेंसियों के बाहर अव्यवस्था, धक्का-मुक्की और विवाद की स्थिति आम हो गई है। कई स्थानों पर उपभोक्ताओं और कर्मचारियों के बीच कहासुनी तक की नौबत आ रही है, लेकिन मौके पर जिम्मेदार अधिकारियों की मौजूदगी न के बराबर है।
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लोग बोले-26 एजेंसियों पर निगरानी के लिए लगाए जाएं 26 अधिकारी
उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि एजेंसियों पर नियमित निगरानी और जांच हो, तो इस तरह की मनमानी पर रोक लगाई जा सकती है। वहीं, पारदर्शी वितरण व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए टोकन सिस्टम या पुलिस-प्रशासन की निगरानी जरूरी हो गई है। लोगों का कहना है कि जब जिले में 26 एजेंसियां हैं, तो क्या प्रशासन के पास इतने अधिकारी भी नहीं हैं जिन्हें इन एजेंसियों पर तैनात कर व्यवस्था को सुचारु बनाया जा सके। बेहतर हो कि 26 एजेंसियों पर 26 अधिकारी (प्रत्येक में एक) तैनात किए जाएं।
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एक-दूसरे के पाले में डाली जा रही गेंद
जिला पूर्ति विभाग व सेल्स ऑफिसर अव्यवस्था को लेकर एक-दूसरे के पाले में गेंद फेंकते नजर आ रहे हैं। विभाग के अनुसार वितरण से संबंधित पूरा ब्योरा सेल्स ऑफिसर के पास होता है। विभाग उनकी जिम्मेदारी बताता है तो सेल्स ऑफिसर यहां बैठते नहीं। उनके संपर्क करना भी आसान नहीं।
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1130 रुपये मांगे
सिलिंडर लेने आए तो रसीद 939 की काटी लेकिन 1130 रुपये मांगे गए। पूछने पर बताया कि पाइप भी लेना पड़ेगा, तभी सिलिंडर मिलेगा। पाइप की जरूरत नहीं है, लेकिन लेना पड़ेगा।
- मंफूल, बेला
परेशान किया जा रहा
जितने की रसीद काटी जा रही है, उतने में सिलिंडर नहीं दिया जा रहा। ज्यादा पैसे मांगे जा रहे हैं। सिलिंडर न मिलने से परेशानी है। लोगों को और परेशान किया जा रहा।
- विपुल कुमार, बेला
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गैस सिलिंडर पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। ओटीपी की वजह से कुछ दिक्कत आ रही है। कालाबाजारी या उपभोक्तओं से ज्यादा पैसे न वसूले जाएं, इसके लिए टीमें बनाई गई हैं।
- राजेश सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी
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वहीं, गैस एजेंसियों की मनमानी ने उपभोक्ताओं की परेशानी को और बढ़ा दिया है। हालात यह हैं कि उपभोक्ताओं को 939 रुपये की पर्ची दी जा रही है, लेकिन एजेंसियों पर उनसे 1130 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। यह अतिरिक्त वसूली सिलिंडर के साथ पाइप खरीदने के नाम पर की जा रही है, जबकि ऐसा कोई नियम नहीं है।
जिले में 26 गैस एजेंसियां हैं। सुबह होते ही जिले की अधिकांश गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लग जाती हैं। महिलाएं, बुजुर्ग और नौकरीपेशा लोग अपनी बारी का इंतजार करने के लिए घंटों खड़े रहते हैं। कई उपभोक्ता तो सुबह से दोपहर तक लाइन में लगे रहते हैं, इसके बावजूद उन्हें सिलिंडर नहीं मिल पाता। कहीं स्टॉक खत्म होने का हवाला दिया जाता है तो कहीं अतिरिक्त पैसे की मांग पूरी न करने पर उन्हें टाल दिया जाता है।
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उपभोक्ताओं का कहना है कि एजेंसी संचालक सिलिंडर के साथ पाइप लेना अनिवार्य बता रहे हैं। मना करने पर या निर्धारित से अधिक पैसे देने से इन्कार करने पर सिलिंडर देने से मना कर दिया जाता है। मजबूरी में कई लोग अतिरिक्त रकम देकर सिलिंडर ले रहे हैं। जिन उपभोक्ताओं के पास केवल पर्ची में लिखी रकम ही होती है, उन्हें निराश होकर खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
एजेंसी संचालक इस पूरे मामले में ऊपर से दबाव होने का हवाला देकर खुद को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उपभोक्ताओं का आरोप है कि यह केवल अवैध वसूली का एक जरिया बन गया है। पाइप की जरूरत न होने के बावजूद उसे जबरन थमाया जा रहा है और उसकी कीमत सिलिंडर के साथ जोड़ दी जाती है।
जिले में कुल 26 गैस एजेंसियां संचालित हैं, इसके बावजूद वितरण व्यवस्था पर किसी प्रकार की प्रभावी निगरानी नजर नहीं आ रही। एजेंसियों के बाहर अव्यवस्था, धक्का-मुक्की और विवाद की स्थिति आम हो गई है। कई स्थानों पर उपभोक्ताओं और कर्मचारियों के बीच कहासुनी तक की नौबत आ रही है, लेकिन मौके पर जिम्मेदार अधिकारियों की मौजूदगी न के बराबर है।
लोग बोले-26 एजेंसियों पर निगरानी के लिए लगाए जाएं 26 अधिकारी
उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि एजेंसियों पर नियमित निगरानी और जांच हो, तो इस तरह की मनमानी पर रोक लगाई जा सकती है। वहीं, पारदर्शी वितरण व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए टोकन सिस्टम या पुलिस-प्रशासन की निगरानी जरूरी हो गई है। लोगों का कहना है कि जब जिले में 26 एजेंसियां हैं, तो क्या प्रशासन के पास इतने अधिकारी भी नहीं हैं जिन्हें इन एजेंसियों पर तैनात कर व्यवस्था को सुचारु बनाया जा सके। बेहतर हो कि 26 एजेंसियों पर 26 अधिकारी (प्रत्येक में एक) तैनात किए जाएं।
एक-दूसरे के पाले में डाली जा रही गेंद
जिला पूर्ति विभाग व सेल्स ऑफिसर अव्यवस्था को लेकर एक-दूसरे के पाले में गेंद फेंकते नजर आ रहे हैं। विभाग के अनुसार वितरण से संबंधित पूरा ब्योरा सेल्स ऑफिसर के पास होता है। विभाग उनकी जिम्मेदारी बताता है तो सेल्स ऑफिसर यहां बैठते नहीं। उनके संपर्क करना भी आसान नहीं।
1130 रुपये मांगे
सिलिंडर लेने आए तो रसीद 939 की काटी लेकिन 1130 रुपये मांगे गए। पूछने पर बताया कि पाइप भी लेना पड़ेगा, तभी सिलिंडर मिलेगा। पाइप की जरूरत नहीं है, लेकिन लेना पड़ेगा।
- मंफूल, बेला
परेशान किया जा रहा
जितने की रसीद काटी जा रही है, उतने में सिलिंडर नहीं दिया जा रहा। ज्यादा पैसे मांगे जा रहे हैं। सिलिंडर न मिलने से परेशानी है। लोगों को और परेशान किया जा रहा।
- विपुल कुमार, बेला
गैस सिलिंडर पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। ओटीपी की वजह से कुछ दिक्कत आ रही है। कालाबाजारी या उपभोक्तओं से ज्यादा पैसे न वसूले जाएं, इसके लिए टीमें बनाई गई हैं।
- राजेश सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी

फोटो-20-मंफूल।