{"_id":"69b5a429e258f269f90a0091","slug":"parwaha-village-is-free-from-lpg-crisis-cooking-food-in-every-house-using-cow-dung-gas-auraiya-news-c-211-1-aur1006-141260-2026-03-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Auraiya News: एलपीजी संकट से दूर परवाहा गांव, घर-घर गोबर गैस में बन रहा खाना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Auraiya News: एलपीजी संकट से दूर परवाहा गांव, घर-घर गोबर गैस में बन रहा खाना
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Sat, 14 Mar 2026 11:38 PM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
दिबियापुर (औरैया)। इन दिनों घरेलू गैस सिलिंडर के लिए लोगों को काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। वहीं, भाग्यनगर ब्लॉक के गांव परवाहा के लोग एलपीजी गैस के संकट से दूर हैं। ग्रामीण पिछले 10 सालों से गोबर गैस की आंच पर भोजन पका रहे हैं।
गांव परवाहा में करीब 60 परिवार रहते हैं। इनमें से 30 से ज्यादा घरों में गोबर गैस के संयंत्र लगे हुए हैं। हर घर में कई मवेशी हैं। पशुपालन के साथ ही गोबर गैस के संयंत्र ने ग्रामीणों का रसोई गैस का खर्च शून्य कर दिया है। परवाहा के ग्रामीण पिछले 10 सालों से इन संयंत्रों का प्रयोग करते हुए घरों में अपना भोजन पका रहे हैं। प्रत्येक घर के बाहर गोबर गैस का संयंत्र लगा हुआ है। संयंत्र से लेकर घर के अंदर रसोईघर तक पाइपलाइन बिछी हुई है। दोनों पहर का भोजन गोबर गैस पर ही पक रहा है।
यहां सुबह-शाम ग्रामीण मवेशियों के गोबर में पानी डालकर संयंत्र में डालते हैं। कुछ देर तक लकड़ी से इस संयंत्र को चलाकर गोबर गैस संयंत्र को चालू रखे हुए हैं। ऐसे में घरेलू गैस सिलिंडर को लेकर इन दिनों चल रही भागदौड़ में परवाहा के लोग खुद को चिंतामुक्त महसूस कर रहे हैं। हर माह घरेलू गैस सिलिंडर की खरीद का खर्च भी बच रहा है। यही नहीं संयंत्र से निकलने वाले गोबर का वेस्ट खेत में कंपोस्ट खाद के तौर पर भी किसान प्रयोग कर रहे हैं। गोबर के फायदे को आत्मसात करते हुए परवाहा के लोग ऊर्जा क्षेत्र के लिए मॉडल पेश कर रहे हैं। (संवाद)
-- --
क्या बोले ग्रामीण
पहली बार लगा था बड़े पैमाने पर गोबर
10 साल पहले जब गोबर गैस का संयंत्र बनाकर शुरू किया था। तब एक ट्रॉली गोबर की जरूरत पड़ी थी। अब रोजाना मवेशियों का गोबर संयंत्र में डालकर काम चल रहा है। गैस सिलिंडर की जरूरत ही नहीं है।-राम आसरे
-- --
कृषि वैज्ञानिकों ने शुरू कराए थे संयंत्र
कृषि विज्ञान ग्वारी की ओर से एक बार गांव में वैज्ञानिक आए थे। उनकी देखरेख में ये संयंत्र बनवाए थे। तब से अब तक गोबर गैस पर ही घर में खाना बनाया जा रहा है।-कुंवर सिंह
-- --
गैस सिलिंडर का बच रहा पैसा
शुरुआती दौर में गैस सिलिंडर का कनेक्शन लिया गया था। लेकिन जब से ये संयंत्र बना तब से सिलिंडर नहीं खरीदा है। घर में बड़े आयोजन होने पर ही सिलिंडर की जरूरत पड़ती है। ऐसे में सिलिंडर का खर्च बच रहा है।- रामसखी
-- --
संयंत्र से निकली कंपोस्ट खेत के लिए लाभदायक
गोबर गैस संयंत्र केवल निशुल्क गैस तक ही सीमित नहीं है। ये गोबर की कंपोस्ट खाद भी देता है। यह खेत के लिए बहुत लाभदायक होती है। फसल का उत्पादन बढ़ता है।-यदुवीर सिंह
Trending Videos
गांव परवाहा में करीब 60 परिवार रहते हैं। इनमें से 30 से ज्यादा घरों में गोबर गैस के संयंत्र लगे हुए हैं। हर घर में कई मवेशी हैं। पशुपालन के साथ ही गोबर गैस के संयंत्र ने ग्रामीणों का रसोई गैस का खर्च शून्य कर दिया है। परवाहा के ग्रामीण पिछले 10 सालों से इन संयंत्रों का प्रयोग करते हुए घरों में अपना भोजन पका रहे हैं। प्रत्येक घर के बाहर गोबर गैस का संयंत्र लगा हुआ है। संयंत्र से लेकर घर के अंदर रसोईघर तक पाइपलाइन बिछी हुई है। दोनों पहर का भोजन गोबर गैस पर ही पक रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
यहां सुबह-शाम ग्रामीण मवेशियों के गोबर में पानी डालकर संयंत्र में डालते हैं। कुछ देर तक लकड़ी से इस संयंत्र को चलाकर गोबर गैस संयंत्र को चालू रखे हुए हैं। ऐसे में घरेलू गैस सिलिंडर को लेकर इन दिनों चल रही भागदौड़ में परवाहा के लोग खुद को चिंतामुक्त महसूस कर रहे हैं। हर माह घरेलू गैस सिलिंडर की खरीद का खर्च भी बच रहा है। यही नहीं संयंत्र से निकलने वाले गोबर का वेस्ट खेत में कंपोस्ट खाद के तौर पर भी किसान प्रयोग कर रहे हैं। गोबर के फायदे को आत्मसात करते हुए परवाहा के लोग ऊर्जा क्षेत्र के लिए मॉडल पेश कर रहे हैं। (संवाद)
क्या बोले ग्रामीण
पहली बार लगा था बड़े पैमाने पर गोबर
10 साल पहले जब गोबर गैस का संयंत्र बनाकर शुरू किया था। तब एक ट्रॉली गोबर की जरूरत पड़ी थी। अब रोजाना मवेशियों का गोबर संयंत्र में डालकर काम चल रहा है। गैस सिलिंडर की जरूरत ही नहीं है।-राम आसरे
कृषि वैज्ञानिकों ने शुरू कराए थे संयंत्र
कृषि विज्ञान ग्वारी की ओर से एक बार गांव में वैज्ञानिक आए थे। उनकी देखरेख में ये संयंत्र बनवाए थे। तब से अब तक गोबर गैस पर ही घर में खाना बनाया जा रहा है।-कुंवर सिंह
गैस सिलिंडर का बच रहा पैसा
शुरुआती दौर में गैस सिलिंडर का कनेक्शन लिया गया था। लेकिन जब से ये संयंत्र बना तब से सिलिंडर नहीं खरीदा है। घर में बड़े आयोजन होने पर ही सिलिंडर की जरूरत पड़ती है। ऐसे में सिलिंडर का खर्च बच रहा है।- रामसखी
संयंत्र से निकली कंपोस्ट खेत के लिए लाभदायक
गोबर गैस संयंत्र केवल निशुल्क गैस तक ही सीमित नहीं है। ये गोबर की कंपोस्ट खाद भी देता है। यह खेत के लिए बहुत लाभदायक होती है। फसल का उत्पादन बढ़ता है।-यदुवीर सिंह