आजमगढ़। प्रदेश सरकार की ओर से वेटलैंड (आर्द्रभूमि) संरक्षण और जैव विविधता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से शुरू की गई महत्वाकांक्षी योजना ‘वन डिस्ट्रिक्ट–वन वेटलैंड’ के तहत आजमगढ़ के प्रसिद्ध सलोना ताल को शामिल किए जाने की तैयारी है। इस पहल के तहत सलोना ताल को चिह्नित किए जाने से इसके संरक्षण और संवर्धन की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकेंगे।
282.85 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला सलोना ताल जिले के प्रमुख जलस्रोतों में से एक है। यह ताल वर्षों से देश-विदेश से आने वाले प्रवासी पक्षियों का प्रमुख ठिकाना रहा है। योजना में शामिल होने के बाद ताल की सीमांकन, गाद निकासी, जलधारण क्षमता बढ़ाने और अतिक्रमण रोकने जैसे कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही वैज्ञानिक पद्धति से वेटलैंड प्रबंधन कर इसके प्राकृतिक स्वरूप को सुरक्षित रखा जाएगा। इस योजना से जैव विविधता संरक्षण को बड़ा लाभ मिलेगा। विदेशी व स्थानीय पक्षियों को सुरक्षित और अनुकूल वातावरण मिलेगा, इससे उनकी संख्या में वृद्धि होगी। जल संरक्षण के लिहाज से भी यह पहल महत्वपूर्ण साबित होगी, क्योंकि ताल की जलधारण क्षमता बढ़ने से आसपास के क्षेत्रों में भूजल स्तर सुधरेगा। इसके अतिरिक्त, सलोना ताल के विकसित होने से पर्यटन की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। बर्ड वॉचिंग और ईको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा, इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। मछुआरों और ग्रामीणों की आजीविका पर भी इसका सकारात्मक असर पड़ेगा। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि ‘वन डिस्ट्रिक्ट–वन वेटलैंड’ जैसी योजनाएं जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने में सहायक होंगी।
मुख्यमंत्री की ओर से वेटलैंड संरक्षण के लिए वन डिस्ट्रिक्ट, वन वेटलैंड की पहल की गई है, जिसके तहत जिले के सलोना ताल को चिह्नित करने का प्रयास किया जा रहा है। सलोना ताल का संरक्षण, संवर्धन का प्रयास जारी है और भविष्य में रामसर की लिस्ट में शामिल करने के लिए प्रयास किया जाएगा। -आकांक्षा जैन, डीएफओ।