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Azamgarh News: देवी भजनों से गूंजता रहा माता रानी का दरबार

Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 24 Mar 2026 01:26 AM IST
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The court of Mata Rani kept resonating with divine hymns.
निजामाबाद में मां शीतला धाम में भजन-कीर्तन में मौजूद भक्त। संवाद
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आजमगढ़। चैत्र नवरात्र पर जिले के प्रमुख शक्ति स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। निजामाबाद तहसील क्षेत्र के भैरोपुर कला ग्राम सभा स्थित मां शीतला मंदिर शक्तिपीठ और पल्हना क्षेत्र में मां पाल्हमेश्वरी धाम में दर्शन-पूजन के लिए भक्तों का तांता लगा हुआ है। दोनों धामों में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।
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नवरात्र के पांचवें दिन भैरोपुर कला स्थित मां शीतला मंदिर में भक्तों ने मां के स्कंदमाता स्वरूप के दर्शन किए। मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ रही। पांचवें दिन पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं की भागीदारी अधिक रही। पूरे परिसर में भक्ति का वातावरण बना रहा और श्रद्धालु विधि-विधान से माता का पूजन-अर्चन करते रहे।
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मंदिर परिसर में आयोजित भक्ति कार्यक्रम में गायक कलाकार जेपी मद्धेशिया, प्रमोद गौड़ और सुरेश गौड़ ने माता के पारंपरिक पचरा गीतों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। ‘निमिया के डरिया मैया डाले ली झलुववा कि झूली झूली ना’ और ‘चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है’ जैसे गीतों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
वहीं, पल्हना स्थित मां पाल्हमेश्वरी धाम में भी श्रद्धालुओं का भारी भीड़ रही। इस प्रमुख धार्मिक स्थल पर आजमगढ़ के अलावा गाजीपुर, जौनपुर, मऊ सहित अन्य जनपदों से भी भक्त दर्शन-पूजन के लिए पहुंच रहे हैं। मां के जयकारों और घंटा-घड़ियाल की गूंज से पूरा धाम भक्तिमय वातावरण में डूबा है। श्रद्धालुओं का मानना है कि मां के दरबार से कोई भी याचक खाली हाथ नहीं लौटता और मां सभी की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां पाल्हमेश्वरी धाम का विशेष महत्व है।
भरथीपुर गांव निवासी रामबच्चन सिंह ने वर्ष 1984 में मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाराजा दक्ष के यज्ञ प्रसंग के बाद देवी सती के अंग जहां-जहां गिरे, वहां शक्तिपीठों की स्थापना हुई। पल्हना स्थित मां पाल्हमेश्वरी धाम को भी श्रद्धालु ऐसे ही प्रमुख शक्ति स्थलों में मानते हैं। कहा जाता है कि महान यायावर संत राहुल सांकृत्यायन भी इस स्थल पर आए थे और यहां खुदाई भी करवाई थी, लेकिन मां की पल्थी का अंत नहीं मिल सका।
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