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Balrampur News: दिव्यांग बच्चों के लिए 24.94 करोड़ से बनेगा विशेष माध्यमिक विद्यालय
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बलरामपुर में स्थित जिला दिव्यांग सशक्तीकरण अधिकारी कार्यालय।-संवाद
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बलरामपुर। जिले में दिव्यांग बच्चों को बेहतर और समावेशी शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए समेकित विशेष माध्यमिक विद्यालय खुलेगा। प्रस्तावित विद्यालय में कक्षा 6 से 12 तक पढ़ाई की व्यवस्था होगी और कुल 540 सीटें निर्धारित की गई हैं। प्रत्येक कक्षा में 80 सीटें तय की गई हैं, जिससे अधिक से अधिक विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। यह विद्यालय आधुनिक संसाधनों और सुविधाओं से युक्त होगा, ताकि दिव्यांग बच्चों को अनुकूल वातावरण में पढ़ाई का अवसर मिल सके।
परियोजना की कुल लागत 24.94 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। निर्माण कार्य के लिए प्रथम किस्त के रूप में 3.46 करोड़ रुपये की धनराशि जारी हो चुकी है। धनराशि जारी होने के बाद निर्माण कार्य जल्द शुरू होने की संभावना है। विद्यालय में 50 प्रतिशत सीटें यानी 270 सीटें दिव्यांग बच्चों के लिए आरक्षित रहेंगी। इसके अलावा दूरदराज क्षेत्रों के विद्यार्थियों की सुविधा के लिए छात्र और छात्राओं के लिए अलग-अलग हॉस्टल बनाए जाएंगे। प्रत्येक हॉस्टल में 50-50 बच्चों के रहने की व्यवस्था होगी, जिससे आवासीय सुविधा के साथ नियमित अध्ययन सुनिश्चित किया जा सकेगा।
कचहरी के पास होगा विद्यालय भवन का निर्माण
जिला दिव्यांग सशक्तीकरण अधिकारी तनुज त्रिपाठी ने बताया कि विद्यालय का निर्माण कचहरी के पास ही होगा। इसके लिए जमीन तय की जा चुकी है। दिव्यांग बच्चों के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है। यहां विशेष शिक्षकों की तैनाती, सुगम्य भवन, रैंप, सहायक उपकरण, ब्रेल सामग्री, श्रवण सहायता और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने कहा कि इससे दिव्यांग बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने में मदद मिलेगी और उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलेगा।
विद्यार्थियों में उत्साह, शिक्षा का मिलेगा बड़ा अवसर
विशेष विद्यालय को लेकर दिव्यांग बच्चों और उनके परिजनों में उत्साह है। छात्र अनूप पांडेय ने कहा कि जिले में ही ऐसा विद्यालय बनने से बाहर पढ़ाई के लिए जाने की मजबूरी खत्म होगी। अगर यहां पढ़ाई और रहने की सुविधा मिलेगी तो हमें काफी सहूलियत होगी और हम नियमित रूप से पढ़ सकेंगे। अनुराग ने बताया कि पढ़ने की इच्छा होने के बावजूद सुविधाओं के अभाव में कई बार पढ़ाई प्रभावित होती है। वहीं छात्रा बिंदू ने कहा कि छात्राओं के लिए अलग हॉस्टल बनना बहुत जरूरी है। अमित कुमार ने कहा कि दिव्यांग बच्चों को अक्सर उचित मार्गदर्शन और संसाधन नहीं मिल पाते। जिले के दिव्यांग बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुरक्षित आवास और बेहतर संसाधनों की सुविधा एक ही परिसर में मिलेगी।
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परियोजना की कुल लागत 24.94 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। निर्माण कार्य के लिए प्रथम किस्त के रूप में 3.46 करोड़ रुपये की धनराशि जारी हो चुकी है। धनराशि जारी होने के बाद निर्माण कार्य जल्द शुरू होने की संभावना है। विद्यालय में 50 प्रतिशत सीटें यानी 270 सीटें दिव्यांग बच्चों के लिए आरक्षित रहेंगी। इसके अलावा दूरदराज क्षेत्रों के विद्यार्थियों की सुविधा के लिए छात्र और छात्राओं के लिए अलग-अलग हॉस्टल बनाए जाएंगे। प्रत्येक हॉस्टल में 50-50 बच्चों के रहने की व्यवस्था होगी, जिससे आवासीय सुविधा के साथ नियमित अध्ययन सुनिश्चित किया जा सकेगा।
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कचहरी के पास होगा विद्यालय भवन का निर्माण
जिला दिव्यांग सशक्तीकरण अधिकारी तनुज त्रिपाठी ने बताया कि विद्यालय का निर्माण कचहरी के पास ही होगा। इसके लिए जमीन तय की जा चुकी है। दिव्यांग बच्चों के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है। यहां विशेष शिक्षकों की तैनाती, सुगम्य भवन, रैंप, सहायक उपकरण, ब्रेल सामग्री, श्रवण सहायता और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने कहा कि इससे दिव्यांग बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने में मदद मिलेगी और उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलेगा।
विद्यार्थियों में उत्साह, शिक्षा का मिलेगा बड़ा अवसर
विशेष विद्यालय को लेकर दिव्यांग बच्चों और उनके परिजनों में उत्साह है। छात्र अनूप पांडेय ने कहा कि जिले में ही ऐसा विद्यालय बनने से बाहर पढ़ाई के लिए जाने की मजबूरी खत्म होगी। अगर यहां पढ़ाई और रहने की सुविधा मिलेगी तो हमें काफी सहूलियत होगी और हम नियमित रूप से पढ़ सकेंगे। अनुराग ने बताया कि पढ़ने की इच्छा होने के बावजूद सुविधाओं के अभाव में कई बार पढ़ाई प्रभावित होती है। वहीं छात्रा बिंदू ने कहा कि छात्राओं के लिए अलग हॉस्टल बनना बहुत जरूरी है। अमित कुमार ने कहा कि दिव्यांग बच्चों को अक्सर उचित मार्गदर्शन और संसाधन नहीं मिल पाते। जिले के दिव्यांग बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुरक्षित आवास और बेहतर संसाधनों की सुविधा एक ही परिसर में मिलेगी।