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Balrampur News: फर्जी सप्लाई और बिलों की कड़ियां खंगाल रही विजिलेंस
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Wed, 17 Jun 2026 12:04 AM IST
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बलरामपुर। बहुचर्चित एनआरएचएम घोटाले की जांच अब खरीद प्रक्रिया और भुगतान के रिकॉर्ड तक पहुंच गई है। विजिलेंस उन कंपनियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है, जिनके नाम पर स्वास्थ्य विभाग में उपकरण, दवाएं, फर्नीचर, एसी, कूलर, पंखे और अन्य सामग्री की खरीद दिखाकर करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया था।
जांच के दौरान कुछ कंपनियों ने संबंधित फर्मों को किसी भी प्रकार की सप्लाई देने से इन्कार किया है। इसके बाद विजिलेंस को फर्जी बिल और वाउचर के जरिये भुगतान किए जाने की आशंका हुई है। इसी आधार पर करीब दो दर्जन कंपनियों से पूछताछ की जा रही है और उनके अभिलेखों का विभागीय रिकॉर्ड से मिलान किया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, घोटाले के समय पूर्व कांग्रेस विधायक मुकेश श्रीवास्तव, उनके परिवार और रिश्तेदारों से जुड़ी कई फर्मों को बड़े पैमाने पर भुगतान हुआ था। अब जांच एजेंसी यह पता लगा रही है कि जिन बिलों और सप्लाई रिकॉर्ड के आधार पर भुगतान किया गया, वे वास्तविक थे या सिर्फ कागजों पर तैयार किए गए थे।
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विजिलेंस यह भी जांच कर रही है कि खरीद आदेश किस आधार पर जारी हुए, सामग्री की प्राप्ति का प्रमाण किसने दिया और भुगतान को किन अधिकारियों ने मंजूरी दी। यदि कंपनियों द्वारा सप्लाई नहीं किए जाने की बात सही पाई जाती है, तो मामला वित्तीय अनियमितता से आगे बढ़कर सरकारी धन के गबन और फर्जी दस्तावेज तैयार करने का बन सकता है।
जांच अधिकारी विजय यादव ने बताया कि पूर्व विधायक और उनके परिवार से जुड़ी फर्मों को सप्लाई करने वाली कंपनियों का पूरा विवरण जुटाया जा रहा है। कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। सभी दस्तावेजों का सत्यापन कराया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सीएचसी और पीएचसी भी जांच के दायरे में
जांच केवल जिला अस्पताल तक सीमित नहीं है। जिले के नौ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और 24 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में कराए गए मेंटेनेंस कार्यों की भी जांच हो रही है। आरोप है कि कई जगह मरम्मत और टाइल्स लगाने के नाम पर भुगतान तो हुआ, लेकिन काम नहीं हुआ या बहुत कम हुआ। विजिलेंस दवा खरीद से जुड़े लेनदेन की भी जांच कर रही है। पूर्व विधायक के भाई की पत्नी के नाम से संचालित हिंदुस्तान ड्रग्स एंड फार्मास्यूटिकल्स सहित कई फर्मों के दस्तावेज देखे जा रहे हैं। इसके अलावा आरपी कंस्ट्रक्शन और सृष्टि इंटरप्राइजेज समेत परिवार से जुड़ी अन्य फर्मों के भुगतान और खरीद संबंधी रिकॉर्ड भी जांच के घेरे में हैं।
जांच के दौरान कुछ कंपनियों ने संबंधित फर्मों को किसी भी प्रकार की सप्लाई देने से इन्कार किया है। इसके बाद विजिलेंस को फर्जी बिल और वाउचर के जरिये भुगतान किए जाने की आशंका हुई है। इसी आधार पर करीब दो दर्जन कंपनियों से पूछताछ की जा रही है और उनके अभिलेखों का विभागीय रिकॉर्ड से मिलान किया जा रहा है।
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सूत्रों के अनुसार, घोटाले के समय पूर्व कांग्रेस विधायक मुकेश श्रीवास्तव, उनके परिवार और रिश्तेदारों से जुड़ी कई फर्मों को बड़े पैमाने पर भुगतान हुआ था। अब जांच एजेंसी यह पता लगा रही है कि जिन बिलों और सप्लाई रिकॉर्ड के आधार पर भुगतान किया गया, वे वास्तविक थे या सिर्फ कागजों पर तैयार किए गए थे।
विजिलेंस यह भी जांच कर रही है कि खरीद आदेश किस आधार पर जारी हुए, सामग्री की प्राप्ति का प्रमाण किसने दिया और भुगतान को किन अधिकारियों ने मंजूरी दी। यदि कंपनियों द्वारा सप्लाई नहीं किए जाने की बात सही पाई जाती है, तो मामला वित्तीय अनियमितता से आगे बढ़कर सरकारी धन के गबन और फर्जी दस्तावेज तैयार करने का बन सकता है।
जांच अधिकारी विजय यादव ने बताया कि पूर्व विधायक और उनके परिवार से जुड़ी फर्मों को सप्लाई करने वाली कंपनियों का पूरा विवरण जुटाया जा रहा है। कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। सभी दस्तावेजों का सत्यापन कराया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सीएचसी और पीएचसी भी जांच के दायरे में
जांच केवल जिला अस्पताल तक सीमित नहीं है। जिले के नौ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और 24 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में कराए गए मेंटेनेंस कार्यों की भी जांच हो रही है। आरोप है कि कई जगह मरम्मत और टाइल्स लगाने के नाम पर भुगतान तो हुआ, लेकिन काम नहीं हुआ या बहुत कम हुआ। विजिलेंस दवा खरीद से जुड़े लेनदेन की भी जांच कर रही है। पूर्व विधायक के भाई की पत्नी के नाम से संचालित हिंदुस्तान ड्रग्स एंड फार्मास्यूटिकल्स सहित कई फर्मों के दस्तावेज देखे जा रहे हैं। इसके अलावा आरपी कंस्ट्रक्शन और सृष्टि इंटरप्राइजेज समेत परिवार से जुड़ी अन्य फर्मों के भुगतान और खरीद संबंधी रिकॉर्ड भी जांच के घेरे में हैं।