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Barabanki News: नागदेवता मंदिर में पूर्णिमा से सजेगा आस्था का कुंभ

Sun, 26 Jul 2026 01:27 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी Updated Sun, 26 Jul 2026 01:27 AM IST
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A grand gathering of faith will unfold at the Nagdevta Temple starting on the full moon day.
बाराबंकी-हैदरगढ़ राजमार्ग पर स्थित सतरिख के प्रसिद्ध पौराणिक नागदेवता मंदिर में लगने वाले ऐतिहा
बाराबंकी। बाराबंकी-हैदरगढ़ राजमार्ग पर स्थित सतरिख के प्रसिद्ध पौराणिक नागदेवता मंदिर में लगने वाले ऐतिहासिक मेले की तैयारियां तेज हो गई हैं। आषाढ़ माह की गुरु पूर्णिमा से शुरू होने वाला यह प्राचीन मेला 28 जुलाई से नाग पंचमी तक लगातार 26 दिनों तक चलेगा। इस दौरान जिले ही नहीं, बल्कि सीतापुर, बहराइच, अयोध्या, लखनऊ सहित आसपास के कई जिलों से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
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मेले की तैयारियों का जायजा लेने के लिए शनिवार को डीएम ईशान प्रताप सिंह और जॉइंट मजिस्ट्रेट गुंजिता अग्रवाल मंदिर परिसर पहुंचे। अधिकारियों ने मंदिर परिसर, नागदेव की बांबी, अभरण सरोवर की सीढ़ियों और पूरे मेला क्षेत्र की साफ-सफाई दुरुस्त रखने के निर्देश अधिकारियों को दिए।
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उन्होंने श्रद्धालुओं की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए व्यवस्थाएं समय से पूरी करने पर जोर दिया। यह ऐतिहासिक मेला एक बार फिर आस्था, परंपरा और लोकविश्वास का बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। प्रशासन तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा है, जबकि श्रद्धालुओं में भी मेले को लेकर उत्साह साफ दिखाई देने लगा है।
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दूध, चावल और बेलपत्र से होती है नागदेव की पूजा
मेले में आने वाले श्रद्धालु मिट्टी की छोटी मालिया (पात्र) में दूध, चावल, बेलपत्र और पुष्प भरकर नागदेव की बांबी पर अर्पित करते हैं। मान्यता है कि पूजा के बाद खाली मिट्टी की मालिया को घर के किसी कोने में रखने से सर्प भय नहीं रहता और परिवार पर नागदेव की कृपा बनी रहती है। इसी आस्था के कारण हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
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रात में ठहरने की व्यवस्था बनी बड़ी चुनौती
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के बावजूद मेला परिसर में रात्रि विश्राम की पर्याप्त व्यवस्था अब भी नहीं है। परिसर में बने दो रैन बसेरों पर सरकारी कर्मचारियों का कब्जा रहता है, जिससे दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को रात गुजारने में परेशानी होती है। कई परिवार खुले स्थानों या अस्थायी इंतजामों के सहारे रात बिताने को मजबूर हो जाते हैं।

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अतिरिक्त रैन बसेरे की मांग
मेला समिति के अध्यक्ष देवकी नंदन ने बताया कि प्रशासन से अतिरिक्त रैन बसेरे बनवाने की मांग की गई है। यदि समय रहते ठहरने की पर्याप्त व्यवस्था हो जाए तो बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होगी और मेले की व्यवस्थाएं भी बेहतर हो सकेंगी।
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