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Barabanki News: कवियों ने हास्य रंग से खेली होली
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Tue, 10 Mar 2026 02:07 AM IST
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बाराबंकी। श्रीहोलिकोत्सव समिति द्वारा होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर अखिल भारतीय हास्य कवि सम्मेलन भी हुआ। नामचीन कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया।
कार्यक्रम का शुभारंभ रविवार रात कस्बे के मिडिल स्कूल प्रांगण में हुआ। नगर पंचायत अध्यक्ष इरशाद अहमद और बार एसोसिएशन के नव निर्वाचित अध्यक्ष प्रेमचंद पाल ने दीप प्रज्ज्वलित किया। डॉ. ओम शर्मा ‘ओम’ ने मां सरस्वती की वंदना से काव्य पाठ शुरू किया। उन्होंने “श्वास बंद हो या श्वास तंत्र बंद हो, परंतु वंदनीय वंदना की वंदना न बंद हो” सुनाई। छत्तीसगढ़ के हीरामणि वैष्णव ने अपनी कविता “डर को भी डर दिखलाते मार डालेंगे” से श्रोताओं को रोमांचित किया। कवि कमल आग्नेय ने देशभक्ति का संदेश देते हुए “चंद्रयान से आगे बढ़कर सूर्ययान का भारत है” सुनाया। डॉ. ओम शर्मा ‘ओम’ ने आपसी प्रेम का संदेश देते हुए “प्रीत के गीत गाएं होली में” प्रस्तुत किया। कवि प्रमोद पंकज और सचिन सावरिया ने भी अपनी रचनाओं से वाहवाही लूटी।
कवि लोकेश त्रिपाठी ने “रूठ जाएं अगर तो मना लीजिए” सुनाकर श्रोताओं को हंसाया। सौरभ जायसवाल ने “दोस्ती के कभी जुनून पर नहीं गए” कविता से खूब तालियां बटोरीं। इन कवियों ने अपनी अनूठी शैली में व्यंग्य और हास्य का मिश्रण प्रस्तुत किया। उनकी कविताओं ने देर रात तक श्रोताओं को बांधे रखा। समिति के अध्यक्ष चेतन अग्रवाल ने अतिथियों का स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया। कार्यक्रम में केके जैन, कैलाश अग्रवाल, सुरेंद्र वर्मा, अनिल अग्रवाल और सर्वेश श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
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कार्यक्रम का शुभारंभ रविवार रात कस्बे के मिडिल स्कूल प्रांगण में हुआ। नगर पंचायत अध्यक्ष इरशाद अहमद और बार एसोसिएशन के नव निर्वाचित अध्यक्ष प्रेमचंद पाल ने दीप प्रज्ज्वलित किया। डॉ. ओम शर्मा ‘ओम’ ने मां सरस्वती की वंदना से काव्य पाठ शुरू किया। उन्होंने “श्वास बंद हो या श्वास तंत्र बंद हो, परंतु वंदनीय वंदना की वंदना न बंद हो” सुनाई। छत्तीसगढ़ के हीरामणि वैष्णव ने अपनी कविता “डर को भी डर दिखलाते मार डालेंगे” से श्रोताओं को रोमांचित किया। कवि कमल आग्नेय ने देशभक्ति का संदेश देते हुए “चंद्रयान से आगे बढ़कर सूर्ययान का भारत है” सुनाया। डॉ. ओम शर्मा ‘ओम’ ने आपसी प्रेम का संदेश देते हुए “प्रीत के गीत गाएं होली में” प्रस्तुत किया। कवि प्रमोद पंकज और सचिन सावरिया ने भी अपनी रचनाओं से वाहवाही लूटी।
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कवि लोकेश त्रिपाठी ने “रूठ जाएं अगर तो मना लीजिए” सुनाकर श्रोताओं को हंसाया। सौरभ जायसवाल ने “दोस्ती के कभी जुनून पर नहीं गए” कविता से खूब तालियां बटोरीं। इन कवियों ने अपनी अनूठी शैली में व्यंग्य और हास्य का मिश्रण प्रस्तुत किया। उनकी कविताओं ने देर रात तक श्रोताओं को बांधे रखा। समिति के अध्यक्ष चेतन अग्रवाल ने अतिथियों का स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया। कार्यक्रम में केके जैन, कैलाश अग्रवाल, सुरेंद्र वर्मा, अनिल अग्रवाल और सर्वेश श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
