{"_id":"6a5fd334a7ea19e61005e295","slug":"22-flood-outposts-active-monitoring-being-conducted-from-the-control-room-bhadohi-news-c-191-1-svns1015-146103-2026-07-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bhadohi News: 22 बाढ़ चौकियां सक्रिय, कंट्रोल रूम से हे रही निगरानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bhadohi News: 22 बाढ़ चौकियां सक्रिय, कंट्रोल रूम से हे रही निगरानी
विज्ञापन
बाढ़ राहत शरण शिविर, शिव करन मिश्र इंटर कालेज इटहरा, कोनिया। संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बारिश शुरु होने के साथ ही प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया है। डीएम शैलेष कुमार के निर्देश पर सभी 22 बाढ़ चौकियां सक्रिय कर दी गई हैं। बाढ़ से प्रभावित गांवों के लोगों की सहायता एवं सुरक्षा के लिए कंट्रोल रूम स्थापित कर दिए गए हैं। इसमें एक कंट्रोल रूम कलेक्ट्रेट, तीन तहसील, छह ब्लॉकों में स्थापित किए गए हैं। बाढ़ प्रभावितों के लिए चौकियों के आसपास शरणालय स्थल भी बनाए जा रहे हैं। जहां बाढ़ प्रभावितों को ठहराया जाएगा।
जिले में गंगा तट इलाका करीब 35 से 40 किमी क्षेत्र में है। इनमें कई गांव ऐसे हैं, जहां गंभीर रूप से बाढ़ की स्थिति पैदा हो जाती है। खास तौर पर डीघ ब्लॉक के कोनिया क्षेत्र के छेछुआ, भुर्रा, इटहरा और मवैया थानसिंह, हरिरामपुर गांव बाढ़ की दृष्टिकोण से अति संवेदनशील की श्रेणी में चिह्नित हैं।
मानसून की बारिश इस बार करीब 20 दिन विलंब से शुरू हुई है। अभी तक अच्छी बारिश नहीं हुई, लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बारिश से जिले में गंगा का जलस्तर बढ़ने लगा है। गंगा का जलस्तर अभी चेतावनी बिंदु 80.200 मीटर से करीब 11 मीटर कम यानी 69.50 मीटर पर ही है। हालांकि प्रशासन ने बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है।
विज्ञापन
बाढ़ से प्रभावित होने वाले 193 गांवों में विभागीय टीमों को समय-समय पर पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं। प्रभावित लोगों के लिए 22 बाढ़ राहत शिविर स्थापित किए गए हैं। प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार 22 बाढ़ चौकियों पर दो-दो कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। एक कर्मचारी चौकी पर 12 घंटे मौजूद रहेगा।
जिला स्तरीय बाढ़ कंट्रोल रूम कलेक्ट्रेट में स्थापित किया गया है। इसका नंबर 05414-250223 और 05414-250308 है। इसके अलावा राहत एवं बचाव कार्य में मदद के लिए सभी छह ब्लॉक कार्यालयों और तीनों तहसीलों में बाढ़ राहत कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं।
-- -- -- -- --
यहां स्थापित की गई हैं बाढ़ चौकियां
औराई ब्लॉक में डेरवां, खमरिया, द्वारिकापुर, सहसेपुर, डीघ में धनतुलसी, लखनपुर, भदरांव, कटरा, इटहरा, कलिजरा, इनारगांव, बिहरोजपुर में बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं। इसी तरह सुरियावां विकास खंड के करियांव, अबरना, सांडा, रामनगर तथा भदोही में सर्रोई, मुंसीलाटपुर, तुलसीचक, मईहरदोपट्टी और ज्ञानपुर विकास खंड में रमईपुर, मतेथु, कसियापुर, श्रीकांतपुर व भगवानपुर में बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं।
-- -- -- -- -- -- -
प्रशासन की तरफ से क्या है तैयारी
कुल बनने वाली बाढ़ चौकियां- 22
बाढ़ राहत शिविर की संख्या - 22
अति संवेदनशील गांव- 12
संवेदनशील गांव- 193
छोटी नाव- 40
बड़ी नाव- 15
मझौली नाव- 10
मोटर बोट: तीन
कुल गोताखोर- 13
-- -- -- -- --
कटान से विस्थापित हो चुके हैं कई परिवार
गंगा से सटे 46 गांवों में प्रशासन की नजर रहती है। हालांकि सबसे ज्यादा छेछुआ, भुर्रा, मवैयाथान सिंह, नारेपार, इटहरा आदि गांव प्रभावित होते हैं। छेछुआ, भुर्रा में कई परिवार तो दो दशक में विस्थापित हो चुके हैं। 50 बिंद और 20 दलित परिवार भूमिहीन होकर बेघर हो चुके हैं। छेछुआ गांव के बिनोद सिंह, रामू सिंह, जितेंद्र सिंह, श्यामू सिंह, धर्मेंद्र सिंह आदि की बहुत अधिक जमीन कटान में जा चुकी है। हर साल आने वाली बाढ़ में एक से दो बीघे उपजाऊ जमीन गंगा में समा जाती है।
-- -- --
वर्जन
गंगा का जलस्तर अभी काफी कम है। तटवर्ती गांवों के लिए कोई दिक्कत नहीं है। सभी 22 बाढ़ चौकियां सक्रिय की जा चुकी हैं। कंट्रोल रूम भी चालू है। स्वास्थ्य, शिक्षा, पशुपालन, पूर्ति समेत अन्य विभागों को दिशा-निर्देश भी दिए जा चुके हैं। - शुभांगी शुक्ला, एडीएम।
विज्ञापन
जिले में गंगा तट इलाका करीब 35 से 40 किमी क्षेत्र में है। इनमें कई गांव ऐसे हैं, जहां गंभीर रूप से बाढ़ की स्थिति पैदा हो जाती है। खास तौर पर डीघ ब्लॉक के कोनिया क्षेत्र के छेछुआ, भुर्रा, इटहरा और मवैया थानसिंह, हरिरामपुर गांव बाढ़ की दृष्टिकोण से अति संवेदनशील की श्रेणी में चिह्नित हैं।
विज्ञापन
मानसून की बारिश इस बार करीब 20 दिन विलंब से शुरू हुई है। अभी तक अच्छी बारिश नहीं हुई, लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बारिश से जिले में गंगा का जलस्तर बढ़ने लगा है। गंगा का जलस्तर अभी चेतावनी बिंदु 80.200 मीटर से करीब 11 मीटर कम यानी 69.50 मीटर पर ही है। हालांकि प्रशासन ने बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है।
विज्ञापन
बाढ़ से प्रभावित होने वाले 193 गांवों में विभागीय टीमों को समय-समय पर पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं। प्रभावित लोगों के लिए 22 बाढ़ राहत शिविर स्थापित किए गए हैं। प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार 22 बाढ़ चौकियों पर दो-दो कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। एक कर्मचारी चौकी पर 12 घंटे मौजूद रहेगा।
जिला स्तरीय बाढ़ कंट्रोल रूम कलेक्ट्रेट में स्थापित किया गया है। इसका नंबर 05414-250223 और 05414-250308 है। इसके अलावा राहत एवं बचाव कार्य में मदद के लिए सभी छह ब्लॉक कार्यालयों और तीनों तहसीलों में बाढ़ राहत कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं।
यहां स्थापित की गई हैं बाढ़ चौकियां
औराई ब्लॉक में डेरवां, खमरिया, द्वारिकापुर, सहसेपुर, डीघ में धनतुलसी, लखनपुर, भदरांव, कटरा, इटहरा, कलिजरा, इनारगांव, बिहरोजपुर में बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं। इसी तरह सुरियावां विकास खंड के करियांव, अबरना, सांडा, रामनगर तथा भदोही में सर्रोई, मुंसीलाटपुर, तुलसीचक, मईहरदोपट्टी और ज्ञानपुर विकास खंड में रमईपुर, मतेथु, कसियापुर, श्रीकांतपुर व भगवानपुर में बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं।
प्रशासन की तरफ से क्या है तैयारी
कुल बनने वाली बाढ़ चौकियां- 22
बाढ़ राहत शिविर की संख्या - 22
अति संवेदनशील गांव- 12
संवेदनशील गांव- 193
छोटी नाव- 40
बड़ी नाव- 15
मझौली नाव- 10
मोटर बोट: तीन
कुल गोताखोर- 13
कटान से विस्थापित हो चुके हैं कई परिवार
गंगा से सटे 46 गांवों में प्रशासन की नजर रहती है। हालांकि सबसे ज्यादा छेछुआ, भुर्रा, मवैयाथान सिंह, नारेपार, इटहरा आदि गांव प्रभावित होते हैं। छेछुआ, भुर्रा में कई परिवार तो दो दशक में विस्थापित हो चुके हैं। 50 बिंद और 20 दलित परिवार भूमिहीन होकर बेघर हो चुके हैं। छेछुआ गांव के बिनोद सिंह, रामू सिंह, जितेंद्र सिंह, श्यामू सिंह, धर्मेंद्र सिंह आदि की बहुत अधिक जमीन कटान में जा चुकी है। हर साल आने वाली बाढ़ में एक से दो बीघे उपजाऊ जमीन गंगा में समा जाती है।
वर्जन
गंगा का जलस्तर अभी काफी कम है। तटवर्ती गांवों के लिए कोई दिक्कत नहीं है। सभी 22 बाढ़ चौकियां सक्रिय की जा चुकी हैं। कंट्रोल रूम भी चालू है। स्वास्थ्य, शिक्षा, पशुपालन, पूर्ति समेत अन्य विभागों को दिशा-निर्देश भी दिए जा चुके हैं। - शुभांगी शुक्ला, एडीएम।