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शक्ति के साथ शील और पद के साथ त्याग जरूरी : संतोष महराज

Wed, 22 Jul 2026 01:39 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 22 Jul 2026 01:39 AM IST
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Character alongside power and renunciation alongside position are essential: Santosh Maharaj.
सीतामढ़ी में श्री राम कथा सुनाते संतोष जी महराज। संवाद - फोटो : 1
धार्मिक और पौराणिक स्थल सीतामढ़ी में चल रहे नौ दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान के सातवें दिन श्रीराम कथा में संतोषजी महाराज, साधना शास्त्री और हरिहरानंद जी महाराज ने भगवान की दिव्य कथा सुनाई। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा का रसपान करने पहुंच रहे हैं। कथावाचक संतोषजी महाराज ने भगवान के 24 अवतारों का सुंदर वर्णन किया। उन्होंने कहा कि धर्म की रक्षा के लिए हर युग में भगवान अवतरित होते हैं। कहा पुराणों और श्रीमद्भागवत के अनुसार भगवान विष्णु ने धर्म की रक्षा के लिए 24 बार अवतार लिया। श्रीराम भी उन्हीं में से एक दिव्य अवतार हैं। कथा वाचक ने कहा कि ईश्वर के अवतार अलग-अलग हैं, पर उद्देश्य एक ही है, धर्म की रक्षा। श्रीराम का अवतार विशेष है क्योंकि उन्होंने राजा होकर भी मर्यादा निभाई। श्रीराम के जीवन से हमें यह सीख मिलती है कि शक्ति के साथ शील और पद के साथ त्याग जरूरी है।
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