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किशोर शिक्षा कार्यक्रम: स्कूलों में बदलेगी पढ़ाई की दिशा
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Tue, 28 Apr 2026 01:47 AM IST
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बदायूं। माध्यमिक विद्यालयों में अब विद्यार्थियों को उनके पाठ्यक्रम से अलग मानव शरीर की बदलती हुई संरचना का भी ज्ञान दिया जाएगा। इसके लिए शिक्षा निदेशालय की ओर से निर्देश दिया गया है। इसके तहत पहले शिक्षकों को प्रशिक्षण देकर तैयार किया जाएगा। इसके बाद शिक्षक विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करेंगे।
जिले में नौवीं से 12वीं कक्षा तक के माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत मनोविज्ञान व जीव-जंतु विज्ञान विषय के शिक्षक विद्यार्थियों को शरीर में बदलती संरचना से लेकर हार्मोन का ज्ञान देंगे। यदि स्कूल में दोनों विषय में से किसी एक विषय का शिक्षक नहीं है या पद रिक्त है तो संबंधित स्कूल के विज्ञान विषय के शिक्षक विद्यार्थियों को स्वास्थ्य की जानकारी देंगे।
योजना के तहत 10 से लेकर 19 वर्ष तक विद्यार्थियों को इसमें शामिल किया जाएगा। शिक्षा निदेशालय की ओर से किशोर शिक्षा कार्यक्रम चलाया जा रहा है। जिसके लिए स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर पहले शिक्षकों को प्रशिक्षण देंगे। जिसके बाद ये शिक्षक अपने स्कूलों में जाकर विद्यार्थियों को स्वस्थ रहने के तरीके बताएंगे। किशोर शिक्षा कार्यक्रम भारत सरकार की ओर से शुरू की गई एक महत्वपूर्ण पहल है। इसका मुख्य उद्देश्य किशोरों के मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास के साथ उन्हें सुरक्षित और स्वस्थ जीवन जीने के लिए जागरूक करना है। जिला विद्यालय निरीक्षक लालजी यादव ने बताया कि निर्देशों के बारे में सभी प्रधानाचार्य को अवगत करा दिया गया है।
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ये होंगे कार्यक्रम के फायदे
- स्वास्थ्य और स्वच्छता : किशोरों को व्यक्तिगत स्वास्थ्य, स्वच्छता और यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य के बारे में जानकारी देकर उन्हें सचेत करना।
- मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक विकास : किशोरों को आत्मविश्वास और आत्मसम्मान के विकास के लिए मार्गदर्शन देना।
- बचाव और सुरक्षा : किशोरों को उचित जानकारी होने से वे शारीरिक, मानसिक और सामाजिक खतरों से बच सकते हैं।
- भविष्य की तैयारी : कार्यक्रम किशोरों को समाज में सक्रिय और जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए तैयार करता है।
- आत्मनिर्भरता और निर्णय लेने की क्षमता : किशोरों में आत्मनिर्भरता और उचित निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना।
- सामाजिक और लैंगिक समानता : कार्यक्रम में लैंगिक समानता को प्रोत्साहित किया जाता है ताकि लड़के और लड़कियां दोनों समान अवसरों का लाभ उठा सकें।
- शारीरिक सुरक्षा और जागरूकता : किशोरों को शारीरिक सुरक्षा, शोषण, और दुर्व्यवहार से संबंधित मुद्दों के बारे में जागरूक करना ताकि वे ऐसी स्थितियों से स्वयं को सुरक्षित रख सकें।
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जिले में नौवीं से 12वीं कक्षा तक के माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत मनोविज्ञान व जीव-जंतु विज्ञान विषय के शिक्षक विद्यार्थियों को शरीर में बदलती संरचना से लेकर हार्मोन का ज्ञान देंगे। यदि स्कूल में दोनों विषय में से किसी एक विषय का शिक्षक नहीं है या पद रिक्त है तो संबंधित स्कूल के विज्ञान विषय के शिक्षक विद्यार्थियों को स्वास्थ्य की जानकारी देंगे।
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योजना के तहत 10 से लेकर 19 वर्ष तक विद्यार्थियों को इसमें शामिल किया जाएगा। शिक्षा निदेशालय की ओर से किशोर शिक्षा कार्यक्रम चलाया जा रहा है। जिसके लिए स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर पहले शिक्षकों को प्रशिक्षण देंगे। जिसके बाद ये शिक्षक अपने स्कूलों में जाकर विद्यार्थियों को स्वस्थ रहने के तरीके बताएंगे। किशोर शिक्षा कार्यक्रम भारत सरकार की ओर से शुरू की गई एक महत्वपूर्ण पहल है। इसका मुख्य उद्देश्य किशोरों के मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास के साथ उन्हें सुरक्षित और स्वस्थ जीवन जीने के लिए जागरूक करना है। जिला विद्यालय निरीक्षक लालजी यादव ने बताया कि निर्देशों के बारे में सभी प्रधानाचार्य को अवगत करा दिया गया है।
ये होंगे कार्यक्रम के फायदे
- स्वास्थ्य और स्वच्छता : किशोरों को व्यक्तिगत स्वास्थ्य, स्वच्छता और यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य के बारे में जानकारी देकर उन्हें सचेत करना।
- मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक विकास : किशोरों को आत्मविश्वास और आत्मसम्मान के विकास के लिए मार्गदर्शन देना।
- बचाव और सुरक्षा : किशोरों को उचित जानकारी होने से वे शारीरिक, मानसिक और सामाजिक खतरों से बच सकते हैं।
- भविष्य की तैयारी : कार्यक्रम किशोरों को समाज में सक्रिय और जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए तैयार करता है।
- आत्मनिर्भरता और निर्णय लेने की क्षमता : किशोरों में आत्मनिर्भरता और उचित निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना।
- सामाजिक और लैंगिक समानता : कार्यक्रम में लैंगिक समानता को प्रोत्साहित किया जाता है ताकि लड़के और लड़कियां दोनों समान अवसरों का लाभ उठा सकें।
- शारीरिक सुरक्षा और जागरूकता : किशोरों को शारीरिक सुरक्षा, शोषण, और दुर्व्यवहार से संबंधित मुद्दों के बारे में जागरूक करना ताकि वे ऐसी स्थितियों से स्वयं को सुरक्षित रख सकें।

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